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कारखाना सेफ्टी लाइसेंस देने में हो रहा गोरखधंधा, मुख्य कारखाना निरीक्षक जारी करते हैं थर्ड पार्टी को लाइसेंस

Pravin kumar

झारखंड में मुख्य कारखाना निरीक्षक का कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है. राज्य में छोटे-बड़े कुल  4517 कारखाने हैं. इनमें से 200 कारखानों में 500 से एक हजार व्यक्ति तक कार्यरत हैं. सभी कारखानों को प्रति वर्ष कारखाना सेफ्टी लाइसेंस प्राप्त करना आनिर्वय है.

कारखानों को सेफ्टी लाइसेंस थर्ड पार्टी की ऑडिट के द्वारा दिया जाता है. जिसको लाइसेंस देने का काम मुख्य कारखाना निरीक्षक कार्यलाय, रांची के द्वारा किया जाता है. कारखानों को सेफ्टी लाइसेंस देने के लिए थर्ड पार्टी को लाइसेंस प्राप्त करना होता है. जिसके लिए पैसे लेकर लांइसेस देने का मामला समाने आया है.

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मुरी हादसे के पहले सुभाष की कंपनी ने दिया था कारखाना सेफ्टी सर्टिफिकेट

मुरी के लगाम गांव में 8 अप्रैल 2019 को हुए हिंडाल्को कपंनी के पाउंड में तबाही के बाद रेड मड (बाक्सइट का मलबा) का कास्टिक तालाब 100 एकड़ में फैला था. उसका एक बड़ा हिस्सा धंस गया था. जिससे आसपास की करीब 10 एकड़ खेती योग्य जमीन पर मलबा जमा हो गया है.

और इसमें कई लोगों की जान जाने की आशंका जतायी गयी थी. इस कारखाने का सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने का काम मुख्य कारखाना निरीक्षक अरुण कुमार मिश्रा की पंसदीदा कंपनी को किया गया. हिंडालको रेडमार्ट हादसे में सेफ्टी सर्टिफिकेट निर्गत करने का काम सुभाष कुमार की कंपनी भारत इंडस्ट्रियल कंस्ट्रक्शन ने किया था.

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सुभाष कुमार की कंपनी क्यों है पसंदीदा कंपनी

इस संबंध में मैसर्स भारत इंडस्ट्रियल कंस्ट्रक्शन, मैसर्स इंडियन इंडस्ट्रियल कंस्ट्रक्शन और हिंदुस्तान इंडस्ट्रियल कंस्ट्रक्शन के मालिक सुभाष कुमार ने श्रम विभाग के द्वारा मुख्य कारखाना निरीक्षक अरुण कुमार मिश्रा पर लगे भ्रष्टचार के आरोप के बाद गठित जांच कमेटी के समक्ष एक तथ्य स्वीकार किया है.

सुभाष कुमार ने माना है कि एक साल का लाइसेंस लेने के लिए मुख्य कारखाना निरीक्षक अरुण कुमार मिश्रा को कारखाना निरीक्षक के माध्यम से 16.5 लाख रुपया दिये गये. मैसर्स इंडियन इंडस्ट्रियल कंस्ट्रक्शन के द्वारा थर्ड पार्टी ऑडिट सक्षमता प्रमाण पत्र सरायकेला की मेटला कंपनी में लगे प्रेशर वेसल की टेस्टिंग कर निर्गत किया गया. इसे निर्गत करने का अधिकार इस कंपनी को नहीं है.

लेकिन इसे भी मुख्य कारखाना निरीक्षक ने स्वीकार कर लिया. वही हिंदुस्तान इंडस्ट्रियल कंस्ट्रक्शन के द्वारा सक्षमता प्रमाणपत्र डालमिया सीमेंट वर्क बोकारो को भी दिया गया.

कारखाना निरीक्षक अरुण कुमार मिश्रा ने किया नियमावली में बदलाव

कारखानों को सेफ्टी लाइसेंस दिये जाने की नियमावली में बदलाव वर्तमान करखाना निरीक्षक अरुण कुमार मिश्रा ने किया. पूर्व मुख्य कारखाना निरीक्षक अवधेश कुमार की सेवानिवृत्ति होने के बाद 2014 में अरुण कुमार मिश्रा मुख्य कारखाना निरीक्षक के पद पर आसीन हुए. इसके बाद अपने चहेते लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमावली में बदलाव किया.

अवधेश कुमार के द्वारा 12 कंपनी को सक्षमता प्रमाण पत्र देने का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था. वैसे लोगों को नयी कंपनी बनवा कर सक्षमता प्रमाण पत्र निर्गत करने का अधिकार अरुण कुमार के द्वारा किया गया. नियमावली में बदलाव का सबसे ज्यादा लाभ सुभाष कुमार की कंपनी ने उठाया. जिसे आंख बंदकर मुख्य करखाना निरीक्षक के द्वारा स्वीकार कर लिया जाता रहा.

श्रम विभाग की जांच कमेटी ने अरुण कुमार मिश्रा को पाया दोषी

जनरल इंजीनियरिंग एंड मार्केटिंग के प्रोपराइटर एके चतुर्वेदी के भ्रष्टाचार की शिकायत पर श्रम विभाग में दो  सदस्यीय कमेटी गठित की गयी थी. इस कमेटी में एडिशनल सेक्रेटरी उमेश प्रसाद शामिल थे. सुभाष कुमार के द्वारा कहा गया था अरुण कुमार मिश्रा को लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 16.50 लाख दिये गये थे. जांच कमेटी की रिपोर्ट में मुख्य कारखाना निरीक्षक अरुण कुमार मिश्रा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप के सबूत मिले.

सरकार नहीं कर रही है कार्रवाई  

मुख्य कारखाना निरीक्षक अरुण कुमार मिश्रा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप की जांच के बाद कमेटी के द्वारा श्रम विभाग को रिपोर्ट दे दी गयी है. इस रिपोर्ट में मुख्य कारखाना निरीक्षक अरुण कुमार मिश्रा के भी बयान दर्ज हैं. इसके बावजूद मुख्य करखाना निरीक्षक पर सरकार के द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही है. जिससे मामले को दबाने का संदेह पैदा हो रहा है.

क्या कहते हैं श्रम आयुक्त रजीव अरुण एक्का

मुख्य करखाना निरीक्षक पर लगे भ्रष्टाचार के संबंध में श्रम आयुक्त रजीव अरुण एक्का कहते हैं, मुख्य कारखाना निरीक्षक अरुण कुमार मिश्रा के पर लगे भ्रष्टचार के आरोप पर जांच कमेटी की रिपोर्ट मिल गयी है. जांच पूरी कर जल्द ही विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी.

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