
- डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान में कार्यशाला
Ranchi : अगले बजट सत्र के बाद वन संरक्षण एवं वनोत्पाद के वैल्यू एडिशन के माध्यम से रोजगार सृजन एवं इससे जुड़े लोगों को लाभ देने की बात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की है.
उन्होंने कहा है कि वनों पर आधारित उद्योग से राज्य के सुदूर ग्रामीण तथा वन आच्छादित क्षेत्रों के ट्राइबल सहित सभी वर्गों के लोगों को जोड़ कर उन्हें लाभान्वित करना उनकी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है. इसके लिए सरकार सामूहिक पट्टे के संबंध में भी विचार कर रही है.
ये बातें मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान में आयोजित दो दिवसीय ‘आजीविका वृद्धि एवं सतत् विकास के लिए वन अधिकार अधिनियम-2006 का प्रभावी क्रियान्वयन’ कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहीं.
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इस अवसर पर अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की सचिव हिमानी पांडे, डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान के निदेशक रणेंद्र कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे.
प्राकृतिक सौंदर्य से भरे कई राज्य अग्रणी राज्यों में शुमार
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में कई ऐसे राज्य हैं जिनके पास सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य है और वे राज्य आज देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हैं. गोवा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड ऐसे राज्यों में शामिल हैं. इन राज्यों के पास सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य है, परंतु हमारे राज्य झारखंड में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ खनिज संपदा की भी उपलब्धता है.
उन्होंने कहा कि सदियों से जंगलों में जो उपज होती है उसका वैल्यू एडिशन कर आय का स्रोत कैसे बढ़े इस पर चर्चा होती रही है. लेकिन यह चर्चा बहुत विलंब से हो रही है. जब समस्याएं उत्पन्न होती हैं तब हमारी आंखें खुलती हैं. वन संरक्षण एवं वन उत्पाद पर पहले से ही कार्य होने चाहिए थे.
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ओड़िशा सरकार की पहल सराहनीय
हेमंत सोरेन ने कहा कि कभी-कभी कानून में फेरबदल से जंगलों का नुकसान होता है. एक समय ऐसा भी था जब वन उत्पाद के रूप में बांस करील, महुआ, आंवला इत्यादि चीजों को बाजार में बेचने पर भी लोगों पर पुलिस की कार्रवाई होती थी. परंतु ऐसे कानूनों के संशोधन होने से कई चीजें सुगम हुईं हैं. ओड़िशा सरकार द्वारा पत्तल को लेकर लिये निर्णय पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के किसी भी कार्यक्रम में जो खाना-नाश्ता दिये जाते हैं, उनमें अब पत्तल का उपयोग किया जायेगा. उन्होंने कहा कि यह एक बहुत ही अच्छी पहल है. ऐसे निर्णयों से व्यवसाय, रोजगार और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
विकास में सहायक होगा कार्यशाला में आयी बातें
श्री सोरेन ने डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान को ऐसी कार्यशाला आयोजित करने के लिए अपनी शुभकामनाएं और बधाई दीं. उन्होंने कहा कि आनेवाले समय में यह संस्थान राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा. दो दिवसीय कार्यशाला में जो भी बातें सामने उभर कर आयेंगी राज्य के विकास में सहायक होंगी. ऐसी कार्यशालाओं पर वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कैसा मॉडल तैयार किया जाये, इस पर अवश्य चर्चा और शोध होनी चाहिए. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं दीं.
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