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प्रणव नमन कंपनी ने अच्छी क्वालिटी के कोयले में मिलाने के लिए कटकमसांडी रेलवे कोल साइडिंग में जमा कर रखा है हजारों टन चारकोल (देखें व पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट)

कोयला को नावा पावर कंपनी के अधिकारियों ने पकड़ा. जिसके बाद नावा कंपनी ने प्रणव नमन कंपनी से ट्रांसपोर्टिंग का काम छीन लिया.

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–     चार दिन पहले नावा पावर ने यूपी में पकड़ा था प्रणव नमन कंपनी का कोयला लदा 200 ट्रक.

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–     मुन्ना सिंह है प्रणव नमन कंपनी का लोडर, स्थानीय विधायक का है संरक्षण, दीपू पांडेय का साइडिंग पर है आतंक.

Ranchi: तीन दिन पहले न्यूज विंग ने एक खबर प्रकाशित की थी. खबर यह थी कि नावा पावर कंपनी के अधिकारियों ने बनारस में  200 ट्रक कोयला पकड़ा, जिसे प्रणव नमन नाम की ट्रांस्पोर्ट कंपनी भेज रही थी. जिसके बाद नावा कंपनी ने प्रणव नमन कंपनी से ट्रांसपोर्टिंग का काम छीन लिया. अब सवाल यह उठता है कि जब नावा पावर का कोयला रेलवे साइडिंग के बदले बनारस ले जाया जा रहा था, तो नावा पावर को रेलवे रैक से कौन सा कोयला भेजा जाता. इस सवाल का जवाब जानने के लिए न्यूज विंग हजारीबाग के कटकमसांडी रेलवे साइडिंग पहुंचा. वहां की स्थिति भयावह है. कटकमसांडी रेलवे साइडिंग पर प्रणव नमन कंपनी का कोयला जमा है. जिसके बीच में हजारों टन डस्ट (चारकोल) जमा करके रखा गया है.

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एक रैक में करीब 4000 टन कोयला लोड होता है

कोयला कारोबार के जानकार ने बताया कि असल में खेल प्रति रैक करीब 40 लाख रुपये की अवैध कमाई का है. सरकार पावर कंपनियों को सब्सिडाइज्ड रेट पर कोयला देती है. ताकि देश का अंधेरा दूर हो सके. पावर कंपनियां कोलियरी से कोयला उठा कर रेलवे साइडिंग तक पहुंचाने औऱ फिर रैक लोडिंग का काम ट्रांसपोर्ट कंपनियों को देती हैं. और ट्रांसपोर्ट कंपनियां हर रैक में करीब 25 प्रतिशत चारकोल मिलाकर पावर कंपनियों को भेज देती हैं. एक रैक में करीब 4000 टन कोयला लोड होता है. इस तरह हर रैक में 1000 टन चारकोल मिलाया जाता है. यही काम कटकमसांडी रेलवे साइडिंग पर किया जा रहा है. जो कोयला कटकमसांडी रेलवे साइडिंग पर पहुंचना चाहिए, उसे बाहर की मंडियों में भेज कर ऊंचे दाम पर बेच दिया जाता है औऱ उसके बदले उतनी ही मात्रा में चारकोल मिला कर रैक में कोयला लोड कर दिया जाता है.

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दीपू पांडेय कटकमसांडी का दबंग बताया जाता है

रेलवे रैक पर कोयला लोड करने का काम हजारीबाग के मुन्ना सिंह ने ले रखा है. मुन्ना सिंह को एक स्थानीय विधायक का संरक्षण प्राप्त है औऱ मुन्ना सिंह की देखरेख में ही रेलवे रैक पर अच्छी क्वालिटी के कोयले के साथ डस्ट (चारकोल) मिला कर लोड किया जाता है. जिसे पावर कंपनियों को भेजा जाता है. कटकमसांडी रेलवे साइडिंग पर पहुंच कर कोई यह चेक नहीं करे कि वहां चारकोल है या सिर्फ कोयला. वहां कोई वीडियोग्राफी या फोटो नहीं करे, इसकी जिम्मेदारी दीपू पांडेय नाम के व्यक्ति की है. दीपू पांडेय कटकमसांडी का दबंग बताया जाता है.

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रेलवे साइडिंग तक चारकोल पहुंचता कैसे है

न्यूज विंग के वीडियो में आप रेलवे साइडिंग पर चारकोल का पहाड़ और टीला देख सकते हैं. चारकोल के छोटे-छोटे टीलों के ऊपर अच्छी क्वालिटी का कोयला रख कर चारकोल (डस्ट) को ढंक दिया जाता है. ताकि खुली आंखों से किसी को चारकोल ना दिखे. अब सवाल यह उठता है कि रेलवे साइडिंग तक चारकोल पहुंचता कैसे है. और रेलवे साइडिंग पर चारकोल का क्या काम. क्या यह स्थानीय पुलिस, रेलवे पुलिस, सीसीएल की सहमति के बिना संभव है. शायद नहीं.

 

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