
Pravin kumar
Simdega : लोकसभा चुनाव का आखिरी चरण 19 मई को है. 23 मई को देश की कमान किस पार्टी के हाथ में होगी ये भी सपष्ट हो जायेगा. लेकिन गरीबों की हालत और दशा बदलने वाली सरकारी योजना अब भी गरीबों के लिए दूर की कौड़ी बनी हुई है.
संतोषी की भूख से मौत की खबर आपको अब भी याद होगी. कथित रुप से संतोषी की भूख से मौत 19 माह पहले हुआ था. 14 वर्षीय संतोषी ने – देनी आयो भात, देनी आयो भात कहते हुए भूख से तड़पकर दम तोड़ दिया. घर में खाने का एक दाना नहीं था.
सिमडेगा जिला के जलडेगा प्रखंड स्थित करीमाटी गांव में संतोषी रहती थी. भले ही संतोषी की मौत की घटना देश दुनिया में मीडिया के लिए सुर्खियां बनीं. लेकिन आज भी परिवार को आवास और रोजगार के साधन सरकार उपलब्ध नहीं करा सका है.
संतोषी की छोटी बहन 8 वर्षीय चान्दो कुमारी स्कूल नहीं जा पाती, क्योंकि मां कोईली देवी मजदूरी के लिए दूर जाती है तो ऐसे में चान्दो को घर में रहकर छोटे भाई की देखभाल करनी होती है.
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कोईली देवी की दशा में कोई बदलाव नहीं

संतोषी की मौत के बाद परिवार को कईयों की ओर से मदद की बात सामने आयी थी. लेकिन कोइली देवी का 19 माह बाद भी मनरेगा से निर्माणाधीन बकरी शेड प्रशासन नहीं बना सका. संतोषी की भूख से मौत और राज्य में हुई अन्य भूख से मौत के मामले को राज्य सरकार खारिज करता रहा है. संतोषी की मौत की वजह भी जिला प्रशासन ने मलेरिया बताया था, जबकि मौत से पूर्व जिस एएनएम ने उसकी जांच की थी. उसने संतोषी को किसी भी तरह की बीमांरी होने से इनकार किया था. फिर उस दौरान एएनएम को सस्पेंड भी कर दिया गया था.
संतोषी की मौत के बाद कोईली देवी के नाम से वित्तीय वर्ष 2017-18 में एक बकरी शेड की स्वीकृति की गयी थी. जिसकी प्रक्कलित राशि 60 हजार है. जिसमें अब तक मजदूरी 8736 रूपये तथा सामग्री मद में 29,122 रूपये खर्च की गई है. लेकिन वह बकरी सेड आधा अधूर ही बन सका और विगत एक वर्ष से उसका काम भी ठप्प पड़ा है.
इस योजना में पिछले वर्ष अप्रैल में काम कराया गया था. लेकिन काम बंद होने से कई तरह की आशंका समाने जाती है. कोइली देवी को पूर्व में मिले इन्दिरा आवास जो आज तक बन नहीं सका उसी तरह कहीं यह बकरी शेड भी बिचैलियावाद की भेंट ना चढ़ जाए. गौरतलब है कि बकरी शेड से सटा हुआ ही कोईली देवी का इंदिरा आवास है. जो अब तक अधूरा है और वो रहने लायक भी नहीं है.
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कैसे चलती है कोईली देवी की अजीविका
संतोषी की मौत के बात कोईली देवी का राशन कार्ड बन गया है, उसे नियमित 35 किलो राशन मिल रहा है. लेकिन 35 किलो अनाज से परिवार का गुजारा नहीं हो सकता. कोईली के घर में दिनभर ताला लटका रहता है, वह अपने गांव से दूर लचड़ागढ़ में मजदूरी करने सुबह ही निकल जाती है. वह नियमित मेहनत मजदूरी करती है. उसे एक दिन में 160 रूपये मजदूरी मिलती है. कभी-कभी ढलाई का काम मिल जाता है तो उसे काम में देर होने से उसे लचड़ागढ़ में ही रूकना पड़ जाता है.
कोईली के पास मनरेगा रोजगार कार्ड भी मौजूद है. लेकिन उसे मनरेगा में मजदूरी नहीं मिल रही है. क्योंकि ग्राम पंचायत ने उसे नरेगा में मजदूरी देने की कभी पहल नहीं की. इसके अलावा जो वजह सामने आयी उसके मुताबिक अन्य श्रमिक कोईली को गांव की बदनामी करवाने वाली महिला मानते हैं. साथ ही वे सभी कोईली के साथ काम भी नहीं करना चाहते हैं.
परिवार के पास जो खेती योग्य भूमि है, उसमें भी कोई ट्रैक्टर वाला पैसे देने पर भी खेत जोतने को तैयार नहीं होता है. कारीमाटी गांव में कोईली देवी के घर के पास बिजली तो है. लेकिन कोईली का परिवार आज भी ढिबरी युग में जीवन गुजार रहा है, क्योंकि उसकी झोपड़ी में ना तो बिजली का तार और बल्ब लगाने को कोई तैयार नहीं है.
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कोईली देवी का बकरी शेड खड़े करता है कई सवाल
जनता की गाढ़ी कमाई को सरकारी मशीनरी कैसे सरकारी योजनाओं के रूप में दुरूपयोग करती है. इसका उदाहरण भी कोईली देवी को मिली बकरी शेड योजना से साफ झलकती है. यह सर्वविदित है कि कोई परिवार या किसान अपने पशुओं को अपने ही घर के एक हिस्से या घर के अगल-बगल में रखते हैं. लेकिन कोईली देवी को आवंटित बकरी शेड कोईली के टोले से दूर सुनसान टांड़ दीपाटोली में बनाया जा रहा है.
यहां महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या सुनसान इलाके में, जहां कोई परिवार नहीं रहता, वहां सिर्फ बकरियों को रखा जा सकेगा.
इसपर प्रशासन यह दलील दे सकती है कि लाभुक जिस स्थान के लिए तैयार हुआ, बकरी शेड वहीं बनाया जा रहा है क्योंकि घर के पास कोईली देवी की जमीन नहीं है. तब फिर सवाल उठता है कि यदि कोई लाभुक ये कहे कि मुझे एक कुआं पहाड़ के चट्टान में खुदवाना है, तब भी क्या प्रशासन ऐसा ही करेगा? क्या उसे योजना के उद्देश्य और तकनीकी पक्ष ध्यान में रखा जाना नहीं चाहिए?
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संतोषी की मौत के बाद गांव में बना संपर्क पथ

संतोषी की मौत के बाद लचड़ागढ़ से करीमाटी तक सरकार की ओर संपर्क पथ का निर्माण किया गया. इसके अलावा कोईली देवी का अन्त्योदय कार्ड भी बना.
क्या कहते हैं जलडेगा प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार
जलडेगा प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार ने बकरी शेड के बारे में कहा कि मनरेगा में मटेरियल की राशि नहीं आने के कारण निर्माण पूरा नहीं हो सकी. साथ ही संजय कुमार ने बताया कि दो हफ्ते में बकरी शेड का काम पूरी कर लिया जायेगा.
इसके अलावा आवास योजना के संबंध में उन्होंने कहा कि इंदिरा आवास पूर्व में मिल चुका है, इसलिए प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ परिवार को नहीं मिल सकता है. लेकिन हमने प्रयास किया है कि अगर वह मछली पालन का प्रशिक्षण ले तो उन्हें मछुआ आवास उपलब्ध कराया जा सकता है.
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