
Ranchi: कहते हैं ‘जानकारी ही बचाव है’. यानी किसी बीमारी के इलाज से बेहतर है, उससे बचाव और बचाव के लिए जरुरी है जानकारी. सरकार भी मानती है कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करना जरुरी है. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग के करोड़ों के फंड में प्रचार- प्रसार सामग्री से संबंधित भी फंड होता है.लोगों को विभिन्न बीमारियों और उससे बचाव के प्रति जागरुक करने के लिए प्रचार-प्रसार सामग्री तैयार की जाती है. इसमें लाखों रुपए का खर्च आता है.
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लेकिन रांची के सिविल सर्जन कार्यालय में इसका कोई मोल नहीं. लाखों रुपए से तैयार ये प्रचार सामग्री सिविल सर्जन कार्यालय के निचले तल्ले में कबाड़ की तरह पड़े रहते हैं. इन प्रचार सामग्रियों का इस्तेमाल कितने कारगर रुप से होता है, कितने लोगों तक यह प्रचार पहुंच पाता हैं और कितने लोग इससे जागरुक होते हैं, इसकी रिपोर्ट रखने वाला कोई भी नहीं है.
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जाहिर है, इन सामानों को अगर सदर अस्पताल व अन्य अस्पतालों में रखवाया जाये तो कुछ लोगों तक यह जरुर पहुंच पायेगा. और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने की सरकार की मंशा भी कुछ हद तक जरुर सफल हो पायेगी. लेकिन इन सब से किसी का कोई सरोकार है. सरकारी पदों पर बैठे बाबूओं को ये सब देखने की फुरसत नहीं, कर्मचारियों को कोई भी मतलब नहीं और चिकित्सक भी सिर्फ मरीजों को दवा लिखकर अपनी ड्यूटी पूरी कर लेते है.
सिविल सर्जन कार्यालय में कबाड़ बनती प्रचार सामग्री

मातृत्व सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड, मां और शिशु को कब-कौन सा टीका लगना है, मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों से कैसे बचाव हो, इन सब से संबंधित बातों की जानकारी के लिए ब्रोसर, पंपलेट और पुस्तिका छपवाई जाती है. जिसकी छपाई में लाखों रुपए का खर्च आता है. जो कहीं न कहीं आम लोगों का ही पैसा होता है. जिस तरह से लोगों को जागरुक करने के लिए बने प्रचार सामग्री दिन-ब-दिन कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं, उससे ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी की सरकारी तंत्र को ना तो योजना के उद्देश्य से सरोकार है, ना ही लोगों के स्वास्थ्य से.
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चिकनगुनिया के 512 और डेंगू के 42 मरीजों की पुष्टि
अभी हाल के दिनों में ही चिकनगुनिया और डेंगू जैसी महामारी फैलने से लोगों में डर का माहौल है. यदि इन ब्रोसर का सही इस्तेमाल हुआ होता तो कुछ हद तक इस बीमारी पर अवश्य रोक लगती. चिकनगुनिया का अब तक 512 और डेंगू का 42 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है. इसके अलावा रोजाना लगभग 100 मरीज एवं गर्भवती महिला सदर समेत अन्य अस्पतालों में भर्ती होते है.
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क्या कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन वीबी प्रसाद ने बताया कि प्रचार सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है. ब्लॉक-ब्लॉक में भेजा जाता है. धीरे-धीरे भेजते है, कुछ भेजा गया है, जबकि कुछ भेजने बाकी हैं.




