
Lohardaga: नक्सलियों के खिलाफ अभियान को और धारदार बनाने के लिए झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के आला अधिकारी 24 फरवरी को हेलीकॉप्टर से लोहरदगा पहुंचे. इनमें झारखंड पुलिस के आईजी ऑपरेशन एवी होमकर, सीआरपीएफ के आईजी राजीव सिंह, पुलिस डीआईजी अमोल पालेकर शामिल थे. बीएस कॉलेज स्टेडियम में हेलीकॉप्टर से आए आला अधिकारियों का लोहरदगा की पुलिस कप्तान प्रियंका मीणा और एसडीपीओ बी एन सिंह ने स्वागत किया.
लोहरदगा परिसदन और सीआरपीएफ मुख्यालय में पुलिस और सीआरपीएफ के आला अधिकारियों के साथ इन तमाम पुलिस और सीआरपीएफ के आला अधिकारियों की बैठक हुई. इसमें लोहरदगा के बुलबुल जंगल में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान को आखरी मुकाम तक पहुंचाने की रणनीति तय की गई.
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पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त ऑपरेशन में नक्सलियों को काफी नुकसान पहुंचा है. एक नक्सली मारा गया है, जबकि अब तक कुल दस नक्सली लोहरदगा और लातेहार जिले में सुरक्षा बलों द्वारा दबोचे गए हैं. फिलहाल सुरक्षा बल जंगलों में बाकी नक्सलियों की तलाश में जुटे हुए हैं. इनका काफी असलहा भी बरामद कर लिया गया है.
खाने पीने की चीजें और जरूरी सामान भी सुरक्षाबलों ने जप्त किया है. पूरे इलाके की मैपिंग की जा रही है. नक्सलियों द्वारा बिछाए आईइडी को भी बरामद कर नष्ट करने का काम सुरक्षा बल कर रहे हैं.
समीक्षा बैठक के बाद आईजी अभियान अमोल विष्णु होमकर ने पत्रकारों से कहा कि आठ फरवरी से ही लोहरदगा के जंगलों में माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियान चल रहा है. रविंद्र गंझू और उसके दस्ते के 30- 35 नक्सलियों का जमावड़ा बुलबुल और आसपास जंगल में होने की सूचना पर अभियान शुरू किया गया था. इसमें झारखंड पुलिस, जगुआर, सीआरपीएफ और कोबरा की टीम शामिल थी.
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आईजी अभियान ने कहा कि ऑपरेशन की कोई सीमा नहीं होती है कि कब शुरू होता है कब खत्म होता है. यह लगातार चलने की प्रक्रिया है जब तक हम अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते. जब तक क्षेत्र को नक्सलवाद की काली छाया से मुक्त नहीं कर लेते तब तक अभियान चलता रहेगा.
अभी भी कुछ क्षेत्रों में जहां नक्सलियों के होने की सूचना है वहां अभियान चल रहा है. नक्सलियों के सपोर्टर जो है उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है.
यह अभियान अभूतपूर्व रहा क्योंकि लगातार 12 दिन तक चला. हमारे जवानों को शुरुआत में नुकसान भी उठाना पड़ा. ऑपरेशन में शामिल कोबरा के तीन जवान बारूदी सुरंग की चपेट में आकर घायल हो गए.
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इसके बाद भी जवानों ने हौसला दिखाया और पूरे आत्मविश्वास के साथ ही इस अभियान को जारी रखा जिसका परिणाम है कि ऐतिहासिक सफलता झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ को मिली है. एक इनामी नक्सली मुठभेड़ के दौरान मारा गया. जोनल कमांडर बलराम सहित कोर दस्ते के नौ नक्सली गिरफ्तार हुए.
भारी मात्रा में हथियार गोला-बारूद और बाकी सामान बरामद हुआ. इस पूरे अभियान से क्षेत्र के आम लोगों का भी आत्मविश्वास बढ़ा है. क्षेत्र के लोग भी नक्सलियों से त्रस्त हैं.
नक्सलियों ने अपने आपको बचाने के लिए जंगलों में प्रेशर आईडी और बारूदी सुरंग लगा दिया है जिसके चपेट में आने से आए दिन नागरिक मर रहे हैं उनके जानवर मर जाते हैं.
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इसके साथ ही आईजी अभियान ने सरकार की सरेंडर पॉलिसी का लाभ उठाते हुए नक्सलियों से हथियार डालने की अपील की. अन्यथा अंजाम भुगतने की बात कही.
कहा कि नक्सलियों के जो सपोर्टर हैं उन्हें चिन्हित किया जा रहा है. मुठभेड़ के दौरान जंगल छोड़कर भागकर शहर में छिपने वाले नक्सलियों की भी तलाश हो रही है.
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