
Ranchi: आज मीडिया और सोशल मीडिया में हजारीबाग के डीसी रवि शंकर शुक्ला और वहां काम करने वाली झारखंड प्रशासनिक सेवा की अधिकारी दीपमाला से जुड़ी खबर सुर्खियों में है. दीपमाला ने नौ पन्नों का लेटर लिखकर ये बताने की कोशिश कि उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा था. इससे पहले भी लोकसभा चुनाव के वक्त दीपमाला से जुड़ी खबर मीडिया में आयी थी. उस वक्त भी काफी हो-हंगामा हुआ था.
इसे भी पढ़ें – महिला डिप्टी कलेक्टर का खुला पत्र- मेंटली टॉर्चर कर मेंटली स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए थैंक्यू सर, आपके तबादले पर हम लड्डू बांटेंगे
इन सभी मामलों को लेकर न्यूज विंग ने दीपमाला से बात की. पहले तो उन्होंने किसी भी तरह का बयान देने से मना कर दिया. लेकिन बाद में बातों-बातों में उन्होंने सारी बात बतायी. बात करने के दौरान वो कई बार रो पड़ी. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि लेटर लिखने के बाद ऐसा हो जाएगा. पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश.
लेटर नहीं लिखती तो सुसाइड कर लेती
उस दिन मैं सुसाइड करने जा रही थी. मैंने डीसी सर को जाकर बोला कि सर मेरी तबियत खराब है. मेरी तबियत बहुत खराब थी, मैंने छुट्टी ली थी. मंडे और ट्यूजडे को छुट्टी लेने के बाद मैं फीवर से तप रही थी. डीसी सर ने फिर से मेरी ड्यूटी लगा दी. मैंने फिर भी लिखा उनको. लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. मेरे में बिलकुल एनर्जी नहीं थी. चलने-फिरने की ताकत मुझमें नहीं थी. वे चाहते थे कि मैं कंट्रोल रूम में जाकर आठ घंटे का ड्यूटी करूं.
मैंने उनको फिर से बताया कि सर आपसे मैंने छुट्टी ली थी, फिर भी आप ड्यूटी लगा रहे हैं. मुझे हाई फीवर है. मैं ड्यूटी नहीं कर पाऊंगी. उसके बाद भी उन्होंने मुझे रिप्लेस नहीं किया. मैं इस प्रेशर में नहीं जी सकती थी. मैं सुसाइड करने वाली थी. अगर मैं ये लेटर नहीं लिखती तो मैं सुसाइड कर लेती. अगर मैं अपने मन की बात नहीं लिखती, तो मैं जी ही नहीं सकती थी. मैं निश्चित तौर पर सुसाइड कर लेती. अब इसका जो भी अंजाम हो. मेरे पास दो ही ऑप्शन था. या तो मैं अपने मन की बात लिखती या अपने आप को खत्म कर लेती.
इसे भी पढ़ेंः न्यूजविंग इंपैक्टः महिला अफसर को परेशान करने का मामला, हजारीबाग DC से मांगी गई जानकारी
बहुत मुश्किल से मिली है सिविल सर्वेंट की जॉब
सिविल सर्वेंट की जॉब बहुत ही मुश्किल से मिलती है. और इस जॉब को ताक पर रखना, इसके लिए बहुत हिम्मत की जरूरत होती है. जब आपको लगता है न कि आप कुछ नहीं कर सकते. जब आपको लगता है कि आपके साथ कोई नहीं है. तो ऐसा करना पड़ता है. मैं डीसी से शनिवार को मिली थी. मैं रो-रो कर अपनी सारी बात उनको बता रही थी. मैंने कहा उनसे, सर मेरी तबियत खराब है, मुझे फीवर है. उनको समझना होता तो वो उसी वक्त समझ लेते. अगर वो उस वक्त समझ लेते तो ये सब नहीं होता. या तो हम ऊपर चले जाते या तो ये होता… जो हुआ है.
जब कोई सुनवाई कहीं नहीं होती है ना… जो मेरे जैसे सिचवेशन में रहता है ना… वो ऐसे ही करता है. क्यों सिस्टम में ऐसा होता है कि लोग अपने-आप को गोली मार लेते हैं. एकदम यही प्रेशर होता है. कोई सुनवाई नहीं होती है, तब ऐसा ही होता है. इतने मीडिया वाले आए मेरे पास. मैंने किसी से बात नहीं की. मुझे किसी से बात करनी ही नहीं है. कुछ मुझे अब बोलना ही नहीं है. जो मेरे दिल की बात थी. जो मेरे साथ काम करने वाले साथियों की बात थी. मैंने सब लिखकर रख दी.
इसे भी पढ़ेंः धनबादः JVM नेता व कोल ट्रांसपोर्ट कंपनी इंचार्ज रंजीत सिंह की हत्या और SSP का हास्यास्पद बयान
मेरे हिम्मत से कुछ को तो न्याय मिला
मैंने अपने दुख को लिखकर ग्रुप में रखा. उसे काफी गलत तरह से पेश किया गया. मेरी तकलीफ को समझना चाहिए था. जिम्मेदारी के साथ सोचना चाहिए था. कहा कि आप लोगों को हजारीबाग के अधिकारियों से पूछना चाहिए था कि वो लोग किस तरह के डर के माहौल में जी रहे थे. छह-छह महीने से जिनकी सैलरी बंद थी, कल जाकर सबकी सैलेरी रिलीज हुई है. अगर मैं ऐसा करने की हिम्मत नहीं की होती… ठीक है मेरे ऊपर खतरा मंडरा रहा है.
लेकिन अगर मैं हिम्मत नहीं करती इतना… तो वो लोग जो सात-आठ महीने से बिना सैलेरी के जी रहे थे, उन्हें सैलेरी नहीं मिलती. अभी जो पांच दिनों तक नाइट ड्यूटी लगायी गयी थी. तुरंत डीसी सर ने सबकी नाइट ड्यूटी को रद्द किया. ये मेरे लिए बहुत बड़ा एचीवमेंट है. लेडीज को नाइट ड्यूटी से हटा दिया गया, क्या ये एचीवमेंट नहीं है.
इसे भी पढ़ेंः धनबाद: जेवीएम नेता व साइट इंचार्ज रंजीत सिंह की हत्या, पुलिस को पता था धमका रहे हैं गुंडे, कुछ नहीं किया
2014 में भी मेरे साथ राजनीति हुई
2014 में लोकसभा चुनाव के वक्त खेलगांव में पत्रकार और आम लोगों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया था. उस प्रकरण में भी दीपमाला का नाम आया था. दरअसल दीपमाला उस वक्त अनगड़ा की बीडीओ और सीओ के प्रभार में थी. उन्होंने उस मामले को लेकर कहा कि एक छोटी सी बात को पता नहीं कितनी बड़ी बात बना देते हैं आपलोग (मीडिया). उन्होंने कहा कि जब इलेक्शन हो गया. तो जितना खाली ईवीएम का बॉक्स होता है, उसे लेकर स्ट्रॉग रूम में जमा करने खेलगांव जा रही थी. खेल गांव के पास जैसे ही मैं पहुंची डीसी विनय चौबे सर का फोन आया. उन्होंने कहा कि दीपमाला देखो खेलगांव के पास कुछ हो रहा है.
इसे भी पढ़ेंः JVM नेता की हत्या के विरोध में धनबाद बंद, सड़क पर उतरे कार्यकर्ता
उन्होंने कहा कि वहां कुछ जमावड़ा है, जाकर देखो वहां क्या हो रहा है. उनके कहने पर मैं वहां गयी. काफी रात हो चुकी थी. मेरे साथ वाले पुलिसवाले भी जा चुके थे. मैं अकेली थी. सिर्फ ड्राइवर मेरे साथ था. जिस दिन कि यह घटना है उससे 16 दिन पहले ही मैंने सिविल सर्वेंट की नौकरी में ज्वाइनिंग की थी. मेरी पहली पोस्टिंग थी अनगड़ा में. मुझे उस वक्त कोई आइडिया नहीं था. कुछ भी नहीं जानती थी मैं. जैसे ही मैं वहां पहुंची पॉलिटिक्ल पार्टी के लोगों ने मेरी गाड़ी को घेर लिया. मेरे ड्राइवर को उतार कर उन लोगों ने मारा. गाड़ी को भीड़ हिलाने लगी. इतनी भीड़ होने के बाद भी मैं जैसे ही मैं बाहर निकली. मैं पूछना चाह रही थी कि आखिर ऐसा हो क्यों रहा है. लेकिन भीड़ में शामिल कुछ लड़कों ने मेरा नया मोबाइल छीन लिया.
नयी कहानी बना दी गयी
उस घटना को दूसरी कहानी की तरफ मोड़ दिया गया. कहा जाने लगा कि मैं पोल्ड ईवीएम को लेकर खेलगांव जा रही थी. जबकि वो सभी ईवीएम खाली थे. खाली ईवीएम को लेकर मैं खेल गांव जमा करने जा रही थी. इसके बाद चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने मुझे फोन किया. जांच हुई. जांच में पाया गया कि वो सारे खाली ईवीएम हैं. किसी में मतदान नहीं हुआ है.
इसे भी पढ़ेंः राजधानी में गैर आदिवासियों ने हथिया ली आदिवासियों की जमीन, 2261 मामले हैं लंबित
राजनीति नहीं जानने का खामियाजा भुगतना पड़ा
मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है. मीडिया में मेरे खिलाफ खबर छपने लगी. दरअसल मुझे और मेरे ड्राइवर को एफआईआर करने को कहा गया. ना मैं रामटहल चौधरी को जानती थी, ना ही मैं अमिताभ चौधरी और अमित महतो को जानती थी. मुझे और मेरे ड्राइवर से एफआईआर करायी गयी. ये सारी चीज एक राजनीति थी. मैं बिलकुल नयी थी. मैंने तो उन्हें देखा भी नहीं था. भीड़ ने मेरे साथ बद्तमीजी की. लेकिन 14 दिन पुरानी अफसर ये कैसे समझ सकती है कि उस भीड़ में कौन है.
न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.




