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औद्योगिक क्षेत्रों में 16-22 घंटे बिजली देने के दावे पर चैंबर ने कहा- गलत आंकड़े दे रहे अधिकारी, वास्तविक स्थिति बताये जेबीवीएनएल

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  • सरकार प्रोफेसनल हाथों में सौंप दें बिजली वितरण
  • उद्योगों में साल 2016-17 में बिजली खपत 30.5 प्रतिशत थी, जो 2018-19 में 25 प्रतिशत हो गयी
  • चैंबर और जेसिया ने संयुक्त प्रेस वार्ता

Ranchi: औद्योगिक संगठनों और सरकार के बीच संवादहीनता के कारण राज्य भर में बिजली की विकट समस्या उत्पन्न हुई है. पिछले दिनों में अखबार के माध्यम से एक वरीय अधिकारी ने जानकारी दी कि औद्योगिक क्षेत्रों में 16-22 घंटे तक बिजली दी जा रही है. जो बिलकुल गलत है. बिजली की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है. उक्त बातें फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष दीपक मारू ने कहीं. वे चैंबर और जेसिया की ओर से शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि सिर्फ बिजली दे देना ही काफी नहीं है, इसके लिए सही वोल्टेज भी होना जरूरी है. जिस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. बिजली की समस्या सिर्फ औद्योगिक क्षेत्रों में ही नहीं है बल्कि चैंबर को जानकारी हुई कि गांवों की स्थिति भी बिजली काफी खराब है. प्रेस वार्ता का आयोजन चैंबर भवन में किया गया था.

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प्रोफेशनल हाथों में दें बिजली व्यवस्था

उन्होंने कहा कि चैंबर शुरू से ये मांग कर रहा है कि बिजली को प्रोफेशनल हाथों में दिया जाये. उन्होंने कहा कि बड़े शहरों से शुरू करते हुए डिस्ट्रीब्युशन बिजनेस को प्रोफेशनल्स के हाथों में दिया जाये. साथ ही जेबीवीएनएल की जवाबदेही तय की जाये. जेबीएनएल में व्याप्त अनियमितता है. जबकि इस संबध में कई बार सीएम, ऊर्जा सचिव आदि को भी जानकारी दी गयी है. इसके बावजूद सरकार कोई पहल नहीं कर रही. जबकि सूबे के मुख्यमंत्री खुद ऊर्जा मंत्री भी हैं. ऐसे में जेबीवीएनएल के क्रियाकलापों की जांच के साथ उसकी जवाबदेही तय करे सरकार. पूर्व की भाजपा सरकार ने बिजली वितरण का काम प्रोफेशनल के हाथों में दिया था. लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार ने इस कंपनी को कोर्ट में फंसा कर रख दिया है. जिसका नतीजा बिजली संकट है.

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अर्द्धसत्य पेश न करें, उद्योगों की स्थिति हो रही खराब

जेसिया अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने कहा कि अधिकारी के हवाले से छपी खबर अर्द्धसत्य है. अगर सिर्फ आज की बात की जाये तो सुबह 10-12 बजे तक मेसरा में बिजली नहीं थी. वहीं फिर से दोपहर दो बजे से बिजली काट दी गयी. ऐसे में घंटों बिजली देने का दावा कैसे कर सकते हैं अधिकारी. आज बिजली की स्थिति ऐसी है कि उत्पादों की गुणवत्ता खराब हो रही है. ऑनलाइन ऑर्डर जो मिलते थे, वो नहीं मिल रहे. सिर्फ उद्योगों को आर्थिक नुकसान की बात नहीं है.

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उद्योगों में बिजली के उपभोग पर आयी कमी

जेसिया सचिव अंजय पचेरीवाल ने कहा कि साल 2016-17 की बात की जाये तो उद्योगों में बिजली की खपत 30.5 प्रतिशत थी. जबकि 2018-19 की बात की जाये तो यह मात्र 25 प्रतिशत रह गयी. ऐसे में स्पष्ट है कि राज्य में बिजली वितरण में उद्योगों की उपभोगिता में कमी आयी है. वहीं मोमेंटम झारखंड के बाद से एक भी कंपनी ने राज्य में उद्योग स्थापित नहीं किया. क्योंकि उद्योग स्थापित करने से पहले कंपनियां उस क्षेत्र और राज्य की वास्तविक स्थिति का जायजा लेती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे में झारखंड उद्योगों के मामले में काफी पिछड़ जायेगा. जबकि पिछले कुछ सालों में उद्योगों की बिजली उपयोगिता में कमी का मुख्य कारण उद्योगों का खत्म होना भी है.

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चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी में

इस दौरान संयुक्त रूप से कहा गया कि बिजली की समस्या सिर्फ उद्योगों के लिए नहीं बल्कि गांवों में भी है. ऐसे में जनआंदोलन के रूप में इसे उभारा जायेगा. सरकार को गर्मी से पूर्व तैयारी करनी चाहिए क्योंकि हर साल गर्मी में बिजली की उपयोगिता शुरू हो जाती है. ऐसे में संभवत 26 मई को चैंबर और जेसिया की ओर से गुमला सब स्टेशन में तालाबंदी की जाएगी. जिसके बाद अन्य जिलों में भी आंदोलन की रूप रेखा तैयार की जाएगी.

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