Opinion

आर्थिक सलाहकार रह चुके अरविंद सुब्रमण्यन को  लंदन जाकर होश आया

Girish Malviya

सितंबर 2014 से जून 2018 तक नरेंद्र मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके अरविंद सुब्रमण्यन को  लंदन जाकर होश आया है, अब वह बकायदा एक रिसर्च पेपर पब्लिश कर बता रहे हैं कि साल 2011-12 और 2016-17 के दौरान देश की तरक्की की रफ्तार सिर्फ साढ़े चार फीसदी थी. इस दौरान आधिकारिक आंकड़ों में विकास दर 7 फीसदी के आसपास बताई गई थी. यानी जीडीपी (GDP) के आंकड़े बढ़ा-चढ़ा कर पेश किए गए थे…

यह रिसर्च पेपर अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रकाशित हुआ है पर वह भूल रहे हैं कि मोदी जी के राज में हार्वर्ड नहीं हार्डवर्क की महत्ता है, अब अरविंद सुब्रमण्यन जो चार साल देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे हैं, वह देश के आर्थिक विकास के लिए बनाई जाने वाली नीतियों पर भी सवाल उठा रहे हैं. उनके मुताबिक, ‘भारतीय नीतियों की गाड़ी एक ऐसे स्पीडोमीटर के साथ आगे बढ़ाई जा रही है, जो न सिर्फ गलत है बल्कि टूटा हुआ है’…  कोई उनसे पूछे कि चार सालो में वह हिंदुस्तान में क्या झक मार रहे थे जो विदेश पहुंचते ही वो ब्रह्म ज्ञान को उपलब्ध हो गए…

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जब वह यहाँ बैठकर जीडीपी की 7 से 8 प्रतिशत बताए जाने वाले कागजों पर साइन कर रहे थे तो भारतीय मूल के एक जानेमाने अर्थशास्त्री मेर्टन कॉलेज, ऑक्सफोर्ड के एमरिट्स फेलो और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के रीडर एमरिट्स ने कह दिया था …..

कि ” मैं एक बात कहूंगा, (भारत का राष्ट्रीय खाता) एक मात्र ऐसी जगह है, जहां आप सात फीसद वृद्धि देख सकते हैं. आपको यह कहीं और नजर नहीं आ सकती है. यदि आप निर्यात और आयात देखते हैं तो वे बिल्कुल सपाट हैं. ये कम हुये हैं या बराबर रहे अथवा बहुत धीमी वृद्धि हुई. यदि आप संगठित क्षेत्र में रोजगार पर नजर डालें तो वहां ठहराव है. उन्होंने कहा कि यदि आप औद्योगिक उत्पादन पर नजर डालें तो यह बहुत धीमी रफ्तार से बढ़ रहा है. यदि आप बैंक क्रेडिट पर नजर दौड़ाते हैं तो यह बहुत धीमी वृद्धि कर रहा है’…पूरी दुनिया के अर्थशास्त्री आपके झूठे आंकड़ों पर सवाल कर रहे थे, तब यहां बैठे-बैठे आप उनका बचाव कर रहे थे…

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अब जब कल अरविंद सुब्रमण्यम का बयान सामने आया है, तो सरकार ने बचाव में जो दलील दी है वह और भी हास्यास्पद है सरकार की तरफ से बयान जारी कर कहा गया कि देश के सकल आर्थिक वृद्धि दर अनुमान की गणना में उचित तरीके अपनाए गए. सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि देश के आर्थिक विकास का अनुमान ‘स्वीकृत प्रक्रियाओं, कार्यप्रणाली और उपलब्ध आंकड़ों’ पर आधारित है.

आपके द्वारा नियुक्त किया गया मुख्य आर्थिक सलाहकार ही जब यह बात नहीं मान रहा है तो इसका मतलब है कि आपको समझ ही नहीं है कि किसे आर्थिक सलाहकार बनाना चाहिए….अब से जो भी व्यक्ति ऐसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन हों, उसके लिए ऐसी शपथ की व्यवस्था कीजिए कि जो भी झूठ सरकार बोलेगी या बुलवाएगी उसकी रक्षा वो पूरे जीवनभर करेगा, तभी कुछ हो सकता है, अन्यथा बार-बार हमें पूरी दुनिया के सामने शर्मिंदा होना पड़ेगा…

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(लेखक आर्थिक मामलों के सलाहकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

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