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नक्शा पास करना था RMC को, पर भाजपा नेता अजय मारू ने अपने सिटी मॉल का नक्शा पास कराया आरआरडीए से

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Ranchi : हरमू नदी के तट पर मुक्तिधाम के पास जिस जमीन पर अभी सिटी मॉल बन रहा है, उस जमीन को हथियाने के लिए एक से बढ़कर एक खेल हुए हैं. सबसे चौंकानेवाली बात यह है कि जब आरआरडीए के पास रांची नगर निगम क्षेत्र के भवनों का नक्शा पास करने का पावर ही नहीं था, तो कैसे उसने हरमू मुक्तिधाम के पास बन रहे सिटी मॉल का नक्शा पास कर दिया. दरअसल, झारखंड सरकार की संकल्प संख्या 1948 के मुताबिक एक सितंबर 2009 से रांची नगर निगम के सभी वार्ड में भवन निर्माण से संबंधित नक्शा को स्वीकृति देने की शक्ति आरआरडीए से नगर निगम को हस्तांतरित कर दी गयी थी. इसके बावजूद भाजपा नेता और पूर्व सांसद अजय मारू ने अपने सिटी मॉल का नक्शा आरआरडीए से पास करा निगम से अनुमोदित करा लिया. सिटी मॉल का नक्शा आरआरडीए ने भवन प्लान वाद संख्या 1272/2009 को स्वीकृत और निष्पादित कर पास कर दिया. अजय मारू ने यह नक्शा आरआरडीए से 15 फरवरी 2011 को पास कराया. जबकि, उस वक्त नक्शा पास करने का अधिकार रांची नगर निगम को था.

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विधानसभा की उपसमिति भी खारिज कर चुकी है नक्शा

इस मामले में विधानसभा की उपसमिति भी नक्शा पास करने के लिए दिये गये जमीन संबंधी दस्तावेज को फर्जी करार दे चुकी है. अजय मारू ने अपने सिटी मॉल का नक्शा पास कराने के लिए दो भूखंडों की डीड 64 और 65 आरआरडीए में जमा की. इसी पर आरआरडीए ने नक्शा की स्वीकृति दी गयी है. इन दोनों भूखंडों की और एक-एक डीड (डीड 64 और 65 के अलावा) बनी है. इधर, इस मॉल से संबंधित रांची निबंधन कार्यालय में मौजूद रिकॉर्ड में वॉल्यूम 4 पृष्ठ संख्या क्रमशः 567 से 588 और 589 से 612 में उल्लेख है, जो पहले के डीड (डीड 64 और 65) से मेल नहीं खाता है. इस मामले का खुलासा विधानसभा उपसमिति को जिला अवर निबंधक राहुल चौबे द्वारा उक्त डीड की सच्ची प्रति सौंपने के बाद हुआ.

नक्शा पास करना था RMC को, पर भाजपा नेता अजय मारू ने अपने सिटी मॉल का नक्शा पास कराया आरआरडीए से

टीएसी की उपसमिति ने भी जाहिर की है चिंता

सिटी मॉल का नक्शा पास करने में भी कई गड़बड़ी का मामला समाने आया है. इसके अलावा झारखंड में कई आदिवासी जमीन के हस्तांतरण में गड़बड़ी की बातें सामने आ रही हैं. ऐसे में आदिवासियों की घटती जमीन और सिमटते आदिवासी की आबादी पर ट्राइबल एडवाइजरी कौंसिल (टीएसी) की उपसमिति ने भी चिंता जाहिर की है. रांची के हेहल अंचल में भी ऐसा खेल हो चुका है. वहां करीब 5.26 एकड़ आदिवासी जमीन फर्जी कागजात की मदद से गैरआदिवासी बनाकर जमीन माफिया ने बेच दी.

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क्या है पूरा मामला

सीएनटी एक्ट के दायरे में आनेवाली जमीन को उपायुक्त की स्वीकृति के बाद औद्योगिक प्रयोजन के लिए खरीदने के मामले की जांच विधानसभा की उपसमिति द्वारा किये जाने के बाद कई मामलों का खुलास होने लगा है. विधानसभा की यह उपसमिति (अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक, पिछड़ा, कमजोर वर्ग कल्याण समिति) भाजपा नेता व पूर्व सांसद द्वारा भुइहरी जमीन खरीदे जाने के मामले की जांच कर रही है. उपसमिति ने जमीन के सारे दस्तावेजों को उपलब्ध करने की मांग की है. वहीं, प्रेस के स्थान पर मॉल के लिए नक्शा स्वीकृत करने के सवाल पर उपसमिति ने रांची के नगर आयुक्त और और आरआरडीए के उपाध्यक्ष को तलब किया था. नगर आयुक्त और आरआरडीए के अपाध्यक्ष से पूछ गया किस आधार पर एक्सप्रेस रेसिडेंसी प्राइवेट लिमिटेड का नक्शा पास किया गया है.

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