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देश का सबसे कमजोर प्रदूषण नियंत्रण पर्षद है झारखंड का : सरयू राय

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  • 12 जून के बाद राज्य भर में वायु प्रदूषण के खिलाफ शुरू की जायेगी मुहिम
  • युगांतर भारती और दामोदर क्षेत्र विकास ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी का आयोजन
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Ranchi: राज्य के सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सरयू राय ने कहा है कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देश का सबसे कमजोर प्रदूषण बोर्ड है. इसका कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष एवं सदस्य सचिव नहीं है. बुधवार को युगांतर भारती नेचर फाउंडेशन और दामोदर क्षेत्र विकास ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित एक संगोष्ठी में मंत्री श्री राय में ये बातें कहीं.

उन्होंने कहा कि वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों को प्रदूषण बोर्ड का प्रभार दे दिया गया. दोनों पद एक-दूसरे के विपरीत प्रकृति के हैं. प्रदूषण बोर्ड की प्रयोगशाला काम नहीं करती. प्रदूषण बोर्ड ने टाटा कंपनी के साथ समझौता किया है, जिसके सहयोग से प्रदूषण नापने की मशीन लगायी जायेगी. जब सरकार के पास पैसा है, तो प्रदूषण बोर्ड प्रदूषक कंपनियों के साथ समझौता क्यों कर रहा है, यह भी विचार का विषय है.

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गंगा दशहरा में तय की जायेगी रूपरेखा

श्री राय ने कहा कि जल्द ही राज्य भर में वायु प्रदूषण के खिलाफ मुहिम शुरू की जायेगी. इसी क्रम में 12 जून को गंगा दशहरा कार्यक्रम में मुहिम की रूप-रेखा तय की जायेगी. उन्होंने कहा कि आज दुनिया में सबसे अधिक चर्चा वायु प्रदूषण को लेकर हो रही है. केंद्र सरकार ने भी नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम शुरू किया है, जिसके तहत राज्यों को वायु प्रदूषण की रोकथाम के उपायों के लिए आर्थिक मदद दी जा रही है.

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प्रदूषण मापने का यंत्र नहीं

उन्होंने कहा कि झारखंड में अब तक वायु प्रदूषण के नियंत्रण की दिशा में कोई काम नहीं हुआ है. धनबाद का नाम वायु प्रदूषण के क्षेत्र में आता है. जमशेदपुर में टाटा कंपनी द्वारा एक प्रदूषण मापक यंत्र लगाया गया है, इसलिए वहां का प्रदूषण का स्तर रिकॉर्ड हो जाता है, जबकि खलारी, पिपरवार, डकरा जैसे कोलियरी इलाकों और राइस मिल तथा स्पंज आयरन प्लांटवाले इलाकों में इस तरह के वायु गुणवत्ता की माप की कोई व्यवस्था नहीं है.

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लोगों में बढ़ी है जागरुकता

उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण का स्तर झारखंड में काफी अधिक है. वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए पर्यावरण कार्यकर्ताओं को सरकार पर दबाव डालना होगा. दामोदर के संरक्षण की चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि लगातार प्रयासों से दामोदर में औद्योगिक प्रदूषण पर काबू पा लिया गया है. लोगों में जागरुकता बढ़ी है, लेकिन अब भी शहरों और कॉलोनियों से गंदे जल और मल की निकासी नदियों में की जा रही है.

मंत्री ने कहा कि लोगों को जागरूक होकर जगह-जगह समितियां बना कर, कार्य योजना बना कर काम करने की जरूरत है, तभी दामोदर की तरह स्वर्णरेखा और वायु प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है. बुधवार  के कार्यक्रम में डॉक्टर सूर्यमणि सिंह, मनोज सिंह, अंशु शरण, आशीष शीतल, समीर सिंह, गोविंद मेवाड़, कमल भगत,  हरेन ठाकुर, रामानुज, डॉ ज्योति प्रकाश, तपेश्वर केसरी, राकेश कुमार सिंह, प्रवीण सिंह आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.

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