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विकास योजनाओं में डीपीआर का जबरदस्त खेल, रवींद्र भवन का प्रोजेक्ट कॉस्ट भी बढ़ा

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Ranchi : प्रदेश में विकास योजनाओं का डीपीआर-डीपीआर बनाने का जबदस्त खेल जारी है. मल्टीनेशनल कंपनियां आनन-फानन में करोड़ों रुपए का कागजी प्लान बनाती है और अफसर उस पर काम भी शुरू करा देते हैं. बाद में डीपीआर में गड़बड़ी उजागर होती है तो डीपीआर फिर संशोधित किया जाता है. यह सिर्फ प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ाने के लिये होता है. राजधानी के टाउन हॉल में बन रहे रवींद्र भवन का भी फिर से संशोधित डीपीआर बना.

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कैसे हुआ डीपीआर का खेल

अफसरों ने एक साल पहले दो अप्रैल 2017 को भारत के तात्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को बुलाकर रवींद्र भवन का शिलान्यास कराया था. राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन को बिल्डिंग बनाने की जिम्मेवारी दी गई. दो साल में बिल्डिंग बनाकर देना था, लेकिन एक साल में एक पिलर तक नहीं बना. फिर डीपीआर संशोधित किया गया. हुआ यूं कि रवींद्र भवन में सिंगल बेसमेंट बनाने का प्रावधान किया गया था. इसमें करीब 550 चार पहिया और दो पहिया वाहन की पार्किंग क्षमता दी गई थी. लेकिन नगर विकास विभाग के अफसरों को इसकी जानकारी शिलान्यास के 10 माह बाद लगी. विभाग के सचिव के निर्देश पर फिर डीपीआर संशोधित किया गया. संशोधित डीपीआर के अनुसार अब डबल बेसमेंट का पार्किंग होगा. इसमें 450 चार पहिया वाहन और 600 दो पहिया वाहन लगाने की क्षमता होगी. डीपीआर रिवाइज्ड होने के बाद प्रोजेक्ट कॉस्ट भी करीब 15 करोड़ बढ़ गया.

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डीपीआर की गड़बड़ी से हुई देरी, अफसर भी जिम्मेवार

रवींद्र भवन का डीपीआर आईके वल्ड वाइड कंसल्टेंट ने तैयार किया था. इसमें आठ से अधिक कांफ्रेंस हॉल, कैफेटेरिया, मल्टी लेवल हॉल, कल्चलर हॉल भी बनाना था. इसके बावजूद कंसल्टेंट ने रवींद्र भवन में बिल्डिंग में सिंगल बेसमेंट पार्किंग बनाने का प्लान दिया. जहां मात्र 250 वाहनों की पार्किंग और 300 वाहनों की मैकेनिकल पार्किंग की व्यवस्था की गई. जुडको से लेकर नगर विकास विभाग के अफसरों ने डीपीआर को तकनीकी रूप से स्वीकृति भी दे दी. इसके बाद टेंडर कर शिलान्यास कराया गया. जब ठेकेदार ने बेसमेंट के लिए मिट्टी कटाव शुरू कर दिया. विभागीय सचिव ने निरीक्षण के दौरान पार्किंग की जानकारी ली तब गड़बड़ी सामने आई. इसके बाद उन्होंने डीपीआर में संशोधन कर डबल बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया.

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