JharkhandKodermaLead News

रेलवे के जीएम का शाही निरीक्षण बंद, अंग्रेजों के समय से चली आ रही थी परंपरा

न आवभगत होगी ना ही स्पेशल ट्रेन चलेगी

Koderma: रेलवे के महाप्रबंधक के लिए चली आ रही अंग्रेजों के जमाने की परंपरा पर 2023 से ब्रेक लगा दिया गया है. महाप्रबंधकों का राजशाही तरीके से होने वाला प्रतिवर्ष होने वाले निरीक्षणों को रेल मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है. देश भर के 17 जोन जिसमे पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर भी शामिल है के जीएम को अब किसी भी तरह का निरीक्षण बिना तामझाम के करने का निर्देश जारी किया गया है. रेलवे बोर्ड के निर्देशक कुलदीप सिंह ने अपने आदेश में कहा कि जीएम का न स्पेशल ट्रेन मिलेगी और न ही आवभगत में 100 से अधिक रेलकर्मियों की फौज रहेगी. निर्देशक कुलदीप सिंह के आदेश के तहत आरडीएमओ नेशनल ऑफ इंडियन रेलवे (एनएआईआर) समेत अन्य संस्थाओं के जीएम पर भी लागु होगा. भारतीय रेल में यह प्रथा अंग्रेजों के शासन काल से थी ओर इस तरह के निरीक्षण पर निकलते हैं. उनके साथ सभी विभागोे के वरीय अधिकारी के अलावा संबंधित रेल मंडल के डीआएम भी रहते है. जानकारी के अनुसार प्रत्येक जोन के महाप्रबंधक को अपने आने वाले मंडल का निरीक्षण दो से तीन साल में एक बार करना होता है. इसका मिनट टू मिनट प्रोग्राम भी बनता था और इसकी तैयारी तीन से चार माह पहले शुरू हो जाती थी. जिस भी स्टेशन का जीएम निरीक्षण करते हैं उस स्टेशन का रंग रोगन के साथ-साथ कई सुविधा भी उपलब्ध करायी जाती थी. इधर हाल में पूर्व मध्य रेलवे के जीएम का कोडरमा हजारीबाग रेलखंड व धनबाद रेलमंडल का निरीक्षण किया गया जो कि बिना तामझाम का रहा. बताते चलें कि पहले ही मंडल के रेल प्रबंधकों (डीआरएम) का निरीक्षण कार्यक्रम भी स्पेशल ट्रेन के जरिये होता है था. इसमें भी मंडल के सभी रेल के पदाधिकारी रहते थे. लेकिन अब स्पेशनल ट्रेन के वजह एक बोगी का परख स्पेशल से ही निरीक्षण कार्यक्रम होता है. जीएम का वार्षिक निरीक्षण के दौरान यह वयवस्था भी रहती थी कि जीएम जिस भी बोगी में रहते थे और उतरने के क्रम में उनके बोगी के दोनों हेंडल को कई बार साफ किया जाता था. उतरने के क्रम में प्लेटफार्म पर पौछना व कालीन बिछायी जाती थी जो कि बंद कर दी गई है. रेलवे ने जीएम डीआरएम के निवास स्थलों पर रसोईयों और नौकरों की सुविधा भी कम कर दिया है और उनकी राजशाही पर भी ब्रेक लगाया है. इस मानसिकता को बदलने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहल की थी. उल्लेखनीय हो कि नरेन्द्र मोदी ने पहले केन्द्रीय मंत्रियों के वाहनों से लाल बत्ती हटाने का भी कार्य कर चुके हैं और देश भर में लाल बत्ती वाले वाहन सडकों पर अब नहीं दिखती है.

इसे भी पढ़ें: JMM का दावा, विधानसभा के बजट सत्र से पहले नियोजन नीति लाएगी सरकार

Related Articles

Back to top button