
Jamtara : दुमका सांसद सुनील सोरेन ने झारखंड सरकार के छठ पर्व को लेकर जारी की गयी गाइडलाइन की तीखी आलोचना की है. सुनील सोरेन ने कहा कि छठ लोक आस्था का महापर्व है. हेमंत सरकार ने जिस तरह इस आस्था पर चोट पहुंचायी है, वह बर्दाश्त के योग्य नहीं है. दुमका सांसद ने कहा कि सरकार ने सीधे तौर पर यह कह दिया कि किसी भी जलाशय में छठव्रती अर्घ्य नहीं दे सकते. यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक है.
सुनील सोरेन ने कहा कि हाल के दिनों में झारखंड में दो जगह उपचुनाव हुए. दोनों जगह खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दर्जनों सभाएं कीं और उसमें हजारों की भीड़ देखी गयी. अगर उन्हें कोरोना की इतनी ही चिंता थी, तो अपनी चुनावी सभा को उन्हें रोक देना चाहिए था. लेकिन, उन्होंने राजनीतिक लाभ लेने के लिए ऐसा नहीं किया. अब जब लोक आस्था का छठ पर्व सामने है, तो चार दिन पहले इस तरह के जन-विरोधी निर्देश जारी करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है.
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सांसद ने कहा कि अगर इस तरह की गाइडलाइन जारी करनी थी, तो यह निर्णय पहले ही लेना चाहिए था. सभी छठ घाटों पर तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. लोगों ने अपने घरों पर भी छठ की सारी तैयारियां पूरी की है, लेकिन उसमें यह तैयारी नहीं है कि घर में ही अर्घ्य देने की व्यवस्था हो. सांसद सुनील सोरेन ने कहा कि सरकार को अब अपनी इस गाइडलाइन को वापस लेना चाहिए.
जिला भाजपा ने भी दी कड़ी प्रतिक्रिया
वहीं, भाजपा जिला अध्यक्ष सोमनाथ सिंह ने भी प्रेस बयान जारी कर आपत्ति जतायी है. उन्होंने सरकार पर हिंदुओं की आस्था पर चोट पहुंचाने का आरोप लगाया है. कहा कि भाजपा झारखंड सरकार की गाइडलाइन को नहीं मानेगी. सरकार इस गाइडलाइन को जल्द से जल्द वापस ले.
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