Opinion

नोटबंदी-जीएसटी से कुछ नहीं बिगड़ा तो फिर पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त टैक्स क्यों ?

Girish Malviya

जीएसटी और नोटबंदी ने इस देश को बर्बाद कर दिया है. क्या आप यकीन करेंगे कि मध्य प्रदेश में 5 जुलाई से  पेट्रोल-डीजल की कीमत में लगभग साढ़े चार रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गयी है. केंद्र की मोदी सरकार ने 1 रुपये सेस और 1 रुपये एक्साइज ड्यूटी बढ़ायी तो मध्य प्रदेश सरकार ने भी 2 रुपये की एडिशनल ड्यूटी लगा दी.

5 जुलाई की सुबह जब बजट में पेट्रोल डीजल पर टैक्स लगाने की खबर आयी, तो हमने यही सोचा था कि 1 रुपये कर बढ़ा है कोई बात नहीं. थोड़ी देर बाद पता चला कि 1 नहीं 2 रुपये कर बढ़ा है. शाम तक पता चला कि 2 भी नहीं दरअसल ढाई रुपये बढ़ जायेंगे. हमने फिर भी दिल कड़ा कर लिया, लेकिन सुबह पता चला कि हमारे यहां तो कीमत प्रति लीटर साढ़े चार रुपये बढ़ गयी है. यह बहुत बड़ा झटका है.

इसे भी पढ़ें – रांचीः पिटायी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे एक समुदाय के लोगों ने कई को पीटा, चाकू मार एक को किया घायल

मध्यप्रदेश सरकार का कहना है कि मोदी सरकार ने केंद्रीय करों में मध्यप्रदेश के हिस्से में करीब 2677 करोड़ रुपये कम दिया है. मध्यप्रदेश सरकार झूठ नहीं बोल रही है. लगातार अपनी वॉल पर लिख रहा हूं कि जीएसटी ने राज्यों के लिए टैक्स लगाने के विकल्प सीमित कर दिये हैं. जीएसटी लागू होने के बाद राज्य का राजस्व घाटा बढ़ कर 20 प्रतिशत पर पहुंच गया है.

केंद्र की भी हालत बहुत अच्छी नहीं है. दोषपूर्ण आर्थिक नीतियों के कारण पिछले एक साल में डेढ़ लाख करोड़ रुपये का राजस्व का घाटा हुआ है और बड़ी तादाद में जीएसटी रिटर्न नहीं भरे जा रहे जिसकी वजह से राजस्व का लोप हो रहा है.

सदन में झूठी रिपोर्ट पेश की जा रही है. जनता को भ्रम में रखा जा रहा है. सरकार ने बजट 2018-19 में अनुमान लगाया था कि सरकार को पूरे वित्त वर्ष में 6.24 लाख करोड़ रुपये का घाटा होगा, लेकिन नवबंर 2018 में ही यह 7.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में आंकड़ों की बाजीगरी दिखाकर इसे एडजस्ट किया गया. वित्तमंत्री अब बोल रही हैं कि हमने जितना अनुमान लगाया था, उतना ही घाटा हुआ है. यदि सब कुछ आपकी योजना के मुताबिक ही चल रहा है, तो पेट्रोल डीजल पर यह अतिरिक्त कर क्यों लगाया जा रहा है?

राज्यों की हालत बद से बदतर होती जा रही है GST लागू होने के बाद से राज्यों की आय में 14 से 37 फीसदी की कमी हुई है. GST लागू होने के बाद मध्य प्रदेश पंजाब, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, गोवा, बिहार, गुजरात और दिल्ली की आय में कमी हुई है. अप्रैल, 2018 से नवंबर, 2018 के बीच इन राज्यों की आय में 14-37 प्रतिशत तक की कमी देखी गयी है, जबकि जीएसटी लागू होने के बाद केवल आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर के पांच राज्य मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, सिक्किम और नागालैंड की आय बढ़ी है.

इसे भी पढ़ें – कर्नाटक : कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरने का खतरा, 11 विधायक इस्तीफा देने पहुंचे

वैट व्यवस्था के तहत कर्नाटक औसतन 10 से 12 प्रतिशत राजस्व वृद्धि हासिल कर रहा था, लेकिन जीएसटी के बाद राजस्व घाटा अनुमानित वृद्धि के समक्ष 20 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया.

फिलहाल राज्य जीएसटी लागू होने के बाद पहले पांच साल के लिए क्षतिपूर्ति पाने के हकदार हैं. जीएसटी जुलाई 2017 में लागू हुआ. इस लिहाज से राजस्व क्षतिपूर्ति व्यवस्था 2022 तक लागू रहेगी. इस व्यवस्था में राज्यों के 2015-16 के राजस्व संग्रह को आधार माना गया है तथा सरकार ने हर वर्ष उनका मानक राजस्व तय करने के लिए 14 प्रतिशत सालाना राजस्व वृद्धि का सूत्र अपनाया है. सालाना 14 प्रतिशत जोड़ने के बाद इस आंकड़े से जितना कम संग्रह होगा उसकी भरपायी केंद्र सरकार करेगी.

यह क्षतिपूर्ति की रकम भी केंद्र सरकार ठीक से दे नहीं पा रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2022 के बाद क्या होगा, जब राजस्व घाटे की यह क्षतिपूर्ति की रकम भी उसे मिलनी बन्द हो जायेगी? उसके पास बस अपनी आय बढ़ाने के लिए पेट्रोल डीजल, पानी, टोल, स्टाम्प ड्यूटी जैसी चीजें रह जायेंगी. तब इनपर और भी ज्यादा कर लगाये जायेंगे और हमारे पास अपना सिर पीटने के अलावा कोई रास्ता नहीं होगा.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं.)

इसे भी पढ़ें – देश में आयकर दाताओं की संख्या 6.84 करोड़, एक करोड़ सालाना आय दिखाने वाले महज 81 हजार !

Related Articles

Back to top button