
Jamshedpur : झारखंड के अल्पसंख्यक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति एवं योगदान कराने का मैनेजमेंट का अधिकार खत्म कर दिया गया है. यह फैसला अब विभागीय निदेशक करेंगे. हालंकि सरकार ने यह फैसला 40 साल पहले लिया था, लेकिन इसकी अनदेखी हो रही थी. अब ऐसा नहीं चलेगा. विभागीय निदेशक की अनुमति मिलने के बाद ही नियुक्ति के लिए चयनित शिक्षक विद्यालय में योगदान दे सकेंगे. यदि किसी विद्यालय की प्रबंध समिति इस आदेश को नहीं मानती है, तो उसकी अल्पसंख्यक की मान्यता समाप्त की जा सकती है. माध्यमिक शिक्षा निदेशक हर्ष मंगला के हस्ताक्षर से इस आशय का आदेश गत सोमवार को जारी कर दिया गया है. आदेश की प्रति राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों एवं मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों की प्रबंध कार्यसमिति के प्रधानाध्यापक एवं सचिवों को भेज दी गयी है.
अनुमोदन के बाद ही योगदान करा सकेगी प्रबंध समिति
आदेश में लिखा है कि बिहार अराजकीय माध्यमिक विद्यालय अधिनियम 1981 के तहत अल्पसंख्यक स्कूलों की प्रबंध समिति राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत संख्या और योग्यता के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को विद्यालय सेवा बोर्ड के अनुमोदन के बाद ही योगदान करा सकेगी. झारखंड सरकार ने प्रधानाध्यापक और सहायक शिक्षक के अनुमोदन सहित अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालयों के बोर्ड की शक्तियां माध्यमिक शिक्षा निदेशक को सौंपी हैं. यही नहीं, अल्पसंख्यक विद्यालयों के शिक्षकों और प्राचार्य का वेतन निर्धारण भी निदेशक करेंगे. निदेशक हर्ष मंगला के अनुसार प्रावधान होने के बावजूद अल्पसंख्यक विद्यालय की प्रबंध समिति शिक्षकों की नियुक्ति कर विद्यालय में योगदान करवा देती है. सरकार से अनुमोदन नहीं होने के चलते शिक्षकों को वेतन नहीं मिल पाता. शिक्षक कोर्ट चले जाते हैं और सरकार को अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है.




