
Ranchi: स्थापना दिवस के दिन पारा शिक्षकों और पत्रकारों पर लाठीचार्ज के बाद अब विपक्ष और सत्ताधारी पार्टी की तरफ से बयानों का दौर जारी है. जेल गए पारा शिक्षक के परिजन अपने लोकल विधायक से मदद की गुहार और चुनाव में वोट देने की बात याद दिला रहे हैं, तो मीडिया सत्ताधारी पार्टी से पूरे मामले पर उनकी प्रतिक्रिया लेने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है.
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सबसे ज्यादा परेशानी विधायकों को हो रही है. अपने क्षेत्र में जेल गए पारा शिक्षकों के परिजन विधायकों से उनकी रिहाई की जिद कर रहे हैं, तो वहीं विधायक इस मामले पर अपने-आप को बेसहारा बता रहे हैं और कह रहे हैं कि वो कुछ नहीं कर सकते. ऐसा ही एक मामला बगोदर विधानसभा क्षेत्र से आया है. बगोदर से बीजेपी विधायक नगेंद्र महतो से एक पारा शिक्षक के परिजन ने अपने भाई (जो एक पारा शिक्षक हैं) को जेल से आजाद करने की गुहार लगायी. बेचारे विधायक उन्हें आश्वासन तक नहीं दे पाए कि वो कुछ कर सकते हैं. इतना ही नहीं उन्होंने मामले पर जो कुछ भी कहा वो काफी चौंकाने वाला है.
बड़ी पार्टी है, ऊपर से थोंप दिए जाते हैं मुख्यमंत्रीः विधायक
बगोदर के एक पारा शिक्षक के परिजन ने अपने भाई की जेल की रिहाई के लिए वहां के बीजेपी विधायक को फोन किया. फोन पर उसने अपने भाई की रिहाई की गुहार लगायी.
परिजनः मेरा पारा शिक्षक भाई जेल में क्या होगा उसका सर
विधायकः वो तो अब जो होगा वो प्रक्रिया में ना होगा, वो लोग ना करेगा. हमलोगों को कोई पावर नहीं ना है. कोई जेल चल जाता है, उसको का करे हमलोग बाहर रहता तो कुछ करते. अब तो सरकारे कुछ कर सकती है. सरकार को भी हम बोले हैं, परसो-नरसो हम फोन किए थे कि यार इस तरह का दमनकारी नहीं होना चाहिए. कोई रास्ता अपनाना चाहिए. वार्ता करना चाहिए. आपलोग ऐसा-ऐसा करते हैं. हमही लोग के ऊपर फायर हो जाता है. कहता है आपलोग नहीं जानते हैं.
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परिजनः क्या करें, सर यहां का दूसरा पार्टी बोलता है कि उस समय तुमलोग बहुत उछल-उछल कर वोट दिया और अभी बात करो…
विधायकः इस बात से उसका क्या मसला है. हमलोग का जो पावर था, वो तो हम किए ना. महेंद्र सिंह और विनोद सिंह ने क्या कर दिया. आज तक वो लोग कुछ किया है क्या. ये लोग तो सिर्फ लड़ाई ही किया, कुछ काम किया क्या आज तक.
परिजनः हमलोग तो आपको वोट दिए ना…
विधायकः विकास का जितना हमलोग काम किए वो विधायक का बाप महेंद्र सिंह नहीं किया होगा.
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परिजनः लेकिन अभी तो सब वही बोल रहा है ना सर…
विधायकः ऊ अलग मैटर है. ई अलग मैटर है. लड़ाई-झगड़ा सब विभाग में होता है इसका मतलब क्या विधायक थोड़े दोषी होता है. ये विधायक का काम थोड़े है. विधायक का पावर थोड़े है.
परिजनः ई तो आपलोग कुछ बोलिएगा तबे ना कुछ होगा सर…
विधायकः अरे आपलोग पढ़े लिखे आदमी जैसा बात कीजिए. हमलोगों को पावर नहीं है. हमलोग बस आवाज को यहां से वहां भेज देते हैं. यही करते हैं.
परिजनः हां सर…तो रघुवर दास को मुख्यमंत्री तो आप ही लोग ना बनाए सर…आप लोग का बात कैसे नहीं मानेगा…
विधायकः अरे भाई हम नहीं बनाते हैं मुख्यमंत्री, यह बड़ी पार्टी है इसलिए ऊपर से थोंप दिया जाता है. अभी जो मंडल अध्यक्ष बना है वो हमलोगों को बनाने का पावर नहीं है. आप सुनिए अभी जो मंडल अध्यक्ष बना है बगोदर में वो भी ऊपरे से बना है. विधायक को कहां पूछता है कोई…य़े दुखड़ा हम किसको सुनाए…अब आपको सुनाएंगे तो आप कहिएगा कि……
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स्थापना दिवस की घटना प्रशासनिक चूक हैः रविंद्र राय
(वीडियो साभार- ईनाडु, झारखंड)
कोडरमा से सांसद रविंद्र राय ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि 15 नवंबर को स्थापना दिवस के दिन जो कुछ भी हुआ, वो रांची प्रशासन की चूक है. कहा उस दिन जो हुआ वो कहीं से भी उचित नहीं था. पारा शिक्षकों के नाम पर कुछ असमाजिक तत्वों ने उपद्रव किया. इसमें कहीं ना कहीं से प्रशासन विफल हुआ. प्रशासनिक चूक के कारण जो घटनाएं हुईं हैं और उसके प्रतिक्रिया स्वरूप जिस प्रकार मामला उलछता जा रहा है, वो ना ही हमारे पारा शिक्षक बंधुओं के लिए अच्छा है ना ही सरकार के लिए अच्छा है.




