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सीएम चाचा रोज ही लुटती है हमारी इज्जत, कभी मालिक तो कभी साहेब रात में नोचते हैं, बचाइए ना हमें

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Bokaro/Gomia: हम मजबूर हैं. हम गरीब हैं. मजबूरन हमें न चाह कर भी यहां काम करना पड़ता है. काम नहीं करेंगे तो भूखे मर जाएंगे. लेकिन जीने के लिए यहां रोज ही मरना पड़ रहा है. कभी मालिक तो कभी साहेब लोग हर रात हमारी इज्जत तो अपनी हवस का शिकार बनाते हैं. आवाज उठाने पर हमें मौत दे दी जा रही है. आखिर हम करें तो क्या करें. सीएम चाचा रोज ही लुटती है हमारी इज्जत, बचाइए ना हमें. ये कहानी बोकारो जिला के गोमिया प्रखंड के आईएएल थाना की है. कुछ महिलाओं ने अपने ऊपर बीतनेवाली इस दरिंदगी को एक कोरे कागज पर शब्दों से बयां करने की कोशिश की है. टूटे-फूटे अलफाजों से दर्द बयां किया है. हिम्मत जुटा कर सूबे के मुखिया से बचाने की गुहार लगायी है. सीएम को चाचा कह कर एक रिश्ता जोड़ने की कोशिश की है. ताकि उन आदिवासी महिलाओं के साथ वो सब होना बंद हो जाये, जो हो रहा है.

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रोंगटे खड़े करनेवाली दास्तां है इनकी

बोकारो जिला के गोमिया प्रखंड के आइईएल थाना क्षेत्र की आदिवासी महिलाओं ने झारखंड के मुख्यमंत्री को गुमनाम पत्र भेज कर इज्जत बचाने की गुहार लगाई है. पत्र की कॉपी मुख्यमंत्री के अलावा बोकारो के उपायुक्त व एसपी को भी भेजी है. पत्र मिलने के बाद से महकमा सकते में है. महिला ने सीएम को भेजे गए पत्र में कहा है कि बोकारो के गोमिया में चल रहे एक अवैध क्रशर में काम करनेवाली महिलाओं के साथ हर रात दुष्कर्म होता है. कभी-कभार साहब लोग भी आते हैं और रात में क्रशर में उनके साथ गंदा काम करते हैं. उन्होंने अपनी चिट्ठी में कहा है कि एक बार करीब दो महीने पहले उन लोगों की तरफ से एक साथी ने आवाज उठाने की कोशिश की तो उसकी हत्या कर दी गयी.

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मार कर नदी में फेंक दी लाश

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एक रात जब क्रशर मालिक एक आदिवासी महिला के साथ हैवानियत कर रहा था तो महिला के भाई ने इसका विरोध किया. फिर क्या था क्रशर मालिकों ने उसके भाई की हत्या कर दी. शव को नदी में फेंक दिया. शव के सड़ जाने के बाद उसे गुमनाम शव बना दिया गया. आदिवासी महिलाएं लिखती हैं कि क्रशर मालिकों का ईंट भट्ठा भी है. यह भी आरोप लगाया है कि इन लोगों ने वन विभाग की जमीन को काट कर दो से तीन लाख ईंटें बना दी हैं. चिट्ठी में महिलाओं ने साफ लिखा है कि हम सब काफी गरीब हैं. काम नहीं करेंगे तो भूखे मर जाएंगे. लेकिन रोज ही हमलोगों की इज्जत लूटी जाती है. यदि क्रशर रात के बजाय दिन में चले तो ये गंदा काम हमारे साथ शायद ना हो. शिकायती पत्र के आखिर में महिलाओं ने लिखा है कि “चाचा इज्जत बचाइएगा हम सब गरीब, बहन और बेटी की.”

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प्रशासन ने जांच के लिए भेजा पुलिस के पास

शिकायत पत्र की प्रति सीएम के अतिरिक्त जिला प्रशासन के पास भी पहुंची है. उसे बोकारो के एसपी को भेज दिया गया है. गुमनाम पत्र में पांच लोगों के नाम भी बताए गए हैं. हालांकि घटना एवं शिकायत की पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी कि शिकायत कितनी सही है. इन सबके बावजूद भेजी गई शिकायत में केवल इज्जत बचाने के लिए रात्रि के बजाय दिन में क्रशर चलाने की मांग की गई है. नदी में शव मिलने की बात भी शिकायत में कही गई है. 12 जुलाई को कोनार नदी में भी एक युवक का शव मिला था, जिसकी पहचान नहीं हो सकी थी. यदि घटनाक्रम एकसाथ जुड़ता है तो यह पूरे महकमा के लिए स्तब्ध करनेवाली घटना होगी.

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