
Amit Jha
Ranchi : 24 घंटे भी नहीं बीते. पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने हेमंत सोरेन कैबिनेट से बुधवार को इस्तीफा दे दिया था. इस तरह से 12वां मंत्री का एक पद वेकेंट हो गया था.
अब इसके जवाब में हेमंत सोरेन ने विधायक रामदास सोरेन को आगे कर दिया है. उन्हें मंत्री बनाया जाएगा. 30 अगस्त को जहां चंपाई भाजपा में जाएंगे, वहीं रामदास हेमंत कैबिनेट में ‘इन’ करेंगे. ऐसे अभी यही कहा जा रहा था कि चूंकि अगले महीने डेढ महीने बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं. सो सरकार में मंत्री पद का एक बर्थ खाली रह जाएगा पर बदलती सियासत और सियासी समीकरण को देखते हेमंत सरकार ने कोल्हान से घाटशिला विधायक रामदास सोरेन को आगे किया है.
सबसे कम दिनों के लिए मंत्री बनेंगे रामदास
झारखंड की राजनीति में कई रोचक प्रसंग दिखते आए हैं. अब एक इतिहास यह जुड़ेगा कि रामदास सोरेन सबसे कम दिनों के लिए मंत्री बने. तकरीबन डेढ महीने के लिए ही सही. झारखंड मुक्ति मोर्चा के कद्दावर नेता चंपाई सोरेन के पार्टी छोड़ने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सोची समझी रणनीति के तहत रामदास सोरेन को मंत्री बनाने का फैसला लिया है. इसे डैमेज कंट्रोल की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. सोरेन के बदले सोरेन. लोहा से लोहे को काटने की तैयारी. हालांकि दोनों सोरेन में बड़ा फर्क है. रामदास सोरेन भी पार्टी के पुराने नेता हैं. पर चंपाई सोरेन के सामने उनका कद उतना भी मजबूत नहीं है. वह चुनाव हारते व जीतते रहे हैं. चंपाई की तरह लोकप्रियता नहीं है. चंपाई यदि कोल्हान टाइगर कहे जाते हैं तो इसके पीछे उनका लंबा संघर्ष दिखता है. पहाड़ों, जंगलों में रहकर जिस तरह उन्होंने झारखंड आंदोलन का नेतृत्व किया था, उसकी चर्चा होती रही है. संघर्ष की लंबी दास्तान है. ‘टाइगर’ की तरह लड़ने की वजह से ही उन्हें टाइगर की उपाधि दी गई. कोल्हान टाइगर के सामने रामदास सोरेन कितना टिक पाएंगे या प्रभावी होंगे, यह देखने वाली बात होगी. चुनाव परिणाम के बाद ही इसका पता चलेगा. यह भी पता लगेगा कि झामुमो की रणनीति कितनी कारगर रही. वैसे यह तय है कि आनेवाले समय में चंपाई सोरेन और रामदास सोरेन, दोनों कोल्हान की राजनीति की धूरी बनेंगे.
कोल्हान में चमकेगा कमल
चंपाई सोरेन के भाजपा में शामिल होने के बाद कोल्हान की राजनीति में बदलाव की उम्मीद की जा रही है. भाजपा को इससे फायदा होने की उम्मीद है. लोग यह कह रहे हैं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा छोड़कर जाने वाले कई नेताओं की दुर्गति हो गई और वह कहीं के नहीं रहे. यह बात कुछ हद तक सही है. लेकिन संथाल परगना और कोल्हान प्रमंडल की राजनीतिक स्थिति भी अलग-अलग है. कोल्हान की राजनीति में भाजपा झामुमो से कमजोर नहीं है. लगभग सभी सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है. पिछले चुनाव में भी कई सीटों पर कम वोटों से हार-जीत हुई थी. चंपाई सोरेन के आने के बाद यदि हर विधानसभा क्षेत्र में 5 से 10000 वोट का भी भाजपा को फायदा हुआ तो संभव है कि बाजी पलट जाए.
झारखंड मुक्ति मोर्चा छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले कई ऐसे नेता हैं, जिनको राजनीति में सफलता मिली. इनमें अर्जुन मुंडा, शैलेंद्र महतो, आभा महतो और विद्युत वरण महतो जैसे कई नाम हैं. विद्युत वरण महतो जमशेदपुर से तीसरी बार भाजपा के टिकट पर चुने गए. इसलिए यह कहना कि झामुमो छोड़ने के बाद दुर्गति हो जाती है ठीक नहीं है. चंपाई सोरेन के बारे में कहा जाता है कि वे जमीन से जुड़े नेता हैं. उन्होंने काफी सोच समझकर भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया होगा. इसलिए उनके बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. कोल्हान के चुनाव परिणाम से चंपाई सोरेन का राजनीतिक कद का आकलन होगा. कोल्हान में कमल और मजबूती से खिलेगा. वैसे हकीकत का पता विधानसभा चुनाव के रिजल्ट से ही लगेगा.



