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महेश पोद्दार के सवाल पर वित्त राज्यमंत्री ने कहा- एमएसएमई को बैंकों से ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया हुई सरल और सुलभ

Ranchi: भारत सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बैंकों द्वारा ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया है. एमएसएमई के प्रति सरकार के सकारात्मक रुख की वजह से सार्वजनिक बैंकों द्वारा छोटे उद्यमों को दिये जानेवाले ऋण की राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न का उत्तर देते हुए वित्त राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने यह जानकारी दी.

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ऋण में लगातार हो रही बढ़ोतरी

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकड़ों के अनुसार, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा दिया गया बकाया ऋण मार्च 2016 में 8,20,548 करोड़ रुपये था जो बढ़ कर मार्च 2019 में 8,81,170.98 करोड़ रुपये हो गया है. स्पष्ट है कि एमएसएमई को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा दिये जानेवाले ऋण में लगातार वृद्धि हो रही है.

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नियमों को किया गया सरल

श्री ठाकुर ने कहा कि सरकार और आरबीआइ ने एमएसएमई की ऋण तक पहुंच सुलभ कराने के लिए कई कदम उठाये हैं. सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) के ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 20% की वृद्धि करने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा सूक्ष्म उद्यम खातों के लिए एमएसई अग्रिमों का 60% आवंटित करना निश्चित किया गया है. सूक्ष्म उद्यम खातों की संख्या में 10% की वार्षिक वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है. मांग में अप्रत्याशित/मौसमी वृद्धि के कारण उत्पन्न होने वाली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी सीमा निर्धारित की गयी है. प्रत्येक जिले में कम से कम एक विशेषीकृत एमएसएमई शाखा का परिचालन किया जा रहा है. एमएसई इकाइयों की उधार सीमा को 5 करोड़ रु. करने के लिए इसकी कार्यशील पूंजी को इसके अनुमानित वार्षिक टर्नओवर का न्यूनतम 20% बनाने के लिए संगणना को सरल बनाया गया है. एमएसएमई को विलंब से भुगतान मिलने की समस्या के समाधान के लिए ट्रेड रिसीवेबल डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) की स्थापना की गयी है.

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इसके अतिरिक्त, सरकार ने 2 नवम्बर, 2018 को एमएसएमई के लिए सहायता और संपर्क कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इस कार्यक्रम में, अन्य बातों के साथ-साथ, एमएसएमई के psbloansin59minutes पोर्टल के माध्यम से ऋण तक पहुंच, बाजार तक पहुंच, प्रौद्योगिकी उन्नयन, कारोबार करने की सुगमता, एमएसएमई क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा इत्यादि जैसे नवोन्मेष शामिल थे.

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