JharkhandRanchi

क्या कुछ नेता नहीं चाहते थे उमंग सिंघार लें प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस कोटे के मंत्रियों की फीडबैक!

Nitesh Ojha

Ranchi  :  अखिल भारतीय कांग्रेस के सचिव सह झारखंड प्रदेश कांग्रेस सहप्रभारी गुरुवार को अचानक अपना प्रदेश दौरा छोड़ वापस दिल्ली लौट गये. झारखंड आने का परमिशन कैंसिल होने की वजह से श्री सिंघार गिरिडीह से धनबाद और बेरमो जाने के बजाए वापस रांची लौट आये. फिर देर शाम दिल्ली चले गये. इस पूरे प्रकरण के पीछे की वजह कुछ और ही बतायी जा रही है.

पुख्ता सूत्रों का कहना है कि प्रदेश स्तर के कुछ नेता नहीं चाहते थे कि उमंग सिंघार प्रदेश और जिला स्तर के नेताओं से प्रदेश अध्य़क्ष और कांग्रेस कोटे के मंत्रियों की फीडबैक लें. अब उमंग सिंघार के दौरे को बीच में रोकने और नाराज विधायकों के साथ उनकी बैठक स्थगित करने को लेकर पार्टी के अंदर ही सवाल उठ रहे हैं. श्री सिंघार अपने प्रदेश दौरे के दौरान नाराज विधायकों से बातचीत कर उनकी नाराजगी को दूर करना चाहते थे. ऐसे विधायकों से भी बात करना चाहते थे जो “एक व्यक्ति एक पद” की मांग कर रहे थे. लेकिन वो ऐसा नहीं कर सके. इसी तरह उमंग सिंघार कांग्रेस कोटे के मंत्रियों पर भी फीडबैक लेना चाहते थे. जो कि पार्टी के ही कुछ नेताओं को नागवार था.

इसे भी पढ़ें – CM हेमंत सोरेन ने गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे पर किया कोर्ट केस

नाराज विधायकों से करनी थी बात

बता दें कि वर्तमान प्रदेश अध्य़क्ष डॉ रामेश्वर उरांव योजना सह वित्त, वाणिज्यकर, खाद्ध, सार्वजनिक वितरण तथा उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री भी हैं. दूसरी तरफ इरफान अंसारी जैसे विधायक लगातार “एक व्यक्ति एक पद” की मांग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. उनका इशारा प्रत्यक्ष तौर से डॉ उरांव के दो पदों को लेकर ही है. वहीं डॉ उरांव भी बीते दिनों इरफान के इस बयान पर नाराजगी जताते हुए कह चुके हैं कि पार्टी में किसी को भी रहना है, तो उसे अनुशासन का पालन करना होगा. पार्टी में उठे अंतर्कलह को समाप्त करने और नाराज विधायकों से उमंग सिंघार बातचीत करने आये थे. साथ ही वे नये प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर जिला और प्रदेश स्तरीय नेताओं से फीडबैक लेते. पार्टी सूत्रों का कहना है कि उमंग सिंघार को जाहिर तौर पर प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर नेगेटिव फीडबैक मिलता. ऐसे में दिल्ली केंद्रीय नेतृत्व को नये नाम पर विचार करना पड़ता. जबकि कई बड़े नेता ऐसा नहीं चाहते थे.

इसे भी पढ़ें – कोरोना काल में देश के बुद्धिजीवियों व वामपंथियों ने निराश किया, जिम्मेदारी नहीं निभाई

पुराने नेताओं को पार्टी में लाने की कोशिश ने तो नहीं करा दिया परमिशन रद्द

उमंग सिंघार के प्रदेश दौरे के परमिशन को बीच में ही रद्द करने के पीछे की वजह एक और भी बतायी जा रही है. दरअसल इन दिनों प्रदेश कांग्रेस में पुराने नेताओं को भी वापस लाने की राजनीति हो रही है. पार्टी के एक दिग्गज नेता आजसू में जा चुके प्रदीप बलमुचू को वापस पार्टी में लाना चाह रहे हैं. इससे प्रदेश नेतृत्व के कतिपय नेताओं को कोई परेशानी नहीं है. लेकिन लोहरदगा से कांग्रेसी विधायक रह चुके सुखदेव भगत (अभी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं) को भी पार्टी में लाने की मांग उठी है. कुछ नेताओं की मानें, तो ऐसा तभी हो सकता है कि जब वर्तमान की जगह नये प्रदेश अध्यक्ष पार्टी का काम संभाले. इसे देख कर भी कुछ नेता नहीं चाहते कि उमंग सिंघार नये प्रदेश अध्य़क्ष के नाम पर फीडबैक लेते.

इसे भी पढ़ें – हाइकोर्ट ने कहा – ऐसा लग रहा है आरोपी को बचा रही है पुलिस, हजारीबाग एसपी को हाजिर होने का आदेश

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button