
Ranchi: हेमंत सरकार के श्वेत पत्र में ऊर्जा, उद्योग और कृषि विभाग की कई योजनाओं और काम करने के तरीकों से पर सवाल उठाये हैं. उन्होंने श्वेत पत्र में कई तथ्यों का हवाला दिया है, जिससे सरकार साबित करना चाहती है कि रघुवर सरकार की योजनाओं से सरकारी खजाने का बंटाधार हुआ.
हाल ऊर्जा विभाग का
- केंद्र की उदय योजना के तहत जेबीवीएनएल को 5534 करोड़ का लोन भी दिया गया. इसका उद्देश्य जेबीवीएनएल को अगले तीन साल के लिए अपने राजस्व संग्रहण से ही क्रय की गयी बिजली का भुगतान करने की उम्मीद की गयी. सरकार ने ऊर्जा निगमों के पिछले पांच सालों में स्थिति बद से बदतर होने की बात की.
- जेबीवीएनएल के लगातार बढ़ते बोझ से स्थिति ये है कि डीवीसी में 4500 करोड़, टीवीएनएल में 4400 करोड़ और अन्य संस्थाओं को मिला कर दस हजार करोड़ का बकाया है.
- जेबीवीएनएल की योजनाओं से भविष्य में 7600 करोड़ और संचरण की से भविष्य में 3700 करोड़ या उससे अधिक नुकसान होने की संभावना जतायी गयी.
- जेबीवीएनएल और संचरण के योजनाओं और बकाये का दायित्व जोड़ा जाये, तो कुल 21 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक होगा.
- बिना स्टडी किये योजनाओं की स्वीकृति और बिजली चोरी के लिए कोई उत्तरदायित्व स्थापित नहीं किया जाना बताया गया. साथ ही चोरी के लिए दोषी पदाधिकारियों और कर्मियों को चिन्हित कर कार्रवाई भी नहीं की गयी.
- पिछले पांच सालों में सरकार ने 30 हजार करोड़ रुपये की राशि जेबीवीएनएल और संचरण को दी. सात सौ करोड़ का लोन भी दिया गया. इन कंपिनयों के रिटायर्ड कर्मियों के पेंशन का बोझ भी सरकार पर है. जिससे हर महीने 30 करोड़ लगते हैं.
- बिजली कंपनियों की कार्यशैली को राजकोष का कुप्रभाव बताया गया.
कृषि विभाग
- राज्य में किसानों के लिए कई योजनाएं चल रही थीं. मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना में कृषि उत्पादकता में कोई स्पष्ट वृद्धि दृष्टिगोचर नहीं हुई. योजना को राज्य सरकार पर अधिक राजस्व व्यय का बोझ बताया गया.
इसे भी पढ़ें – #NirbhayaCase: दोषी पवन गुप्ता की दया याचिका राष्ट्रपति ने ठुकरायी, कल होगी फांसी?
खान भूतत्व और उद्योग
- ज्यादतर पीएसयू सफेद हाथी सिद्ध हुए. इस दौरान सहज, जेएसएमडीसी, झारक्राफ्ट, एफडीसी आदि में वन उत्पाद से लोगों को नहीं जोड़े जाने की बात की गयी. साथ ही लघु कुटीर उद्यम विकास बोर्ड, माटी कला बोर्ड जैसे निगमों को स्थापित करने के सार्थक प्रयास नहीं किये गये.
- राज्य को सालाना छह हजार करोड़ वार्षिक राजस्व खनन से प्राप्त होता है. लेकिन यह काफी कम है. राज्य का 70 प्रतिशत राजस्व कोयला से प्राप्त होता है.
- सीसीएल, बीसीसीएल और ईसीएल ने लगभग 80 लाख टन कोयले का उत्पादन किया. लेकिन सरकार को उचित रॉयल्टी नहीं मिली. सीसीएल और बीसीसीएल के पास करीब 2000 करोड़ का बकाया है. सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार के आदेश में सीसीएल, बीसीसीएल और ईसीएल पर लगभग 32 करोड़ बकाया है. जो वसूला नहीं गया है.
- सेल के पास तीन हजार करोड़ खनन पट्टा रिन्यूअल का बकाया है. कॉमन काउज के तहत इस कंपनी के पास 1200 करोड़ लंबित है.
- कोल बियरिंग एरिया एक्ट के तहत सीसीएल, बीसीसीएल और ईसीएल के पास 33 हजार करोड़ बकाया है.
इसे भी पढ़ें – हेमंत सोरेन ने वापस लिया रघुवर दास पर दर्ज एससी-एसटी केस, बोले बदले की भावना से सरकार नहीं करेगी काम



