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ललितपुर पावर प्लांट के कोयला ट्रांसपोर्टिंग मामले में ट्रांसपोर्टर पर FIR, जांच के घेरे में CCL के जीएम, पीओ व अन्य अधिकारी 

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Ranchi: चतरा डीटीओ फिलिपियुश बारला को शिकायत मिली थी कि मगध आम्रपाली एरिया से जिस हाईवा से पावर प्लांट को कोयला जाता है, उसे नाबालिग ड्राइवर चलाते हैं. वो अपनी टीम के साथ बुधवार की रात औचक निरीक्षण के लिए निकले. सेरेगड़ा में नो इंट्री के दौरान उन्होंने कुछ हाइवा के कागजात की जांच की. इस जांच में हैरान करने वाला खुलासा हुआ है.

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एक दिन बाद का माइनिंग चालान

जांच में पाया गया कि ललितपुर पावर प्लांट के लिए जो भी हाइवा कोयला के लेकर प्लांट जा रहा है, उसका माइनिंग चालान एक दिन बाद की तारीख का है. जैसे अगर कोयले का ट्रांसपोर्टेशन तीन तारीख को हो रहा था, तो चालान चार सिंतबर का था. मामले में गड़बड़ी देखते हुए चतरा के खनन पदाधिकारियों से बात की गयी. उन्होंने बताया कि माइनिंग नियमों के मुताबिक, ये घोर अनियमितता की श्रेणी में आता है. जिस दिन यह जांच हुई उस दिन आम्रपाली-मगध प्रोजेक्ट से करीब 100 हाइवा कोयला लेकर प्लांट के लिए निकले थे. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि रोज ही करोड़ों रुपए का घोटाला पावर प्लांट, ट्रांसपोर्टर और सीसीएल के अधिकारी मिलकर करते हैं.

गोदावरी कॉमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड पर एफआईआर

ललितपुर पावर प्लांट के लिए मगध-आम्रपाली से कोयला ट्रांसपोर्टिंग का काम गोदावरी कॉमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी करती है. जो भी कोयला कोलियरी से प्लांट तक जाता है, सारे कोयले का उठाव करने का काम इसी कंपनी के पास है. बुधवार की रात जांच में इसी कंपनी की गाड़ियों में माइनिंग चालान में गड़बड़ी पायी गयी थी. पुलिस के एक आला अधिकारी का कहना है कि हमलोगों ने करीब 30 हाइवा की जांच की थी. लेकिन उस दिन  गोदावरी ट्रांसपोर्ट का करीब 100 हाइवा पावर प्लांट के लिए कोयला लेकर निकला था.

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अधिकारी ने बताया कि ये कोयला पीएलसी (पोस्ट लिंक कोल) की श्रेणी में आता है. इस श्रेणी के अंतर्गत जो कोयला आता है, उसे उसी जिले में जहां खनन हुआ है, रियायत दर पर उद्योगों को देना होता है. जिस कोयले का रेट मंडी में 3000 रुपए टन है. उसे पावर प्लांट को सिर्फ 886 रुपए टन की दर पर दिया जा रहा था. ऐसे में इस श्रेणी के कोयला में गड़बड़ करने से सरकार को सीधे तौर पर राजस्व का बड़ा घाटा होता आया है. गड़बड़ी पाए जाने पर पुलिस ने तीन तारीख को गोदावरी कॉमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड पर एफआईआर दर्ज कर ली है.

सीसीएल के आला अधिकारी जांच के घेरे में

इस पूरे गड़बड़झाला की कड़ी सीसीएल के आला अधिकारियों से जाकर जुड़ती है. पुलिस के एक आला अधिकारी ने बताया कि बिना सीसीएल की मिलीभगत से ऐसा करना संभव ही नहीं है. इसलिए आम्रपाली के जीएम आरवी सिंह समेत प्रोजेक्ट के पीओ (प्रोजेक्ट अफसर), कांटा बाबू और डिसपैच मैनेजर सभी आला अधिकारी जांच के दायरे में हैं. जांच के दौरान अगर इनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो इनके खिलाफ भी पुलिस एफआईआर कर सकती है.

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सीसीएल के अधिकारियों को कहना है कि ऐसा कांटा का खराब होने की वजह से हुआ है. लेकिन पुलिस का कहना है कि सिर्फ ललितपुर पावर प्लांट के लिए उठाए गए कोयले के साथ ही ऐसा कैसे हो सकता है. साथ ही सिर्फ गोदावरी ट्रांस्पोर्ट कंपनी के हाइवा के साथ ऐसा कैसे हो सकता है. इस मामले पर कई बार मगध-आम्रपाली के जीएम आरवी सिंह से बात करने की कोशिश की गयी. लेकिन उनका मोबाइल बंद आया.

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