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7 मार्च को विधानसभा घेराव में लगी आजसू पार्टी के 10 हजार सदस्यों को नोटिस, पार्टी ने जतायी नाराजगी

Ranchi: 7 मार्च,सोमवार को आजसू पार्टी ने विधानसभा घेराव का कार्यक्रम तय कर रखा है. इससे पहले अलग अलग जिलों में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को स्थानीय प्रशासन की ओर से 50 हजार के बॉण्ड और दो-दो बेलर के साथ एसडीओ कोर्ट में 7 मार्च को हाजिर होने को कहा गया है. ऐसा नहीं किये जाने पर धारा 107 और अन्य धाराएं लगाए जाने की बात कही गयी है. आजसू पार्टी ने इस पर ऐतराज जताया है. पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता डॉ देव शरण भगत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ऐसी अराजकता तो झारखंड आंदोलन के दौरान भी देखने को नहीं मिली थी. लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का हक है. पर राज्य सरकार राजशाही दिखाते हुए झारखंडी अस्मिता के सवाल पर आजसू पार्टी को रोकने पर लगी है. चाहे जो हो जाये, पार्टी कल विधानसभा घेराव कार्यक्रम के लिये सड़कों पर जरूर उतरेगी.

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जेल लाठी का भय नहीं

देव शरण भगत ने कहा कि आजसू पार्टी का झारखंड आंदोलन में शानदार इतिहास रहा है. यह संघर्षों से उपजी पार्टी रही है. ऐसे में प्रशासन का नोटिस, लाठी, जेल जैसी धमकियों से पार्टी नहीं डरने वाली. झारखंडी विरासत, अस्मिता, संस्कृति और इस राज्य के हित से जुड़े सवालों को लेकर पार्टी विधानसभा घेराव के लिये तैयार है. इससे पहले पार्टी की ओऱ से राज्य के सभी जनप्रतिनिधियों, सांसदों से इन मसलों पर उनकी राय पूछी गयी थी. अब पार्टी शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा तक अपनी बात पहुंचाना चाहती है. पर हेमंत सरकार कांग्रेसियों के रंग में रंग गयी है. अलग राज्य आंदोलन के क्रम में कांग्रेस राजद जैसी पार्टियों ने बड़ा नुकसान पहुंचाया. अब उनकी ही संगत में रहते हेमंत का चरित्र भी बदल गया है. उन्हें मालूम होना चाहिये कि लोकतंत्र में तानाशाही की कोई जगह नहीं. सत्ता स्थिर नहीं रहती. ऐसे में आजसू पार्टी के कार्यकर्ताओं, नेताओं को धमकी दिया जाना सही नहीं.

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