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झारखंडः तो क्या तमाम व्यवस्था डिरेल हो गयी है मुख्यमंत्री जी

बिजली, पानी, कचरा, ट्रैफिक, कहीं भी नहीं दिखती कोई व्यवस्था

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Surjit Singh

बिजली : रांची (जहां सरकार बैठती है) में 12 से 14 घंटे ही बिजली मिल पा रही है. गढ़वा में सिर्फ दो-तीन घंटे. सीएम रघुवर दास के तमाम दावे और घोषणाएं फेल हुई. बिजली को लेकर एमडी राहुल पुरवार विभिन्न समूहों के निशाने पर हैं.

पानी: घरों तक पानी पहुंचाने में सरकार नाकाम रही.

कचरा: राजधानी में कचरा का उठाव नहीं हो रहा. हो भी रहा है तो बहुत कम. कई मुहल्लों के लोग बदबू से परेशान हैं.

ट्रैफिक: रांची, धनबाद, हजारीबाग, पलामू, दुमका, देवघर, किसी भी जिले के शहर के किसी भी मुख्य सड़क पर चले जायें, जाम ही जाम.

और यह भी: …लोकसभा चुनाव के दौरान कांके के सुकरहुटू गांव में जब सीएम प्रचार करने पहुंचे, तब ग्रामीणों ने सीएम का विरोध किया. सड़क-नाली निर्माण की मांग की. सीएम ने पहले गांव में और फिर रांची में आकर कहा कि एक माह के भीतर सड़क-नाला बन जायेगा. अफसरों ने मुख्यमंत्री का वादा पुरा नहीं किया. अब गांव वाले सवाल कर रहे हैं कि सीएम की बात पर भी भरोसा नहीं रहा, तो क्या करें.

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ये हालात क्या बता रहे हैं. क्या झारखंड में सिस्टम ट्रैक से उतर गया है. जिसे सिस्टम का डिरेल होना कहते हैं. क्या बहुमत वाली सरकार के साढ़े चार साल का कार्यकाल गुजरने के बाद भी सरकार द्वारा अक्सर दिये जाने वाला यह तर्क कि 14 साल में कुछ भी नहीं हुआ, स्वीकार करने योग्य हैं. शायद नहीं. क्योंकि साढ़े चार साल पहले जो व्यवस्था थी, आज की स्थिति उससे बेहतर नहीं हो पायी है.

सोशल मीडिया पर लगातार सरकार के खिलाफ बातें आ रही हैं. 11 जून को सरकार के मंत्री सरयू राय ने बिजली की खराब स्थिति पर एक ट्विट किया है. उन्होंने लिखा है : झारखंड में बिजली का शर्मनाक संकट विद्युत वितरण मुख्यालय में है. इसे ठीक करना क्षेत्रीय अधिकारियों के बूते का नहीं है. सवाल है कि शहरों और गांवों में बिजली कटी रहती है पर इनका लोड डिस्पैच सेंटर दिन में चार बार बताता है कि कहीं भी लोड शेडिंग यानी पावर कट नहीं है.

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सरयू राय ने 12 जून को भी एक ट्विट किया. जिसमें उन्होंने लिखा : बिजली वितरण मुख्यालय का भ्रष्टाचार और बिजली आधारित उद्योगों की बिजली चोरी राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा और बिजली संकट का सबसे बड़ा कारण है. इनपर अंकुश लगे और घरेलू लाइनों से उद्योगों का कनेक्शन अलग कर दिया जाय तो बिजली की घरेलू आपूर्ति तुरंत सुधर जायेगी.

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सरयू राय के अलावा झारखंड की बिजली व्यवस्था पर रांची के जानेमाने व्यवसायी आरपी शाही ने भी 12 जून को ट्विट किया था. उन्होंने लिखा था :  जब सत्ता के मद में अंधे हो जाएँ,तब आईने में अपना चेहरा भी सृष्टि के रचयिता जैसा ही दिखने लगता है,दरबारी झूठी प्रशंसा कर अपना स्वार्थ सिद्ध करते रहते हैं और झाड़ पर चढ़ाते हैं। यह तो अपने ऊपर है कि अंदर झांककर सुधार किया जाये। जब आलोचना ही गाली लगे तो सुधार कैसे?

12 जून को सीएम रघुवर दास का बयान अखबारों में छपा है. हिन्दी दैनिक प्रभात खबर ने लिखा है : रांची में 31 जुलाई तक जीरो कट हो, नहीं तो कार्रवाई. इससे पहले भी वह इस तरह की बातें कह चुके हैं. पर, अफसरों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

ऐसा क्यों है. कोई भी सीएम यह नहीं चाहेगा कि उसके राज्य में बिजली की समस्या हो. लोगों को पीने का पानी ना मिले. घरों से कचरा ना उठे.  ट्रैफिक जाम रहे. रघुवर दास भी ऐसा नहीं चाहते. वह भी चाहते ही होंगे कि सारी व्यवस्था पटरी पर रहे. डिरेल ना हो.

फिर झारखंड में यह सब कैसे चल रहा है. क्या अफसरों पर सरकार का अंकुश नहीं रहा.  क्या चिन्हित अफसरों को पावरफुल बनाने के दौर में साढ़े चार साल बीतते-बीतते ब्रांडेड अफसर, सरकार पर हावी हो गये हैं. जो सीएम की कही बातों को भी पूरा करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते. या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब इसे सुधारा ही नहीं जा सकता.  जो भी हो वर्तमान हालात मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा दोनों के लिये बुरे संकेत ही हैं.

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