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सरायकेला : स्कूल खुलने के पहले ही द‍िन भूखे लौटे बच्चे, इस्कॉन से आपूर्त‍ि वाले विद्यालयों को छोड़ किसी में नहीं मिला मध्याह्न भोजन

Raj kishor
Saraikela : कोरोना संक्रमण की वजह से लंबे इंतजार के बाद सोमवार को एक से लेकर आठवीं क्लास तक के बच्चों के स्कूल तो खुले, लेकिन स्कूल खुलने के पहले ही दिन बच्चों को मध्याह्न भोजन तक नसीब नहीं हुआ. यह हाल है सरायकेला-खारसावां जिले के उन सरकारी स्कूलों का जहां इस्कॉन की ओर से मध्याह्न भोजन की व्यवस्था नहीं की जाती है. वैसे स्कूलों के सभी बच्चों को स्कूल खुलने के पहले दिन आज भारी निराशा का हाथ लगी. उन्हें गर्मी की उमसभरी दोपहरी में भूखे पेट रहना पड़ा.

खासकर, जिले के गम्हरिया प्रखंड के सरकारी स्कूलों के बच्चों का हाल इस दौरान पूरी तरह से बेहाल रहा. पूरे प्रखंड के गैर इस्कॉन संचालित किसी भी स्कूल में बच्चों के लिए भोजन नहीं बनाया जा सका. ये वही स्कूल हैं जिनमें मध्याह्न भोजन का संचालन सरस्वती वाहिनी के अकाउंट से होता है. स्कूल से जुड़े लोगों की मानें तो सरकारी स्तर पर ही अकाउंट से सारे वापस करने का आदेश पहले ही जारी हो चुका था. उसकी जगह प्रखंड स्तर से स्कूलों को कुछ ऐसे आदेश जारी किये गये थे जो अव्यवहारिक ही नहीं, गैर जिम्मेदाराना भी है.
ये थे जारी निर्देश

  • मध्याह्न भोजन चलाने एवं राशि की निकासी के लिए कुकिंग कॉस्ट की राशि का भुगतान बीआरसी से होना है.
  • अंडा/फल की राशि सरस्वती वाहिनी माता समिति के खाते में जाएगी, उसी खाते से निकासी होगी.
  • कूकिंग कॉस्ट हेतु तीन भाउचर बीआरसी में जमा कराना सुनिश्चित करेंगे.
  • एक वाउचर गैस का होगा, जिसका भुगतान गैस दुकान को किया जाएगा.
  • दूसरा वाउचर सब्जी वाले के नाम होगा, जिसका भुगतान सब्जी वाले को किया जाएगा.
  • तीसरा वाउचर किराना दुकानदार का होगा, जिसका भुगतान किराना दुकानदार को होगा. तीनों वाउचर पर अध्यक्ष एवं संयोजिका का हस्ताक्षर एवं मुहर होगा.
  • किराना दुकानदार के वाउचर पर दुकानदार का हस्ताक्षर एवं मुहर होगा, जिसमें दुकानदार के पिता का नाम एवं आधार नंबर भी होगा.
  • तीनों वाउचर में अंकित कुल राशि का योग, पूरे माह में आच्छादित छात्रों को प्रति छात्र के दर से दी जाने वाली राशि के बराबर होगा.
  • वाउचर के साथ दैनिक व्यय पंजी एवं चावल वितरण पंजी लाना आवश्यक होगा.
    यह है परेशानी
    स्कूल से जुड़े लोगों का कहना है कि इन निर्देशों से परेशानी यह हुयी कि बगैर राशि के न तो गैसवाला, न तो राशनवाला और ना ही सब्जीवाला वाउचर देने को तैयार है, फिर वे इन सारे सामानों का इंतजाम करें भी तो कहां से करें. यही कारण बताया जा रहा है स्कूलों में मध्याह्न भोजन नहीं बनने और बच्चों के खाली पेट लौटने का. इतना ही नहीं, इन निर्देशों के तहत आगे कब तक व्यवस्था पटरी पर लौटेगी, यह भी बताने को कोई तैयार नहीं है.
    सरकारी नहीं, प्रखंड स्तर पर रही तैयारियों में कमी
    स्कूल से जुड़े लोगों का यह भी कहना है कि सरकार की ओर से स्कूल खुलने के साथ सभी व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर काफी समय दिया गया था. पिछली बार ही कोरोना के मामले कम होने पर स्कूल भी खोले गये थे, हालांकि फिर से कोरोना संक्रमण बढ़ने पर स्कूलों को बंद कर दिया गया था. बावजूद इसके प्रखंड स्तर पर स्कूलों में फिर से मध्याह्न भोजन की व्यवस्था सुचारु रुप से शुरू करने को लेकर कोई पुख्ता तैयारी नहीं की गयी, जिसका खामियाजा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है.

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