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राज्यपाल बोलीं- सिर्फ विश्व आदिवासी दिवस के दिन समारोह आयोजित कर साल भर भूल जाने से विकास नहीं होगा

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Ranchi : विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य पर बोलते हुए गुरुवार को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि प्राकृति को बचाने का कार्य आदिवासी समाज कर रहा है. विश्व वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रहा है, ऐसे में जंगल और जमीन को संरक्षित करने का काम आदिवासी समाज की ओर से किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आज के बदलते हुए समय में पुरानी सभ्यता, संस्कृति एवं शिक्षा का आधुनिकीकरण हो रहा है तथा पुरानी परंपराओं को छोड़कर नये परिवेश में जीवनयापन किया जा रहा है, परुंत आदिवासियों ने अपनी परंपरा को कायम रखा है. उन्होंने कहा कि हड़िया आदिवासियों के देवताओं को अर्पित किया जाता है, लेकिन इसे सिर्फ प्रसाद के रूप डाला करें न कि नशा के लिए उपयोग करें. उन्होंने कहा कि विकास के लक्ष्य को योजना बनाकर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाये. सिर्फ विश्व आदिवासी दिवस के दिन समारोह आयोजित कर साल भर भूल जाने से विकास नहीं होगा. उक्त बातें राज्यपाल ने समाहरणालय परिसर में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम पर कहीं.

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बिना सरकारी सहायता के यह कार्यक्रम आयोजित करना अच्छी बात है

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सरकार द्वारा आदिवासी दिवस का आयोजन नहीं करने पर भी उन्होंने प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता के बिना ही इस आयोजन को झारखंड राज्य अनुसूचित जनजाति सरकारी सेवक संघ द्वारा किया जाना बहुत अच्छी बात है. कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखंड राज्य अनुसूचित जनजाति सरकारी सेवक संघ के अध्यक्ष तुरतन लुगुन द्वारा किया गया. विशिष्ट अतिथि के रूप में बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने विश्व आदिवासी दिवस समारोह के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आदिवासियों का विकास कैसे संभव हो, इस दिशा पर सरकार की ओर से पहल की जानी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके.

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