
Ranchi: बिहार में आतंक की साजिश का खुलासा होने के बाद रोज नये-नये खुलासे हो रहे हैं. खुफिया विभाग के अनुसार बिहार के सभी मदरसों, पीएफआई के ठिकानों, आतंकी साजिशों में शामिल लोगों पर नकेल कसने के लिये साजिश रचने वालों के ठिकानों की पहचान की जा रही है. खुफिया विभाग की मानें तो छापेमारी का ये दायरा बिहार ही नहीं, झारखंड तक बढ़ चुका है. पुलिस सूत्रों की मानें तो बिहार से आतंक के तार झारखंड तक जुड़े हैं. कुछ ऐसी जानकारियां मिली है जिसमें यह बात स्पष्ट होता है कि आतंकी संगठन बिहार और झारखंड में मौजूद अपने स्लीपर सेल के जरिए बड़ी घटना को अंजाम देने के फिराक में है. वहीं पटना पुलिस को अतहर परवेज और अरमान मलिक से पूछताछ में जानकारी मिली है कि आगामी 24 जुलाई को पटना में पीएफआई का कार्यक्रम होने वाला था. इस बड़े कार्यक्रम में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के करीब एक हजार लोग शामिल होने के लिये पटना पहुंचने वाले थे. बताया जाता है कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोगों को फोन किया जा रहा था. अतहर परवेज और अरमान मलिक को फुलवारी शरीफ से भारत को इस्लामिक देश बनाने के लिए काम करने और PFI के दफ्तर में आतंकी ट्रेनिंग कैंप चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. जांच में यह भी जानकारी पुलिस को मिली है पीएफआई को दोहा की एक संस्था ‘रास लाफेल’ से भी फंडिग की जा रही थी. फंडिंग के नाम पर खाते में आये 90 लाख रुपए की जांच ईडी कर रही है.
आतंकी गतिविधि में पकड़ा गया था रिटायर्ड दारोगा
आतंकी गतिविधि में शामिल होने के आरोप में पटना पुलिस के हत्थे चढ़े दरोगा मो जलालुद्दीन खां गिरिडीह जिले से पिछले साल सेवानिवृत हुआ था. आरोपी दरोगा पीएफआई और एसडीपीआई का सक्रिय सदस्य माना जाता है. वह पीएफआई एसडीपीआई के बैठकों में भाग लेता था. पटना पुलिस आरोपी के घर से पीएफआई का झंडा, पंपलेट, बुकलेट और कुछ गुप्त दस्तावेज बरामद किये थे. सिमी के पुराने सदस्यों को जोड़ कर बना रहे थे गुप्त संगठन पूछताछ में इसने खुलासा किया है कि पीएफआई से सिमी के पूर्व सदस्यों को जोड़ा जा रहा है. इसके बाद इन्हें जोड़कर एक गुप्त संगठन तैयार किया जा रहा है. इस गुप्त संगठन को एक बड़ा टारगेट दिया गया है.




