
Ranchi: पेयजल एवं स्वच्छता विभाग अब जल कर की वसूली करके अपनी योजनाओं के प्रभावी संचालन की तैयारी में है. राज्यभर में शहरी जलापूर्ति योजना का संचालन विभाग ही करता रहा है. पर इसके लिए जल कर की वसूली का जिम्मा स्थानीय निकायों पर ही है.
विभाग को इसके एवज में किसी प्रकार की राशि प्राप्त नहीं होती है. बल्कि निकायों द्वारा भी योजना के संचालन और सुदृढ़ीकरण में न कर अन्य कार्यों पर खर्च कर दिया जाता है. अब इसे रोका जायेगा.
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नगर विकास विभाग से लिया जाना है सहयोग
पेयजल मंत्री मिथिलेश ठाकुर की पहल पर सचिव आराधना पटनायक नगर विकास विभाग के सचिव के माध्यम से जल कर की राशि के उपयोग के लिए सहयोग लेंगी. राज्यभर में 19 बड़े शहरी जलापूर्ति योजना का संचालन पेयजल विभाग करता है. इसके लिए वाटर टैक्स की वसूली स्थानीय निकायों द्वारा की जाती है.
शहरी जलापूर्ति योजना के संचालन और उसके रख रखाव के लिए पेयजल विभाग के पास अलग से कोई फंड का प्रावधान नहीं होने से उसे समस्या आती रही है. नगर विकास विभाग से आग्रह किया जा रहा है कि शहरी जलापूर्ति योजना के तहत स्थानीय निकायों द्वारा वसूले गए जलकर की राशि को विभाग से संबंधित प्रमंडल को हस्तांतरित कर दिया जाये.
गौरतलब है कि विगत दिनों विभागीय मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने हटिया और रुक्का डैम का निरीक्षण किया था. डैम के समुचित प्रबंधन और रख रखाव के मामले पर उन्होंने स्थानीय निकायों की भूमिका से निराशा जतायी थी. कहा था कि निकाय पानी पेयजल विभाग के सहयोग से लेकर अपनी झोली भरते हैं. अब ऐसा नहीं चलेगा. स्थानीय निकायों से भी आवश्यक शुल्क लिया जायेगा ताकि इससे विभाग को पेयजलापूर्ति योजनाओं के संचालन में सहूलियत हो. इसी के आलोक में पेयजल विभाग नगर विकास विभाग से जल कर राशि की वसूली में सहयोग लेगा.
इन स्थानीय निकायों से लिया जाना है वाटर यूजेज चार्ज
धनबाद (फेज -1 और 2), कतरास, मधुपुर, बासुकीनाथ, चतरा, मेदिनीनगर, गुमला, कोडरमा, झुमरीतिलैया, चाईबासा, आदित्यपुर, रांची (हटिया, गोंदा), हजारीबाग, सरायकेला, बुंडू, मानगो और जुगसलाई.
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झारखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगा बजट, पेयजल संकट होगा दूर: मिथिलेश ठाकुर
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने शानदार बजट पेश करने के लिए सीएम हेमंत सोरेन का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि सरकार को बहुत अच्छी वित्तीय स्थिति प्राप्त नहीं हुई थी. पूर्व की सरकार ने अनाप-शनाप योजनाओं पर अनावश्यक खर्च करके राज्य का खजाना खाली कर दिया है, फिर भी विपरित परिस्थितियों के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार ने गरीबोन्मुखी प्राथमिकता वाला बजट दिया है. यह बजट झारखंड के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा.
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