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#Rims के डेंटल विभाग में इलाज प्राइवेट अस्पताल से भी ज्यादा महंगा

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Ranchi: रिम्स के डेंटल विभाग में कृत्रिम दांत लगाने की प्रक्रिया और मंहगी हो जायेगी. राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दांतों का ईलाज प्राइवेट अस्पताल से भी मंहगा हो गया है.

रिम्स में हालांकि सिर्फ दांत बनाने की कीमत प्राइवेट डेंटल क्लीनिक के मुकाबले कम है, पर प्रक्रिया और जांच अन्य प्राइवेट अस्पतालों से मंहगा हो गयी है.

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दांत बनवाने की कीमत रांची के प्राइवेट अस्पतालों में 150 से 300 रुपये के बीच है. और पूरी प्रक्रिया में 8 हजार से 10 हजार के आसपास खर्च हो जाता है.

रिम्स में ईलाज कराने आये मरीजों का कहना है कि हमें बाहर से ज्यादा खर्च यहीं ईलाज कराने में आ गया. रिम्स में भी करीब 10 हजार रुपये के आसपास खर्च हो रहा है.

इससे पहले अस्पताल में कृत्रिम दांत बनाने के लिए आउटसोर्सिंग कंपनी को हायर किया गया था. जो बाहर से बना कर देती थी. वही आउटसोर्सिंग कंपनी अब रिम्स में ही दांत बना कर दे रही है.

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दंत रोगों की नीति तैयार करने के लिए सर्वेक्षण करा रहा रिम्स

रिम्स दांत के रोगों से संबंधित नीति तैयार करेगा. नीति तैयार कराने के लिए रिम्स डेंटल कॉलेज के चिकित्सक राज्य के ग्रामीण क्षेत्र में जाकर मरीजों की जांच करेंगे. जांच के बाद बीमारी का आंकड़ा तैयार किया जायेगा.

दांत का इलाज कराने जब स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी रिम्स के डेंटल कॉलेज पहुंचे थे, उस दौरान डेंटल कॉलेज के प्राचार्य डॉ पंकज गोयल ने अपने प्रस्ताव में बताया कि राज्य में ओरल डिजीज के लिए कोई नीति नहीं है.

सर्वेक्षण और नीति बनाने में एक वर्ष का समय लगेगा. इसके बाद स्पष्ट नीति तैयार हो जायेगी. स्वास्थ्य मंत्री ने प्राचार्य डॉ गोयल के सुझाव की प्रशंसा की थी जिसके बाद इस संबंध में निर्देश जारी करने का आश्वासन दिया था, अब इसको लेकर सर्वेक्षण कराया जा रहा है.

पहले मरीजों को बुला कर उनकी दांत का मेजरमेंट लिया जायेगा. इसके बाद दांत को लैब में टेक्निशियन तैयार करेंगे. वहीं दिये हुए टाइम पर मरीजों को बुला कर उनका ट्रायल होगा.

इसके बाद फाइनल डेट पर दांत सेट कर दिया जायेगा. इसके अलावा दांतों का पूरा सेट भी लैब में ही तैयार किया जा सकेगा. ऐसे में लोगों को दांत बनाने के लिए भी जहां-तहां दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी.

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