
Ranchi: कोई भी विभाग सिस्टम से काम करता है और पद की हैरारकी भी होती है. जिसके तहत सारे लोगों की जिम्मेवारी तय होती है. लेकिन राज्य का वन विभाग एक ऐसा विभाग है जहां पद की हैरारकी का कोई मतलब नहीं रह जाता है. यहां किसी भी व्यक्ति को अचानक कोई भी जिम्मेदार पद पर बैठा दिया जाता है. इसके कई उदाहरण भी हैं. हजारीबाग के नेशनल पार्क में फॉरेस्टर ही रेंजर का पद संभाल रहा है. यही नहीं, फॉरेस्टर दो-दो रेंज के प्रभार में है. यह केवल एक ही जगह नहीं बल्कि, और भी कई रेंज है जहां फॉरेस्ट गार्ड फॉरेस्टर के चार्ज में है. ऐसी स्थिति केवल पर्याप्त कर्मचारी व पदाधिकारी के नहीं रहने की वजह से बनी हुई है. पूरे राज्य में फॉरेस्टर के 70 फीसदी से अधिक पद खाली है. जबकि, फॉरेस्ट गार्ड के 50 फीसदी से अधिक पद रिक्त है. वर्षों से बहाली नहीं होने से परेशानी हो रही है. रिटायर होने का भी सिलसिला जारी है.
रेंजर का स्वीकृत पद 1340, कार्यरत मात्र पांच
राज्य में फॉरेस्टर का 1340 पद स्वीकृत है. पद के विरूद्ध मात्र 5 फॉरेस्टर ही कार्यरत हैं. कुछ इसी तरह की स्थिति फॉरेस्ट गार्ड की भी है. वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड का कुल 3855 पद स्वीकृत है, इसके विरुद्ध 1800 कार्य कर रहे हैं.
एक रेंजर चार से अधिक रेंज के चार्ज में
जानकारी के अनुसार रेंजर की भी स्थिति काफी खराब है. एक रेंजर को चार से अधिक रेंज के प्रभार में है. किन्हीं-किन्हीं का तो डिवीजन ही अलग दे दिया गया है. अब रेंजर शंकर भगत हैं, इन्हें पूरे चाईबासा रेंज की जिम्मेवारी निभानी पड़ रही है. जबकि, हर रेंज में चार से पांच रेंजर होते हैं. रांची डिवीजन के संजय कुमार को रांची के अलावा चार रेंज का प्रभार है. वहीं, दिग्विजय सिंह को पूरे टाटा रेंज का चार्ज संभालना पड़ रहा है. सुरेंद्र सिंह को भी तीन से चार रेंज की जिम्मेवारी सौंपी गयी है. राज्य में रेंजर का 285 पद स्वीकृत है इसके विरूद्ध मात्र 45 ही कार्यरत हैं. 2025 तक मात्र पांच रेंजर ही बच जायेंगे. क्योंकि, इनमें से 40 रिटायर हो जायेंगे.
रेंजर का कार्य
एक रेंजर के जिम्मे पूरे रेंज में जंगल कटने से लेकर विकास का काम की जिम्मेवारी निभानी पड़ती है. यही नहीं, विकास कार्य में कितनी राशि खर्च करनी है या हो गयी उसका भी लेखा-जोखा रखना पड़ता है.
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