
लखन महतो को नहीं थी शराब की लत, दुर्घटनावश मौत होने की बात सरासर गलत है.
लखन महतो की मौत को लेकर नरेगा वांच के फैक्ट फाइंडिंग समाने आयी प्रशासनिक अक्षमता.
Ranchi: रांची के चान्हो प्रखंड के पतरातू निवासी लखन महतो (43 वर्ष) की मौत का कारण बना मनरेगा कुआं. 25 जुलाई को लखन महतो ने कुएं में कूदकर अपनी जान दे दी थी. लखन पर एक लाख 70 हजार का कर्ज था. और ये कर्ज उन्होंने नरेगा के तहत कुआं बनवाने के लिए लिया था.
दरअसल, राज्य में मनरेगा योजना की राशि समय पर नहीं दिये जाने के कारण जहां योजना पर काम नहीं हो रहा है. वहीं लखन महतो की मौत के बाद भी मनरेगा लाभुकों की पीड़ा को सरकार नहीं समझना चाहती है.
मनरेगा कुआं बना मौत का कारण ?
लखन महतो ने अपने खेत पर नरेगा के तहत एक कुएं का निर्माण किया था. इस कुएं का मनरेगा योजना कोड 3401005010/IF/7080901221509 है. और दिसम्बर 2017 में इसे स्वीकृत किया गया था.
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लेकिन समय पर योजना राशि नहीं आने की वजह से उन्हें मटेरियल की कीमत और मजदूरों को पैसे देने के लिए अपने परिजनों से कर्ज लेना पड़ा था.
जिसकी वजह से वे मानसिक तनाव से जूझ रहे थे. और 25 जुलाई की अहले सुबह 4 बजे के आसपास वो घर से थोड़ी दूर स्थित अपने खेत की ओर निकले थे, उनके ना लौटने पर जब लोगों ने खोजबीन की, तो पाया गया कि उनका मृत शरीर कुएं में पड़ा था.
गौरतलब है कि लखन अपने परिवार में एकलौते काम करने वाले व्यक्ति थे. जो खेती और मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते थे.
उनके परिवार में 85 वर्षीय मां (गुजरी देवी), 36 वर्षीय पत्नी (विमला देवी), तीन बच्चे सूरज (18 वर्ष), नीरज (15 वर्ष) एवं प्रवीण (12वर्ष) हैं.
प्रशासन की लापरवाही
लखन महतो की पत्नी विमला देवी ने बतलाया कि कुएं के निर्माण के लिए उनके पति ने अपने तीन परिजनों से एक लाख सत्तर हज़ार रुपये 2018 के जनवरी और फरवरी माह के बीच उधार लिया गया था. और 14 माह बीत जाने के बाद भी कर्ज़ की रकम लौटा पाने में असमर्थ थे.

विमला देवी ने बताया कि कुआं निर्माण को लेकर मज़दूरी एवं मटेरियल के पैसे, मज़दूरों एवं वेंडर के बैंक खाते में समय नहीं हस्तांतरित नहीं होने की वजह से, लखन महतो को विवश होकर कर्ज़ लेकर भुगतान खुद करना पड़ा था.
पत्नी ने आरोप लगाया कि उन्हें कर्ज़ लेने पर मज़बूर होना प्रशासनिक असफलता थी. क्योंकि उन्होंने इस योजना में अपने खर्च से मज़दूरी और सामग्री का भुगतान मार्केट दर के अनुसार किया, जो कि मनरेगा के मज़दूरी दर 168 से अधिक थी.
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और सरकार से पंजीकृत वेंडर से सामग्री उपलब्ध नहीं करायी गयी. इतना ही नहीं एक लाख 18 हज़ार 5 सौ 45 की बकाया राशि मिलने की उम्मीद में लखन पिछले 13 महीनों से सप्ताह में दो-तीन दिन प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटने को विवश थे.
लखन जैसे 28 लाभुकों को नहीं मिले पैसे
पतरातू पंचायत में लखन महतो के अलावा 28 अन्य व्यक्ति ऐसे हैं, जिन्हें मनरेगा के तहत कुआं निर्माण हेतु योजना का लाभ मिला है, वो भी समान परिस्थिति का सामना कर रहे हैं.
इस दुखद घटना के छह दिन गुज़र जाने के बाद भी, सरकार या प्रशासन की तरफ से किसी भी प्रकार का लाभ परिवार को नहीं मिला है और ना ही योजना संबंधित बकाया राशि का भुगतान ही किया गया है.
लखन की 85 वर्षीय वृद्धा मां गुजरी देवी को वृद्धा पेंशन का लाभ अबतक नहीं मिला है. वहीं अन्नपूर्णा अन्न योजना के तहत मिलने वाला राशन दिसंबर माह 2010 में बंद कर दिया गया.
जबकि उन्होंने पूर्व में कई बार पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर आवेदन जमा किया है. लखन के परिवार को अभी तक राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत मिलने वाली एककालीन 20,000 रुपये की राशि भी नहीं मिली है.
लखन की मौत दुर्घटना नहीं
झारखंड नरेगा वॉच ने जब परिवार एवं पड़ोसियों से बातचीत की तो बता चला कि लखन महतो को नशे की आदत नहीं थी. जबकि प्रखंड विकास पदाधिकारी ने दावा किया था कि लखन महतो की मृत्यु नशे की अवस्था में हुई एक दुर्घटना थी, जो कि सरासर गलत है.
झारखंड नरेगा वॉच की मांगें
झारखंड सरकार के ज्ञापांक 4-110 (NREGA)/10 ग्रा० वि०4716, रांची/दिनांक01/08/2011 तहत मृतक के आश्रितों को तत्काल मुआवजा राशि निर्गत की जाये.
मृतक के आश्रितों राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत राशि निर्गत की जाये.
मृतक की पत्नी को विधवा पेंशन का लाभ दिया जाये.
कूप निर्माण में प्रयुक्त सामग्री का भुगतान तत्काल किया जाये.
मृतक लखन महतो को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले तथा सामग्री मद में भुगतान ससमय न करने के लिए जिम्मेवार कर्मियों/अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाये.
राज्य सरकार मनरेगा योजनाओं में तत्काल सामग्री आपूर्ति तथा भुगतान संबंधी जटिलताओं को दूर करने के लिए कारगर कदम उठाये.
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