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बिजली वितरण की लचर व्यवस्था: पिछले चार साल बंद हो गये 6000 छोटे और मध्यम उद्योग

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  • पिछले चार साल में 355 लाख लीटर डीजल की खपत, साल दर साल बिजली सप्लाई में आयी गिरावट
  • ऑल इंडिया ऑटोमोबाइल पार्ट्स मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह वाणिज्यकर उपसमिति के पूर्व चेयरमैन का दावा
  • झारखंड को ऑटोमोबाइल सेक्टर से हर महीने 333 करोड़ रुपये जीएसटी का भी नुकसान, फिर भी नहीं सुधर पा रहा पावर सप्लाई का सिस्टम

Ranchi: बिजली वितरण निगम की लचर व्यवस्था के कारण झारखंड के उद्योगों को जबरदस्त झटका लगा है. स्थिति यह है कि झारखंड में बिजली की डांवाडोल स्थिति के कारण 6000 (आदित्यपुर सहित प्रदेश के अन्य जिले भी शामिल) छोटे और मध्यम उद्योग बंद हो गये हैं. धनबाद में ऑटोमोबाइल सेक्टर की बड़ी और नामी गिरामी फैक्ट्री हिन्दुस्तान मैनेबल ऑटोमोबाइल लिमिटेड पिछले साल बंद हो गयी. ऑल इंडिया ऑटोमोबाइल पार्ट्स मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह वाणिज्य कर उपसमिति के चेयरमैन आरडी सिंह ने बताया कि पिछले चार साल में बिजली की कमी के कारण 6000 छोटे-बड़े उद्योग बंद हो गये. वर्तमान में 7000 लघु उद्योग, 45 बड़े उद्योग और 300 मध्यम उद्योग हैं.

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बिजली नहीं होने के कारण हर महीने 333 करोड़ का नुकसान

झारखंड में उद्योगों को बिजली नहीं मिलने के कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर से मिलनेवाले जीएसटी(गुड्स एंड सर्विस टैक्स) का नुकसान हो रहा है. हर महीने सरकार को 333 करोड़ रुपये जीएसटी नहीं मिल पा रहा है. इस कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर से सालाना 4000 करोड़ रुपये मिलनेवाले जीएसटी का नुकसान हो रहा है. जबकि वितरण निगम का तर्क है कि 60 फीसदी बिजली उद्योगों को और 40 फीसदी बिजली घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाती है.

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पिछले चार साल में डीजल की खपत हुई 355 लाख लीटर

पिछले चार साल में उद्योगों को बिजली कम मिलने के कारण 355 लाख लीटर डीजल की खपत हुई. वर्ष 2015 में लगभग 6.90 लाख लीटर प्रति माह की खपत हुई. इस हिसाब से सालभर में 82.80 लाख लीटर की खपत हुई. वर्ष 2016 में 7.00 लाख लीटर की खपत हुई. मतलब सालभर में 84 लाख लीटर डीजल की खपत हुई. 2017 में महीने में 7.75 लाख लीटर और 2018 में हर महीने में लगभग आठ लाख लीटर डीजल की खपत हुई.

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खुद वितरण निगम के आंकड़े बयां कर रहे हालात

खुद वितरण निगम के आंकड़े उद्योगों के बंद होने के हालात को बयां कर रहे हैं, पिछले तीन वित्तीय वर्ष में उद्योगों को लगातार कम बिजली दी गयी. जिसके कारण झारखंड से उद्योगों का पलायन हो गया. वितरण निगम के आंकड़े खुद बता रहे हैं कि उद्योगों को साल दर साल बिजली की कमी की गई. वित्तीय वर्ष 2016-17 में उद्योगों को 30.5 फीसदी बिजली दी गई. वित्तीय वर्ष 2017-18 में उद्योगों को 27.8 फीसदी बिजली दी गई. वहीं 2018-18 में उद्योगों को सिर्फ 25 फीसदी ही बिजली दी गई. यह बिजली देने की गिरावट का आंकड़ा वितरण निगम का ही है. जबकि 60 फीसदी बिजली उद्योग और  40 फीसदी बिजली घरेलू उपभोक्ताओं को देने का दावा वितरण निगम करता रहा है.

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जानिये बिजली वितरण निगम के आंकड़े, कैसे उद्योगों को किया गया ध्वस्त

वित्तीय वर्ष 2016-17: कुल लोड 8721 मिलियन यूनिट: इसमें उद्योग को दिया गया: 2664 मिलियन यूनिट: कुल 30.5 फीसदी उद्योगों को बिजली दी गई.

वित्तीय वर्ष 2017-19: कुल लोड 9222.77 मिलियन यूनिट: इसमें उद्योगों को 2561.72 मिलियन यूनिट बिजली दी गई. कुल उद्योगों को 27.8 फीसदी बिजली मिली.

वित्तीय वर्ष 2018-19: कुल लोड 10106.36 मिलियन यूनिट: इसमें उद्योगों को 2606 मिलियन यूनिट बिजली दी गई. कुल 25 फीसदी बिजली उद्योगों को मिली.

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क्या कहते हैं ऑल इंडिया ऑटोमोबाइल पार्ट्स मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष

ऑल इंडिया ऑटोमोबाइल पार्ट्स मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरडी सिंह के अनुसार बिजली की सप्लाई नहीं होने के कारण लघु और मध्यम श्रेणी के 6000 उद्योग बंद हो गये. अब भी धनबाद- बोकारो में कई उद्योग बंदी के कगार पर हैं. उद्योग बंद होन से सरकार को जीएसटी का नुकसान हो रहा है. उद्योगों को औसतन आठ घंटे ही बिजली दी जा रही है. जबकि अधिकांश उद्योग 24 घंटे चलते हैं जिन पर तीनों शिफ्ट में काम होता है.

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क्या कहते हैं जेसिया के सचिव

झारखंड स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज के सचिव अंजय पचेरीवाल ने कहा कि बिजली आपूर्ति में कमी के कारण उद्योग बंद हो रहे हैं. हर साल वितरण निगम उद्योगों को बिजली देने में कमी कर रहा है. वित्तीय वर्ष 2018-19 में  उद्योगों को सिर्फ 25 फीसदी ही बिजली की आपूर्ति की.

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