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IAS अफसरों का बड़ा तबका महसूस कर रहा असहज, ऑफिसर ने बर्खास्त होना समझा मुनासिब, लेकिन वापसी मंजूर नहीं 

Ravi Aditya

 Ranchi: ब्यूरोक्रेसी का एक बड़ा तबका झारखंड में काम-काज को लेकर असहज महसूस कर रहा है. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के पांच साल पूरा होने के बाद भी वे झारखंड वापस नहीं आये. डॉ स्मिता चुग इसी साल रिटायर कर गईं, लेकिन उन्होंने वापस झारखंड कैडर में योगदान नहीं दिया. इसी तरह राजीव कुमार की पांच साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी हो चुकी है. लेकिन उन्होंने भी झारखंड कैडर में  योगदान नहीं दिया.

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ज्योत्सना वर्मा के झारखंड में योगदान नहीं देने के कारण उन्हें बर्खास्त किया गया. हालांकि उन्होंने रिमांडर का कोई जवाब नहीं दिया था.  इससे पहले भी टी नंदकुमार और एके चुग ने भी झारखंड की बजाये दिल्ली में काम करना बेहतर समझा. इसके पीछे अफसरों ने कई कारणों का हवाला भी दिया है.

झारखंड को नहीं मिल रहे आईएएस अफसर

झारखंड को केंद्र से आईएएस अफसर भी नहीं मिल रहे हैं. राज्य सरकार ने केंद्र से 12 आईएएस मांगे थे. इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके लिये राज्य सरकार ने कई बार रिमांडर भी भेजा. पहले आईएएस का इंटेक 110 था. इस कारण राज्य को अधिक संख्या में आईएएस नहीं मिल रहे थे. अब आईएएस का इंटेक बढ़ाकर 170 कर दिया गया है. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने 12 आईएएस की मांग की है.

बार-बार तबादला वजह तो नहीं  

बार-बार तबादला भी इसकी वजह बन गई है. यही वजह है कि मौका मिलते ही आईएएस केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाना उचित समझ रहे हैं.  दूसरी वजह यह भी है कि किसी भी आईएएस के लिये राज्य का मुख्य सचिव बनना बड़ी बात होती है. लेकिन ऐन वक्त चहेते को मुख्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपे जाने के कारण अफसर दिल्ली का रूख कर लेते हैं.

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बार-बार चहेते अफसरों को तवज्जो भी वजह

बार-बार चहेते अफसरों को तवज्जो भी अफसरों का दिल्ली रूख करने की वजह है. झारखंड में जो भी अफसर हैं, वे हर सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं. अगर किसी विभाग के अधिकारी को बदलने की बारी आती है, तो गिने-चुने अफसरों का ही नाम सामने होता है. ये अफसर पहले उस विभाग में काम कर चुके होते हैं. इस कारण नये चेहरे नहीं दिख पाते.

राज्य गठन से अब तक छह अफसर ले चुके हैं वीआरएस

राज्य गठन से लेकर अब तक छह अफसर विभिन्न कारणों से वीआरएस ले चुके हैं. इसमें मुनीगला, वीके चौहान, विमल कीर्ति सिंह, जेबी तुबिद, संत कुमार वर्मा  शामिल हैं. वहीं वर्तमान अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल के वीआरएस को मंजूरी मिल  गई है.

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 देश भर में 1987 आईएएस अफसरों की कमी

देशभर में 1987 आईएएस अफसरों की कमी है. देश भर में आईएएस के 6217 पद हैं. इसमें 4230 आईएएस ही कार्यरत हैं. जबकि झारखंड में 43 आईएएस अफसरों के पद रिक्त हैं. झारखंड में आईएएस के 205 पद हैं. इसमें 162 ही कार्यरत हैं. वहीं  देशभर में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के 1345 पद हैं, इसमें 645 आईएएस ही कार्यरत हैं.

कौन अफसर कितने साल से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं

राजीव कुमार: पांच साल से अधिक
बीके त्रिपाठी: पांच साल से अधिक
स्मिता चुग: पांच साल से अधिक (इसी साल रिटायर हो गईं)
के श्रीनिवास (राज्य प्रतिनियुक्ति पर तमिलनाडू)
चंद्रशेखर (राज्य प्रतिनियुक्ति पर बिहार)

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क्यों हो रही है आईएएस अफसरों की कमी

-निजी क्षेत्र के विस्तार के साथ नियामक तंत्र का विस्तार हो रहा है. जिसमें आईएएस की मांग बढ़ रही है.
-राज्य सेवा के अफसरों की आईएएस संवर्ग में प्रोन्नति भी एक कारण है. 
-प्रक्रिया जटिल होने, योग्य अफसरों की कमी के कारण भी आईएएस की कमी दूर नहीं हो रही है.
-लालबहादूर शास्त्री अकादमी मसूरी में प्रशिक्षण की सुविधायें नहीं हैं.

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