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विवादों में हज कमेटी : विधायक इरफान ने लुईस मरांडी पर लगाया पक्षपात करने का आरोप

मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कमेटी को लेकर सरकार की नीति पर खड़े किये सवाल

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Ranchi : राज्य हज कमेटी के गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद कांग्रेसी विधायक इरफान अंसारी ने कल्याण मंत्री लुईस मरांडी पर उनके विरुद्ध पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का आरोप लगाया है. साथ ही कई मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कमेटी को लेकर सरकार की नीति पर सवाल खड़े किये हैं. विधानसभा सदस्य इरफान अंसारी का कहना है कि गत दिनों जिस तरह से उन्होंने कल्याण मंत्री की सच्चाई को राज्य की जनता के सामने लाने की पहल की थी, उसी का बदला लेकर लुईस मरांडी ने हज कमिटी से सदस्यों के नाम को हटाया है, जो कि पूरी तरह से अंसवैधानिक है.

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कमिटी को भंग करने की मांग

वहीं मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री को पत्र लिख कमेटी को भंग करने की मांग की है. अल्पसंख्यक मामलों के जानकार व सामाजिक कार्यकर्ता शमीम अली और राज्य हज समिति के पूर्व प्रवक्ता खुर्शीद हसन रुमी का कहना है कि सरकार ने हज कमेटी अधिनियम 2002 को ध्यान में नहीं रख आनन-फानन में कमेटी का गठन कर दिया है. यह पूरी तरह से अंसतुलित और अंसवैधानिक है. जानकारी के अभाव में गठित इस कमेटी को रद्द कर सरकार को चाहिए कि अधिनियम के अनुरूप कमेटी का गठन करें.

पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रही कल्याण मंत्री, मॉनसून सत्र में उठाएंगे मुद्दा : इरफान अंसारी

गत वर्ष कमेटी के सदस्य रहे कांग्रेसी नेता इरफान अंसारी ने कल्याण मंत्री लुईस मरांडी की मंशा पर सवाल करते हुए न्यूज विंग संवाददाता नितेश ओझा को बताया कि वर्तमान में जो भी मुस्लिम विधायक है, उन्हें कमेटी में शामिल किया जाना जरूरी है. सबसे बड़ी बात कि पदेन सदस्य को कमेटी से बाहर हटाने की शक्ति लुईस मरांडी को नहीं है. लेकिन फिर भी उन्हें इस वर्ष सदस्य नहीं बनाया गया. सरकार को मॉनसून सत्र में घेरने की बात करते हुए कांग्रेसी नेता ने कहा कि दरअसल लुईस मरांडी के आदिवासी होने पर उन्होंने जो सवाल खड़ा किया था. उसी के विरोध में कल्याण मंत्री यह काम कर रही हैं. सरकार ने पूरी तरह से नियम को बदलने का काम किया है, जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक है. मालूम हो कि जामताड़ा में 20 जून को आयोजित एक समारोह में कांग्रेसी नेता ने कहा था कि लुईस मरांडी के डीएनए में गड़बड़ी है. ये झारखंडी नहीं हैं, ये आदिवासी नहीं है. इसपर मंत्री विधायक इरफान अंसारी को कानूनी नोटिस भेजकर मानहानि संबंधी 15 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा किया गया है.

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अधिसूचित कमिटी है असंवैधानिक, 16 सदस्यों की जगह नियुक्त हुए 15 सदस्य

  • सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हज अधिनियम 2002 का हवाला देते हुए निम्न बिंदुओं पर गठित कमेटी को गलत बताया है. उनके मुताबिक हज अधिनियम 2002 के तहत कमेटी में 16 सदस्यों की जगह सरकार ने केवल 15 सदस्यों को ही मनोनित किया है, जो कि असंतुलित व अंसवैधानिक है. इनके मुताबिक अधिसूचित कमेटी में निम्न गलतियां हैं…
  • समिति में संसद, विधानसभा, विधानपरिषद से 3 सदस्यों को मनोनयन जरुरी है. अगर विधानपरिषद नहीं है तो विधानसभा से ही दो सदस्यों को लिया जा सकता है. लेकिन गठित कमेटी में राज्यसभा से एक और विधानसभा से एक अर्थात कुल जो सदस्यों को ही लिया गया, जो कि अंसवैधानिक है.
  • मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन सदस्यों की नियुक्ति लोकल बॉडी से किया जाना है. कमेटी में ऐसे लोगों को नियुक्त किया गया, जो पार्षद नहीं है. यथा गोड्डा के एकरारूल अंसारी के वार्ड नंबर 11 का पार्षद बताकर सदस्य बनाया गया, जबकि यहां की पार्षद उषा देवी है. इसी तरह धनबाद के वार्ड नंबर तीन के पार्षद इरफान अहमद को सदस्य बनाया गया, जबकि वे पार्षद ही नहीं हैं.
  • मुस्लिम विद्वान (इस्लामिक धर्म के जानकार) कोटे से तीन सदस्यों का मनोनयन किया जाना जरुरी है, जबकि वर्तमान में डॉ गुलाम गौस, मो. मझीबर रहमान को ही कमेटी का सदस्य मनोनित किया है. साथ ही ये विद्वान हैं कि नहीं इसकी भी पुख्ता जानकारी नहीं है.
  • कमिटी में पांच मुस्लिम सदस्य को लोक प्रशासन, वित्तीय, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक कार्यकर्ता को लिया जाना जरूरी है. लेकिन सरकार ने बिना कोटा स्पष्ट किये ही सात सदस्यों को कमिटी में शामिल कर दिया.
  • राज्य वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पदेन सदस्य बनाये जाने की चर्चा अधिनियम 2002 में है. लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया है.

एक्ट के नियम अनुरूप नहीं हुआ कमिटी का गठन : आलमगीर आलम

कांग्रेसी नेता और कमिटी के सदस्य मो. आलमगीर आलम ने इस मामले पर न्यूज विंग को बताया कि एक्ट 2002 के अनुरूप नियम का पालन ना कर सरकार ने संसद और विधानसभा के केवल दो ही सदस्यों को कमेटी में स्थान दिया, जो कि पूरी तरह से गलत है. उनका कहना था कि गत वर्ष कांग्रेसी नेता इरफान अंसारी भी कमेटी के सदस्य थे. ऐसे में सरकार को चाहिए था कि इन्हें भी कमेटी में शामिल करें.

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