
Lohardaga: जिले के साके गांव में आरडीएफ योजना में काम करने वाले मजदूरों को काम करवाने के बाद वन विभाग ने पासे नहीं दिया. अब काम करने वाले मजदूरों को अपनी ही मजदूरी मांगने के लिये दौड़ लगाना पड़ रहा है. योजना में काम करने वाले डेढ़ दर्जन से ज्यादा मजदूरों का पैसा बकाया है. लगभग हर मजदूर का 5000 रुपया वन विभाग ने भुगतान नहीं किया है. मजदूर जब विभाग में जाकर पूछते हैं तो उन्हें कहा जाता है कि आप बैंक जाइए. दूसरी ओर जब मजदूर बैंक जाते हैं तो उन्हें वहां पर निराश होकर लौटना पड़ता है.
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वहीं अब तो विभाग ने यह तक कहना शुरू कर दिया है कि मजदूरों का कोई पैसा ही बकाया नहीं है. योजना में काम करने वाले मजदूर अब परेशान होकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगा रहे हैं. मजदूर विश्वनाथ भगत और सुखराम उरांव का कहना है कि विभाग ने काम कराने के बाद उन्हें पैसा ही नहीं दिया. इसके अलावा योजना में कई गड़बड़ियां हैं. यदि पूरे मामले की जांच की जाये तो बड़ी गड़बड़ी सामने निकलकर आयेगी. इधर इस मामले में वन विभाग के रेंजर राजेंद्र राम का कहना है कि कुछ गड़बड़ी तो थी, कुछ बकाया भी था और उन्होंने कुछ भुगतान भी कराया है. जबकि शेष मामले की जांच कराएंगे कि इसमें गड़बड़ी कहां पर है. बहरहाल, मजदूर अपने पैसे को लेकर परेशान हो रहे हैं. उनकी कोई भी नहीं सुन रहा.
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क्या कर रहे हैं मजदूर
जिन मजदूरों का पैसा बकाया है, उनका कहना है कि जून में पैसा बंद होने से खेती भी तहस-नहस हो गया. पर्व के वक्त पैसे देने की बात थी. लेकिन जब उसके बाद पूछा तो कहा गया कि सारा पैसा क्लियर कर दिया गया है. काफी दौड़ने के बावजूद पैसा नहीं मिल रहा है. बैंक जाने पर वहां से भी भगा दिया जाता है. इसलिये अब कोर्ट जाने का मन बना लिया है और यहां जो घोटाला किया गया है , उसे कोर्ट में सामने लायेंगे. क्योंकि हमलोग निर्दोष हैं.
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साथ ही मजदूरों का कहना है कि वन विभाग के वन रोपन में काम तो किये , लेकिन पैसा नहीं मिला. हर जगह दौड़कर अब हार गये हैं. अधिकारी कहते हैं कि पैसा चला गया है और बैंक जाने पर वहां कहा जाता है कि खाता में पैसा आयेगा तब को चढ़ायेंगे.




