
NewDelhi: कुछ सालों पहले एक केस ने मीडिया, बिजनेस ग्रुप, सियासी महकमे में हलचल मचा दी थी, जब उद्योगपति नवीन जिंदल ने दिल्ली पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुभाष चंद्रा के ग्रुप के चैनल के वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा कोयला घोटाले मामले में उनसे 100 करोड़ रुपए मांगे गए.
पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दो पत्रकारों को जेल भी भेजा था. वही ग्रुप के मालिक चंद्रा को भी इस मामले में घसीटा गया था. ये मामला 2012 का था, लेकिन अब छह सालों बाद दोनों ग्रुप के बीच सुलह हो गयी है.
राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा और कांग्रेस के पूर्व लोकसभा सांसद नवीन जिंदल के बीच चल रहे कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है. इसके साथ ही नवीन सिंदल के बीजेपी में शामिल होने की अटकले तेज हो गयी हैं.
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शुक्रवार को एस्सेल समूह के सुभाष चंद्रा ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. शुक्रवार को जिंदल ने चंद्रा व उनकी टीम से मुलाकात की और शाम ट्विटर पर फोटो के साथ समझौते की पुष्टि की. इस फैसले पर की उद्योगपति नवीन जिंदल ने भी ट्वीट कर जानकारी दी है.
जी ग्रुप के सुभाष चंद्रा ने शुक्रवार को ट्वीट किया, “मुझे खुशी है कि जेएसपीएल और नवीन जिंदल ने दिल्ली पुलिस से उस एफआईआर को वापस ले लिया है जिसमें उन्होंने जी और इसके संपादकों पर वसूली का आरोप लगाया था, इसके बाद जी समूह भी जेएसपीएल और नवीन जिंदल के खिलाफ सभी शिकायतों और केस को वापस लेने पर समहत हो गया है, मैं नवीन को जिंदगी सफलता के लिए कामना करता हूं.”

इधर उद्योगपति नवीन जिंदल ने सुभाष चंद्रा के ट्वीट पर जवाब देते हुए लिखा है, “हमारे बीच गलतफहमी से पैदा हुए सभी मतभेदों को हमने दूर करने का फैसला किया है. उन सभी चीजों को पीछे छोड़ने में मुझे खुशी हो रही है. सुभाष चंद्रा जी आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद.”

समझौते के सियासी मायने
कोयला घोटाले में 100 करोड़ की घूस मांगने के मामले में 6 सालों बाद एक वर्तमान सांसद और एक पूर्व सांसद के बीच हुए समझौते के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. सियासी गलियारों में ये कयास लगाया जा रहा है कि नवीन जिंदल बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.
एक दैनिक अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय से नवीन जिंदल के भाजपा में शामिल होने के कयास लगाये जा रहे हैं. इस समझौते के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आ सकती है.
माना जा रहा है कि नवीन जिंदल कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से 2019 में बीजेपी के कैंडिडेट हो सकते हैं. नवीन जिंदल यहां से पहले भी सांसद रह चुके हैं. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक अब बीजेपी के एक बड़े नेता ने इस मामले में मध्यस्थता की है.
जिंदल-चंद्रा – क्या था मामला
बता दें कि साल 2012 में तत्कालीन सांसद नवीन जिंदल ने दिल्ली पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी और कहा था कि जी ग्रुप के संपादकों ने कोयला घोटाला मामले में उनसे 100 करोड़ रुपये मांगे थे.
पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जी ग्रुप के दो पत्रकारों को जेल भी भेज दिया था. वही जेएसपीएल के चेयरमैन नवीन जिंदल ने इस मामले में जी समूह के मालिक सुभाष चंद्रा को भी घसीटा था. जिसके बाद दोनों व्यावसायिक समूहों ने एक दूसरे पर केस किया था. अब शुक्रवार को हुए समझौते के बाद दोनों समूहों ने इस केस को वापस ले लिया है.
उल्लेखनीय है कि हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले इन दोनों व्यावसायिक समूहों के बीच समझौते के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहा था. मामले को निपटाने के लिए पहले एक केन्द्रीय मंत्री, हरियाणा के एक पूर्व सीएम और दोनों व्यावसायिक घरानों की ओर से मेल-मिलाप की कोशिशें की गईं थी, लेकिन ये कोशिशें परवान नहीं चढ़ी थीं.
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