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कहानियां झारखंड आंदोलन की-7 : पुलिस की तैनाती के बीच जब मोस्ट वांटेड आंदोलनकारी डॉ देवशरण भगत का साक्षात्कार हुआ

Ranchi :  झारखंड आंदोलन के दौरान के हजारों किस्से-कहानियां आज भी लोगों को रोमांचित कर देते हैं. ऐसा ही एक किस्सा वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा का है. वे बताते हैं, आजसू के द्वारा अलग राज्य का आंदोलन एक समय काफी हिंसक हो गया था. राज्य में कई जगहों पर रेल की पटरियां उड़ायी जा रही थीं. उस समय आजसू के देवशरण भगत सहित अन्य सदस्यों को पुलिस बहुत जोर-शोर से खोज रही थी.

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ऐसे ही समय में दिल्ली की एक मीडिया टीम आजसू के देवशरण भगत का इंटरव्यू करने के लिए रांची पहुंची. मगर उनके पास देवशरण भगत से इंटरव्यू करने का कोई जरिया नहीं था. उन लोगों ने प्रभात खबर के संपादक हरिवंश से संपर्क किया. हरिवंश जी ने यह दायित्व अनुज सिन्हा को सौंपा.

अनुज सिन्हा कांके में किसी घर में छिपे देवशरण भगत को अपने स्कूटर पर बिठाकर अल्बर्ट एक्का चौक के पास थ़ड़पखना लाये और एक घर पर दिल्ली के पत्रकारों को देवशरण भगत का इंटरव्यू कराया. इंटरव्यू के बाद देवशरण भगत को फिर से स्कूटर पर बिठाया और अल्बर्ट एक्का चौक पर ले जाकर स्कूटर रोक दिया.

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वह जाड़ा का समय था. उस समय चौक पर पुलिस के जवान भरे हुए थे. परिंदा भी पर नहीं मारने की स्थिति में था. डॉ देवशरण भगत ने गाड़ी रुकते ही अनुज कुमार सिन्हा से कहा “तू मरवा देभिन का, गोटा फोर्सवा भोरल आहे भाई, कुछ तो करके होवी.” यह कहकर डॉ देवशरण भगत स्कूटर से उतरकर फिरायालाल बिल्डिंग की ओर बढ़े. वहां पहुंचकर उन्होंने सिगरेट निकाला और पीने लगे. इस दृश्य को वहां मौजूद छायाकार बापी ने देख लिया और तुरंत अपने कैमरे में उनकी सिगरेट पीते हुए तस्वीर उतार डाली. कैमरे का फ्लैश चमकते ही पुलिस वाले चौकस हो गये.

अनुज कुमार सिन्हा ने कहा- भाग छोटू दा..और फिर तुरंत स्कूटर स्टर्ट कर डॉ देवशरण भगत को बिठाया और निकल गये. डॉ देवशरण भगत उस समय अपने सिर पर छोटा तौलिया बांधे हुए थे. किसी को शक भी नहीं हुआ कि शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर सबसे वांटेड झारखंड आंदोलनकारी पुलिस की मौजूदगी में सिगरेट पी सकता है.  यह एक जीवंत स्मृति है. झारखंड आंदोलन के इतिहास में इस मंजर को भुलाया नहीं जा सकता है. अगले दिन डॉ देवशरण भगत देशभर के अखबारों की सुर्खियों में छा गये थे.

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