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बाल विवाह में बढ़ा उम्र का अंतर, 16 की जगह अब 17-18 में हो रही शादियां- ब्रेक-थ्रू

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  • आंकड़े पूछने पर बताया गया बाल विवाह की उम्र में हुई वृद्धि
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Ranchi : मौका था बाल विवाह में पैनल डिस्कशन का. इस आयोजन में कला और मीडिया क्षेत्र के कई जानेमाने लोग मौजूद थे.  लेकिन कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्था के पास ही इससे संबंधित आकंड़े नहीं थे. ब्रेक-थ्रू की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बाल विवाह से संबधित अलग-अलग मामलों और मुद्दों पर चर्चाएं की गयी.

जब आयोजकों से बाल विवाह राज्य में प्रति वर्ष औसतन कितने होते हैं, इसका आंकड़ा मांगा गया तो उनके पास कोई जवाब नहीं था. बल्कि जवाब ये दिया गया कि धीरे-धीरे बाल विवाह में कमी आ रही है. ब्रेक-थ्रू की डॉ लीना सुशांत ने जानकारी दी कि पहले बाल विवाह के उम्र काफी कम उम्र में कर दी जाती थी, लेकिन अब दो-तीन सालों का अंतर देखा जा रहा है.

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उम्र की मिली जानकारी

 

डॉ लीना ने जानकारी दी कि रांची और हजारीबाग में बाल विवाह के उम्र में काफी अंतर आया है. पहले 14 से 15 साल में ही शादी हो जाती थी. लेकिन समय के साथ-साथ उम्र बढ़ते जा रहा है. इन्होंने जवाब दिया कि जहां पहले 14 में शादी होती थी, वहां अब 16 या 17 साल में हो रही है. वहीं पूर्व में जहां 16 और 17 में शादियां होती थी. वहां अब 19 या साढ़े 19 साल तक शादियां देखी जा रही है. उन्होंने बताया कि बैक्र-थ्रू के कारण अधिक जागरूकता आयी है.

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समुदाय के साथ काम करना जरूरी

बात चीत के क्रम में उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं का अधिक असर तो नहीं देखा जा रहा. क्योंकि गांवों तक योजनाएं पहुंच नहीं पाती है. ब्रेक-थ्रू अपने स्तर से बाल विवाह के लिए जागरूकता फैला रही है. जिसका काफी असर भी देखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि हजारीबाग और रांची में काफी हद तक लोगों में जागरूकता आयी है और बाल विवाह कम भी हुए हैं. पहले भी राजधानी में इन मामलों पर कार्यक्रम का आयोजन किया जा चुका है. लेकिन सही आंकड़े नहीं बताये जाते.

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क्या कहते हैं आंकड़े

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे एनएफएचएस की 2016 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक जनगणना 2011 के अनुसार बाल विवाह की दर में गिरावट झारखंड में 42.4 प्रतिशत थी. जबकि एनएफएचएस की 2015-16 की रिपोर्ट की मुताबिक 2016 में बाल विवाह में गिरावट की दर 39.9 प्रतिशत है. रांची जिला में इसकी गिरावट की दर साल 2011 में 16.0 प्रतिशत से 28.1 प्रतिशत है. वहीं हजारीबाग में साल 2011 में 33.2 थी. जो साल 2016 में 40.8 प्रतिशत बतायी गयी. उल्लेखनीय है कि एनएचएफएस प्रति दस साल में बाल विवाह पर सर्वे करती है.

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