
♦प्राचीन व पुरातात्विक अवषेशों का गढ़ बना चुका है हुसैनाबाद-कबरा कलां
Palamu : पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड के टोंगरा गांव में स्थित प्राचीन गढ़ के समतलीकरण के दौरान एक विचित्र धातु का टुकड़ा मिला. धातु का टुकड़ा देखने में छोटा, लेकिन काफी भारी है. मौके पर पहुंच कर उस टुकड़े को हुसैनाबाद पुलिस ने अपने कब्जे में कर लिया है.
सोन घाटी पुरातत्व परिषद के अध्यक्ष अंगद किशोर ने बताया कि यह टुकड़ा सीसा धातु या रांगा हो सकता है. प्राचीन काल में इसका प्रयोग अन्य धातु के साथ मिला कर किया जाता था. संस्था के सह सचिव रंजीत कुमार ने बताया कि यह टुकड़ा अत्यंत मुलायम है. इसका वजन 8.670 किलोग्राम है.
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पहले भी मिले हैं मौर्यकालीन सभ्यता के प्रमाण

सोन घाटी पुरातत्व परिषद के सचिव तापस डे ने इस टुकड़े को हुसैनाबाद स्थित नवनिर्मित म्यूजियम में रखने की मांग की है. उन्होंने बताया कि हुसैनाबाद अनुमंडल के कबरा कलां में मौर्यकालीन सभ्यता के काफी प्रमाण मिले हैं. यह इलाका लगातार इसे लेकर सुर्खियों में रहा है.
सोन घाटी पुरातत्व परिषद के अध्यक्ष अंगद किशोर ने बताया कि कबरा कलां गांव में नवपाषाण काल से लेकर लगातार ब्रिटिश काल तक के पुरातात्विक अवषेश मिलते रहे हैं. इसके अलावा भी हुसैनाबाद के विभिन्न गांवों में बरसात के दिनों में प्राचीन सभ्यता से जुड़े अवषेश खेतों में हल चलाने व मकान आदि की खुदाई में मिल जाते हैं. मगर कबरा कलां में कुछ स्थानों को छोड़ अबतक किसी गांव में खुदाई का कार्य नहीं किया गया है.
आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, रांची ने किया है उत्खनन
विगत वर्ष 2018 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, रांची के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ हरिओम शरण एवं सहायक पुरातत्वविद डॉ पूनम बिंद के नेतृत्व में कबरा कलां गांव में छह स्थानों पर खुदाई की गयी. गांव के सर्वाधिक ऊंचे स्थान पर की गयी खुदाई में लगभग बीस फीट नीचे पक्की मिट्टी के 23 घड़े के साथ-साथ मृद्भांड के बेशुमार टुकड़े मिले. चार उत्खनित गड्ढों में टेराकोटा के रिंग वेल मिले. दो गड्ढों में पक्की ईंटों की दीवारें मिलीं. पुरातत्वविदों ने औऱ क्या क्या सामान मिले हैं इसका खुलासा अभी नहीं किया है. पुरावशेष कार्बन डेटिंग के लिए प्रयोगशाला में भेजे गये हैं.
प्राचीनतम सभ्यता की अद्भुत मिसाल है कबरा कलां
विगत दो दशकों से समृद्ध पुरातात्विक अवशेषों को लेकर मीडिया में चर्चा में रहा गांव कबरा कलां झारखंड की प्राचीनतम सभ्यता की एक अद्भुत मिसाल है. उल्लेखनीय है कि कबरा कलां गांव में नवपाषाण काल से लेकर लगातार ब्रिटिश काल तक के पुरातात्विक अवशेष मिलते रहे हैं. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, रांची द्वारा की गयी पुरातात्विक खुदाई में अबतक मौर्य काल के काफी अवशेष मिले हैं. पुरातत्वविदों का मानना है कि जबतक कि अंतिम स्तर तक खुदाई नहीं होती, तबतक सही निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.
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गंगा की सहायक सोन नदी के किनारे है कबरा कला
गंगा की सहायक और गोंडवाना लैंड की महत्वपूर्ण नदी सोन और पलामू की जीवन रेखा कही जानेवाली नदी उत्तर कोयल के संगम पर कबरा कलां गांव अवस्थित है. यह पलामू जिले के उत्तरी भाग में हुसैनाबाद अनुमंडल के हैदरनगर प्रखंड क्षेत्र में स्थित है. हैदरनगर रेलवे स्टेशन से यह गांव दस किलोमीटर पश्चिम, चर्चित दशीशानाथ धाम से दो किलोमीटर पूरब तथा बिहार के इतिहास प्रसिद्ध रोहतास किला से लगभग बीस किलोमीटर दक्षिण पूर्व पर स्थित है. प्राचीन काल में आवागमन की दृष्टि से कबरा कलां एक ऐसा जंक्शन है जहां से बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं उत्तर प्रदेश की ओर जाना सुलभ था.
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