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शाह ब्रदर्स मामले में सरकार को हुआ 1365 करोड़ का नुकसान : डॉ अजय कुमार

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Ranchi: शाह ब्रदर्स को आवंटित माइंस में अनियमिता बरतने का आरोप लगाते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने कहा है कि इसके पीछे का पूरा खेल रघुवर सरकार द्वारा रचा गया है. पूरे प्रकरण में राज्य के राजस्व में करीब-करीब 1365 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. हालांकि सरकार की शह पर चाईबासा के एक खनन अधिकारी ने इस राशि को कम कर करीब 250 करोड़ कर दिया. इसके लिए सीधे तौर पर विभागीय मंत्री (मुख्यमंत्री), खनन विभाग के पदाधिकारी और कार्य से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेवार हैं. उन्होंने कहा कि शाह ब्रदर्श को खदान आवंटन में जो भी अनियमितताएं बरती गयी हैं, उसे लेकर कांग्रेस पार्टी एंटी करप्शन ब्यूरो में प्राथमिकी दर्ज कराएगी. इससे जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और तथ्यों की जानकारी के लिए आरटीआइ भी फाइल की जाएगा. पूरी जानकारी लेकर पार्टी उच्च न्यायालय में पीआइएल भी दायर करेगी. डॉ अजय ने उक्त बातें सोमवार को पार्टी कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए कहीं.

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संरक्षण देकर सरकार ने रचा पूरा षड्यंत्र

डॉ अजय ने कहा कि राज्य सरकार ने महाधिवक्ता अजीत कुमार और शाह ब्रदर्स के बीच अंडर टेबल लेनदेन को संरक्षण देकर मामले को रफा-दफा करने का षड्यंत्र रचा है. रिपोर्ट के आधार पर खान एवं भूतत्व विभाग ने मई 2014 को माइनिंग कंपनी के मालिक शाह ब्रदर्स पर करीब 1110 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. खनन कार्य में शाह ब्रदर्श द्वारा गलती किये जाने के कारण दोबारा जांच की गयी, तो उक्त राशि को बढ़ा कर 1365 करोड़ कर दिया गया. फिर अप्रैल 2016 में खनन विभाग ने एक आदेश जारी कर शाह ब्रदर्स के माइनिंग लीज को रद्द कर दिया. बाद में इसपर शाह ब्रदर्स ने जब हाइकोर्ट में केस फाइल किया, तो उन्हें राहत प्रदान कर दी गयी. इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि विभाग की तरफ से माइनिंग रद्द करने का कोई विशेष कारण नहीं बताया गया था. राहत मिलने के बाद राज्य सरकार के सहयोग से जिला खनन अधिकारी ने शाह ब्रदर्स को और एक राहत देते हुए फिर से माइनिंग को शुरू करने का निर्देश दे दिया.

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1365 करोड़ जुर्माने की राशि 250 करोड़ हुई कैसे, यह जांच का विषय

पूरे मामले पर प्रदेश अध्यक्ष ने महाधिवक्ता अजीत कुमार को भी घेरा. उन्होंने कहा कि एडिशनल महाधिवक्ता रहते हुए अजीत कुमार ने शाह ब्रदर्स के लीज एक्टेंशन के सरकारी पक्ष को कोर्ट में मजबूती से नहीं रखा. इसी वर्ष 27 जून को महाधिवक्ता बने अजीत कुमार ने शाह ब्रदर्स के लीज एक्टेंशन को रद्द करने की सिफारिश कोर्ट से कर दी. उन्होंने कहा कि खेल यहीं तक नहीं रुका. जिला खनन अधिकारी ने किस तरह से 1365 करोड़ जुर्माने की राशि को 250 करोड़ कर दिया, यह भी जांच का विषय है. मामले में महाधिवक्ता की भूमिका को भी संदिग्ध बताते हुए कहा कि महाधिवक्ता ने हाइकोर्ट को दिग्भ्रमित करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि जनता के सामने सरकार इस मामले से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करे. एक और सरकार अवैध खनन रोकने में विफल दिखती है, वहीं दूसरी तरफ नियम विरुद्ध अपने चहेतों को खुश करने के लिए खदानों का आवंटन किया जा रहा है. यह प्रदेश की संपत्ति लूटने की साजिश है. 4 साल से सत्तासीन भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के काले धब्बे में रंग गई है. शाह ब्रदर्स के द्वारा किये गये खनन घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया में 1365 करोड़ के राजस्व का नुकसान कर सरकारी राशि की बंदरबांट की गयी है.

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