
Jamshedpur : जया एकादशी 12 फरवरी यानि माघ मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को पड़ रही है. जबकि विजया एकादशी 27 फरवरी को है. जया एकादशी करने वाले मनुष्यों को पितृदोष, गौ हत्या और ब्रह्म हत्या जैसे भयंकर से भयंकर पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही पिशाच, भूत और प्रेत योनि से भी मुक्ति मिल जाती है। इतना ही नहीं हजार वर्षों तक स्वर्ग की प्राप्ति भी होती है. एकादशी व्रत करने का महत्व और व्रत करने से होने वाले फायदे की बातों का विस्तार से पद्म पुराण में वर्णन किया गया है.
जया एकादशी के दिन चंद्रमा मिथुन राशि में और सूर्य कुंभ राशि में है. माघ मास, शुक्ल पक्ष के दिन पड़ने वाली जया एकादशी नक्षत्र मृगशिरा, करण बिष्ट, योग विष्काम्भ सुबह 8.41 बजे इसके बाद प्रीति हो जायेगा. दिन शनिवार है. इस दिन ऋतु शिशिर है. सूर्य उत्तरायण दिशा में रहेंगे. जया एकादशी के दिन ग्रहों की स्थिति सामान्य रहेगी.
इस मुहूर्त में करें पूजन
ज्योतिषाचार्य पंडित रमाशंकर तिवारी बताते हैं कि जया एकादशी के दिन अभिजीत मुहूर्त दिन के 11.36 बजे से लेकर 12.26 बजे तक रहेगा. काशी पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त दोपहर 2.27 बजे से लेकर 3.11 बजे तक विजया मुहूर्त के रूप में है. उसी प्रकार गोधूलि मुहूर्त शाम 5.58 बजे से लेकर 6.20 बजे तक, संध्या मुहूर्त 6.09 बजे से लेकर 7.28 बजे तक, मध्य रात्रि का निशिता मुहूर्त 12.09 बजे से लेकर 01.01 बजे तक, ब्रह्मा 5.18 बजे से लेकर 6.10 बजे तक और प्रातः मुहूर्त 05.44 बजे से लेकर 07.01 बजे तक है. इस दौरान जातक पूजा अर्चना कर सकते हैं.
ये है जया एकादशी व्रत करने का विधान
जया एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की पूजा करने का विधान है. जो व्यक्ति जया एकादशी व्रत करना चाहता है उसे व्रत के एक दिन पहले यानी दशमी के दिन एक बार ही शुद्ध शाकाहारी भोजन करना चाहिए.
एकादशी के दिन व्रत का संकल्प लेकर धूप, मौसमी फल, घी एवं पंचामृत आदि से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करनी चाहिए. जया एकादशी की रात सोना नहीं चाहिए बल्कि भगवान का भजन कीर्तन एवं सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए. रात्रि जागरण करना शुभ और फलदाई होता है. द्वादशी अर्थात पारण के दिन भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करने का विधान है. पूजन के बाद भगवान को भोग लगाकर लोगों के बीच प्रसाद वितरण करना चाहिए. इसके बाद ब्राह्मण को भोजन करा क्षमता के अनुसार दान देना चाहिए. अंत में स्वयं भोजन कर उपवास खोलना चाहिए.
ये है पूजन सामग्री की सूची
पूजा सामग्री के रूप में भगवान श्रीहरि के स्नान कराने के लिए तांबे और पीतल का लोटा या पात्र, जल का कलश, दूध, भगवान श्रीहरि को पहनाने के लिए वस्त्र और आभूषण, चावल, कुमकुम, दीपक, जनेऊ, तिल, फूल, अष्टगंध, तुलसी दल, प्रसाद के लिए गेहूं के आटे की पंजीरी, फल, धूप, मिठाई, नारियल, मधु, गंगा जल, सूखे मेवे, गुड़ और पान के पत्ते ब्राह्मणों को दक्षिणा देने के लिए रुपये रख लें.
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