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राजधानी में गैर आदिवासियों ने हथिया ली आदिवासियों की जमीन,  2261 मामले हैं लंबित

आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जा

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Pravin kumar:

Ranchi: झारखंड गठन के बाद राजधानी रांची में तेजी से आदिवासियों की जमीन पर गैर आदिवासियों ने कब्जा जमाया है. यह सिलसिला अब भी जारी है. इसमें राजनेता से लेकर सरकारी अफसर भी शामिल हैं.  आदिवासियों की जमीन के अवैध हस्तांतरण के मामले में कई अफसरों पर गाज गिर चुकी हैं. विभागीय कार्यवाही भी चल रही है. तीन अफसर बर्खास्त भी हो चुके हैं. हाल यह है कि दो हजार से अधिक गैर आदिवासियों द्वारा आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है.

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वर्तमान में 2261 मामले  हैं लंबित

राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 2261 आदिवासी भूमि वापसी के मामले आज भी एसआर कोर्ट में लंबित है. राज्य सरकार ने इन मामलों के निपटारे के लिए विशेष विनिमय पदाधिकारी का पद एक साल के लिए सृजित किया था.  इन अफसरों के कुल 11 महीने के कार्यकाल में 2437 में से 138 मामलों का निपटारा किया गया. 2261 मामले आज भी लंबित है.  इस पद पर निर्धारित अवधि 25 नवंबर 2017 तक ही थी. इसके बाद सरकार द्वारा 24 नवंबर 2018 तक का एक्सटेंशन दे दिया गया है. राजस्व निबंधन विभाग के अनुसार 2016 में कोर्ट में आदिवासी जमीन से जुड़े 4727 मामले थे जिसमें 3541 मामले अवैध हस्तांतरण से संबंधित थे.

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1894.63 एकड़ आदिवासी जमीन पर गैर आदिवासियों का कब्जा

झारखंड की कुल आबादी में 26 फीसदी जनसंख्या आदिवासियों की है. अधिकतर आदिवासी,  दलित तथा अन्य पिछड़े वर्ग के लोग गांवों में ही रहते हैं. शहरों में अधिकांशतया उच्च और मध्यम वर्ग के लोग बसे हैं जो वाणिज्य-व्यापार, उद्योग, शिक्षा तथा सेवाओं के अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं. सिर्फ राजधानी रांची में ही 1894.63 एकड़ आदिवासी जमीन पर गैर आदिवासियों का कब्जा है. झारखंड के ऊपर ग्रहण ब्रिटिश शासन के दौरान ही लग गया था, जब शक्तिसम्पन्न लोगों ने उसके प्राकृतिक संसाधनों को हडपना शुरू कर दिया था.

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रांची में आदिवासी जमीन से बेदखल : शिवा कच्छप

आदिवासी सेना के अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा कि झारखंड अलग राज्य होने के बाद राज्य के काश्तकारी कानूनों की अवहेलना कर गैर कानूनी तरीके से आदिवासियों को उनकी भूमि से बेदखल किया जाता रहा है. आगे शिवा ने कहा कि भ्रष्ट प्रशासन, भू-राजस्व कर्मचारियों और भू-माफियों की मिली भगत से आदिवासी भूमि की फर्जी बंदोबस्ती, रजिस्ट्री, निबंधन कर अवैध हस्तांतरण, जमीन का मूल दस्तावेज रिकॉर्ड रूम से गायब कर कानूनी रूप दिया जा रहा है तथा गलत कागजात के आधार पर डीड बनाकर भूमि पर कब्जा किया गया है.

साथ ही शिवा ने रांची में जमीन का रिकॉर्ड रूम से दस्तावेज के गायब होने व गलत दस्तावेज बनाकर खरीद-बिक्री की सीबीआइ जांच करने की मांग की है.

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