
- सचिवालय सहायक कैडर के नहीं रहने पर भी बने हुए हैं चहेते
Ranchi: राज्य मंत्रालय में महिलाओं और बच्चों से जुड़े महकमे को एक सेवानिवृत्त अधिकारी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चला रहे हैं. ये अधिकारी सचिवालय सहायक और स्टेनोग्राफर कैडर के भी नहीं हैं. दूसरा कैडर होने के बाद भी इनकी पकड़ महिला और बाल विकास विभाग में काफी अधिक है. ये मंत्री से लेकर संतरी सबके चहेते हैं. विभागीय प्रमुख के पास कोई भी संचिका खुद लेकर जाते हैं. विभागीय प्रमुख भी इस महकमे के प्रभार में हैं. अगल कोई इन पर अंगुली उठाता है, तो उसे तरह-तरह का श्राप भी देते हैं. कहते हैं सारे बाल-बच्चे अपंग हो जायेंगे, विकलांग हो जायेंगे.
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पहले कोल्हान प्रमंडल में थे
ये अधिकारी पहले कोल्हान प्रमंडल में थे. उस समय वहां की महिला और बाल विकास पदाधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर अन्य काम स्वंय करते रहे हैं. अब अपने विभाग को अपने मनचाहे अंदाज में चला रहे हैं. इनके बैठने जगह विभागीय प्रमुख के चैंबर के सामने है. ये और विभाग के ही एक अन्य अधिकारी पिछले पांच वर्षों से एक दूसरे के विपरीत बैठ कर काम करते रहे हैं. विभाग में राज्य की सबसे बड़ी पोषाहार योजना संचालित की जाती है. इसके लिए 38425 आंगनबाड़ी केंद्रों का सहारा भी लिया जा रहा है. विभाग की तरफ से रेडी-टू-ईट कार्यक्रम भी चलाया जा रहा रहा है. इसके लिए निविदा भी प्रत्येक वर्ष निकाली जाती है. कंपनियों की चयन प्रक्रिया में इनकी भूमिका अब तक काफी अधिक रही है.
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दिव्यांगों को आवंटित होनेवाली राशि को लेकर संस्थानों का चयन भी करते हैं
इसके अलावा दिव्यांग जनों के लिए आवंटित होनेवाली राशि को लेकर भी ये संस्थानों का चयन अपने स्तर से करते हैं. यहां यह बताते चलें कि स्वंयसेवी संस्थानों के चयन में दिव्यांग जनों का आधार कार्ड, उनकी दिव्यांग्ता का प्रतिशत और अन्य मूलभुत सुविधाओं की जांच जरूरी होती है. पर इन महाशय का कहना है कि संबंधित जिलों के उपायुक्तों की रिपोर्ट पर ही सीधे अनुदान का वितरण कर दिया जाता है.
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