
Praveen Munda
Ranchi : यह 1990 के दशक की बात है. झारखंड आंदोलन अपने चरम पर था. ऐसे ही अवसर पर सिल्ली के पतराहातू में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट आये थे. पतराहातू में कुर्मी सम्मेलन का आयोजन हुआ था. इसमें राजेश पायलट को आमंत्रित किया गया था. झारखंड आंदोलनकारी राजू माहतो कहते हैं- उस दौरान मैं आजसू में था. सुदेश महतो सहित कई अन्य नेता आंदोलन से जुड़े थे. हमलोगों ने तय किया था कि पतराहातू आने पर राजेश पायलट का विरोध करेंगे और उनको काला झंडा दिखायेंगे.
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राजू महतो कहते हैं- हमारा स्पष्ट मानना था कि जब तक अलग राज्य की मांग पूरी नहीं होगी, तब तक हमारा विरोध ऐसे ही जारी रहेगा. उस सम्मेलन में राजेश पायलट के अलावा मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम भी आये थे. कार्यक्रम स्थल पर सीआरपीएफ और बिहार पुलिस के जवान भरे पड़े थे. हमलोग भी पहले से ही वहां पर मौजूद थे. राजेश पायलट के वहां पहुंचते ही हमलोगों ने नारा लगाना शुरू किया- अलग राज्य बनाओ, नहीं तो वापस जाओ. इसके बाद थोड़ी ही देर में पत्थरबाजी भी शुरू हो गयी. आंदोलनकारियों की ओर से पत्थरबाजी शुरू हुई. दूसरी तरफ पुलिस के जवानों ने लाठी और राइफल के बट से हमला कर दिया. मैं एक हाथ से सिर को बचाते हुए नारा लगा रहा था. जब लाठीचार्ज हुई, तो सभी साथी तितर-बितर हो गये. मेरी पीठ पर काफी चोट लगी थी. इस घटना के बाद मुझे 12 -13 महीना बिस्तर पर ही रहकर इलाज कराना पड़ा. घर में ही इलाज हुआ. बहरहाल हमलोगों के विरोध के बीच वह सम्मेलन हुआ. लेकिन, उस मामले में पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं की गयी थी.
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उस समय एक अलग ही जोश था. जब आंदोलन के लिए निकलते थे, तब एक तरह से परिवार छोड़कर ही निकलते थे. शादी नहीं हुई थी. हालांकि, मेरे घर में पिताजी, भाई और बहनें चिंता करते थे. लेकिन, हमलोग यही सोचकर निकलते थे कि अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. हमलोगों की नीयत सही थी. कभी भी दूसरों को चोट पहुंचाने की नीयत से हमलोगों ने कोई हमला नहीं किया. हमलोग बस यही चाहते थे कि अलग राज्य मिल जाये. आंदोलन के दौरान कई बार राष्ट्रीय स्तर पर खबरें बनीं और केंद्र सरकार का ध्यान हमलोगों के आंदोलन की तरफ पड़ा.




