Jharkhand Story

कहानियां झारखंड आंदोलन की-5 : रामटहल चौधरी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से कहा था -अलग राज्य नहीं बना तो यहां के सांसद सामूहिक इस्तीफा दे देंगे

Ranchi : बात 1998 की है. झारखंड आंदोलन को चलते हुए काफी लंबा अरसा हो गया था. भारतीय जनता पार्टी ने अन्य दलों के सहयोग से केंद्र में सरकार बना ली थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने थे. उस समय बिहार से यशवंत सिन्हा, रीता वर्मा, बाबूलाल मरांडी, कड़िया मुंडा आदि केंद्रीय मंत्री बने. रामटहल चौधरी रांची के सांसद थे. झारखंड से जीते 12 सांसदों ने रामटहल चौधरी की अगुवाई में एक पत्र प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखा. अधिवक्ता प्रणव कुमार बब्बू बताते हैं कि इस पत्र का मजमून था कि जब आप (अटल बिहारी वाजपेयी) रांची आये थे, तो मोरहाबादी मैदान में अपने भाषण के दौरान कहा था कि केंद्र में अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है, तो वनांचल अलग राज्य देंगे.

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पत्र में लिखा गया कि अलग राज्य का बिल संसद में अगले सत्र में नहीं लाया जाता है तो हम सभी सांसद सामूहिक इस्तीफा दे देंगे. इस पत्र में सबसे पहले एक नंबर में कड़िया मुंडा ने हस्ताक्षर किया था. दो नंबर में रामटहल चौधरी, तीन नंबर में शैलेंद्र महतो एवं अन्य 10 वें, 11 वें और 12 वें लाइन में क्रमशः यशवंत सिन्हा, बाबूलाल मरांडी और रीता वर्मा ने हस्ताक्षर किये थे. प्रणव बब्बू ने बताया कि जब यह पत्र जब लिखा गया था तो वे भी वहां उपस्थित थे.

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अटल बिहारी वाजपेयी ने सभी सांसदों से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से बात की. उनका कहना था कि चूंकि अन्य दलों के समर्थन से सरकार बनी है. भारतीय जनता पार्टी ने अपने दम पर सरकार नहीं बनायी है इसलिए कुछ कठिनाइयां हैं बिल लाने में. बाद में रामटहल चौधरी और कड़िया मुंडा के नेतृत्व में कुछ सांसद प्रधानमंत्री के बुलावे पर उनके कार्यालय गये. जब अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि इस पत्र को वापस ले लीजिए. इस पर रामटहल चौधरी ने कहा कि यह पत्र मैंने लिखा है. माननीय अटल जी आप निर्णय लें.

रामटहल ने कहा- अगर अलग राज्य के बिल को आनेवाले सत्र में नहीं लाया गया तो हम लोग निश्चित रूप से सामूहिक इस्तीफा दे देंगे. मुझे याद है कि इस घटना के बाद अगले ही सत्र में वनांचल/झारखंड अलग राज्य सहित तीन राज्यों, छत्तीसगढ़ और उत्तरांचल के लिए बिल लोकसभा में पेश किया गया था. बाद में 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ. इस पूरे प्रकरण का मैं प्रत्यक्षदर्शी रहा. इस तरह से यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि झारखंड के गठन में तत्कालीन सांसद रामटहल चौधरी चौधरी एवं कड़िया मुंडा की अहम भूमिका रही.

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