
Giridih : तेरह साल पुराने 2007 के सांप्रदायिक दंगा के केस में मुक्त हुए पूर्व विहिप नेता विभाकर पांडे और वार्ड पार्षद सैफअली गुड्डु, बीजेन्द्र यादव समेत 37 पर दोबारा आरोप गठन कर केस चलेगा. इसकी स्वीकृति के लिए गिरिडीह उपायुक्त राहुल सिन्हा ने गृह, कारा, और आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखा है.
डीसी ने कहा है कि इन नामजद अभियुक्तों पर दुबारा अभियोजन चलाने के पर्याप्त सबूत हैं. डीसी की इस कार्रवाई से दंगाइयों के होश उड़ गये हैं.
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10 को किया गया था आरोपमुक्त
गौरतलब है कि केस में शामिल 10 आरोपियों को गिरिडीह के न्यायिक दडांधिकारी प्रथम श्रेणी के न्यायधीश बी. बी गौतम ने आरोप मुक्त कर दिया था. केस के नामजद अभियुक्तों में सैफअली गुड्डु और वीजेन्द्र यादव ने साल 2016 के जजमेंट की कॉपी उपलब्ध कराते हुए कहा कि जब 10 अभियुक्तों को आरोपमुक्त कर दिया गया, तो फिर प्रशासन उसी मामले में दुबारा अभियोजना कैसे चला सकता है.
इधर डीसी राहुल सिन्हा ने कहा कि साल 2007 में सांप्रदायिक दंगा का जो केस हुआ था, उस केस में कई धाराओं में आरोपियों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था.
जिसमें गिरिडीह नगर थाना कांड संख्या 250/2007 में धारा 147/148/149/337/379/332/435/427/333/353 और आईपीसी की धारा 153ए के तहत केस दर्ज किया था. सांप्रदायिक दंगा करने की धारा 153ए में इन लोगों को आरोपमुक्त किया गया है या नहीं, यह भी देखा जा रहा है.
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क्या है मामला
गौरतलब है कि साल 2007 में विहिप ने चक्का जाम आंदोलन किया था. चक्का जाम आंदोलन के दौरान ही दो समुदाय के बीच सांप्रदायिक दंगा हुआ था. जिसमें दोनों समुदाय की और कई शामिल थे. हिंसक झड़प के बाद नगर थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था.
जिसमें सांप्रदायिक दंगा करने और भड़काने के आरोप के अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया गया था.
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