न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

वाम का इरादा एनडीए व यूपीए को टक्कर देने का, कोडरमा, राजमहल और हजारीबाग से है उम्मीद

छह सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं वामदल, आठ सीटों पर महागठबंधन को समर्थन

764

Ranchi : पांच सालों तक आंदोलनों में साथ-साथ चलने वाले वामदल को महागठबंधन में जगह नहीं दी गयी. वामदलों के दावों को जिस तरह नजरअंदाज किया गया, उसका परिणाम यह है कि राज्य की छह सीटों पर वामदलों के तीनों घटकों ने अपने उममीदवार मैदान में उतारने का फैसला लिया है.

mi banner add

वाम दलों में सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई माले और मासस शामिल हैं. एक अन्य वाम दल एसयूसीआई ने भी अपना प्रत्याषी उतारा है. महागठबंधन में जगह नहीं मिलने के बाद भी वामपंथ ऐसी सीटों में गठबंधन को समर्थन दे रहे हैं जहां से वामदलों के उम्मीदवार खड़े नहीं है.

वहीं पूर्व में कई बार महागठबंधन के कई नेताओं को कहते सुना गया है कि वामदलों की स्थिति राज्य में कुछ खास नहीं है. इसके बावजूद भाजपा को केंद्रीय सत्ता से हटाने के लिए वामदलों ने गठबंधन को समर्थन देने की योजना बनाई है. वाम का इरादा एनडीए व यूपीए को टक्कर देने का है.

राज्य के परिपेक्ष्य में देखा जाए तो पिछले दो तीन दशक से वामपंथियों के प्रति लोगों में रूझान कम हुआ है. भले ही वामपंथी राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते हैं. किसानों और मजदूरों में अच्छी पकड़ बनाए हुए हैं इसके बावजूद राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां इन्हें अपने विश्वास में नहीं लेती.

इसे भी पढ़ें- जेट एयरवेज की सभी अंतरराष्ट्रीय विमान रद्द, सरकार ने समीक्षा के दिये निर्देश

स्वाभाविक अधिकारों को किया गया नजरअंदाज

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने शुरू से ही सीट शेयरिंग न करने की बात कही. लेकिन गठबंधन में सीट नहीं मिलने पर सबसे पहले मार्क्सवादी पार्टी ही गठबंधन से अलग हुई. वहीं सीपीआई और सीपीआई माले की चाह थी कि गठबंधन में पार्टियों को शामिल किया जाए. वो भी उनके सीटों के साथ.

पिछले चुनावों को देखा जाए तो राज्य में लोकसभा चुनाव के दौरान वामपंथियों को 4.5 प्रतिशत वोट मिले थे. जसकी वजह से इस चुनाव में भी वामदल अपनी दावेदारी ठोंक रहे थे. सीपीआई माले के राज्य सचिव जर्नादन प्रसाद ने कहा कि पिछले चुनावों को देखा जाए तो राजद 1.5 प्रतिशत व कांग्रेस ने 13 प्रतिशत वोट लाया था. ऐसे में वामपंथ की स्थिति इतनी भी कमजोर नहीं थी कि उन्हें गठबंधन में शामिल नहीं किया जाता. जबकि जिन सीटों पर वामपंथियों ने अपने उम्मीदवार दिए हैं, वहां से वे अपने बल पर जीत सकते हैं. उन्होंने कहा कि गठबंधन ने वामदलों के स्वाभाविक अधिकार को नजरअंदाज किया है.

इसे भी पढ़ें- चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 30 मई तक चुनाव आयोग को चंदे की जानकारी दें पार्टियां

कमजोर नहीं स्थिति

राजनीति पार्टियों का लगातार वामपंथियों को हल्के में आंकना, राज्य में उनके अस्तित्व पर सवाल खड़ा करता है. इस पर सीपीआईएम के राज्य सचिव गोपीकांत बख्शी ने कहा कि कहीं भी राज्य में वामपंथी ताकत कम नहीं हुई है. जितने भी राज्य के ज्वलंत मुद्दे हुए हैं सबमें वामदलों ने ही सक्रिय भूमिका निभाई है.

ग्रामीणों के हर आंदोलन को वामदलों ने समर्थन दिया है. ऐसे में कहीं से भी वामदलों की स्थिति राज्य में कमजोर नहीं है. इसलिए उनके वजूद पर सवाल उठाना गलत है. पिछले चुनावों में भी हमने अच्छी स्थिति राज्य में बनाई. हां, ये बात पूर्व से केंद्रीय और राज्य स्तर पर तय थी कि मार्क्सवादी पार्टी सीट शेयरिंग नहीं करेगी.

इसे भी पढ़ें- पूर्व सेना प्रमुखों की राष्ट्रपति को चिट्ठी, सेना के नाम पर राजनीति से नाराज

स्थिति कमजोर है तो करेंगे मजबूत

वहीं राज्य में वामपंथियों की स्थिति पर सीपीआई माले के राज्य सचिव जर्नादन प्रसाद ने कहा कि पिछले कुछ सालों में स्थिति भले कमजोर हुई हो. लेकिन वामपंथी अभी भी अपने बलबूते पर चुनाव जीतने की ताकत रखते हैं. भले की बीजेपी को हराने के लिए पार्टी गठबंधन को सहयोग करती हो. लेकिन कोडरमा जैसी सीटों पर पार्टी को कोई हरा नहीं सकता.

उन्होंने कहा कि हजारीबाग, धनबाद जैसी जगहों में वामदलों की लोकप्रियता पिछले कुछ सालों में कम हुई है. लेकिन इसे मजबूत किया जाएगा. क्योंकि इन जगहों से पार्टी को वामदलों को काफी उम्मीद है. कोडरमा में झामुमो से बाबूलाल मरांडी के उम्मीदवारी पर संशय जताते हुए उन्होंने कहा कि सीपीआई माले के समक्ष झामुमो को सीट देना गठबंधन की गलती है.

इसे भी पढ़ें- लोकसभा चुनाव के पहले चरण में EVM क्षतिग्रस्त होने की 15 घटनाएं, चुनाव आयोग करेगा कार्रवाई

कहीं भी वामदलों की एकता नहीं होगी प्रभावित

बातचीत के दौरान वामपंथी नेताओं ने जानकारी दी कि जहां कहीं भी वामदल के उम्मीदवार चुनाव में खड़े हैं. वहां अन्य वामपंथी दल समर्थन देगी. भले ही गठबंधन में शामिल होने को लेकर वामदलों में भी पूर्व में आयोजित प्रेस वार्ताओं में मतभेद देखा गया. लेकिन इसके बावजूद वामदल एकता की बात कर रहे हैं. मासस से इस चुनाव में कोई उम्मीदवार नहीं दिया जा रहा है. मासस नेता सुशांतो मुखर्जी ने कहा कि इस चुनाव में कोई उम्मीदवार नहीं है. जबकि धनबाद में पार्टी पहले भी कांग्रेस को समर्थन देती आई है, इस बार भी देगी. वहीं कोडरमा में माले को समर्थन दिया जा रहा है. सीपीआईएम से राजमहल से गोपीन सोरेन, सीपीआई माले से पलामू से सुषमा मेहता, कोडरमा से राजकुमार यादव और सीपीआई हजारीबाग से भुवनेश्वर मेहता, दुमका से सेनापति मुर्मू और चतरा से अजुर्न कुमार पार्टी उम्मीदवार है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: