Opinion

कोरोना काल में देश के बुद्धिजीवियों व वामपंथियों ने निराश किया, जिम्मेदारी नहीं निभाई

Girish Malviya

Jharkhand Rai

कोरोना काल मे सबसे अधिक निराश किन्हीं ने किया है तो वह हैं देश के बुद्धिजीवी और वामपंथी. यह ठीक है कि आप कोरोना को एक बीमारी मान रहे हों. उसे एक महामारी भी मान रहे हों. आप मानो, आपको पूरा हक है. लेकिन आप कम से कम उसके पीछे जो खेल रचा जा रहा है. उसे तो बेनकाब करो. उसके पीछे जो दक्षिणपंथ एक दुरभिसंधि रच रहा है. उसके बारे में तो लोगों को बताओ.

भारत में मोदी सरकार द्वारा जो सवा दो महीने का ड्रेकोनियन लॉकडाउन लागू किया गया. उससे कोरोना को तो कोई फर्क नहीं पहुंचा लेकिन देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो गयी. लेकिन एक भी वामपंथी और बुद्धिजीवी वर्ग के व्यक्ति ने उसके खिलाफ कोई आवाज बुलंद नहीं की.

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Samford

वामपंथी व बुद्धिजीवियों से ज्यादा अच्छा विरोध तो पूंजीपति वर्ग के प्रतिनिधि राजीव बजाज ने किया. जिन्होंने साफ-साफ यह कहा कि “मैंने पूरी दुनिया में कहीं से भी इस तरह के लॉकडाउन के बारे में नहीं सुना. जैसा भारत मे लागू किया गया. दुनिया भर से मेरे सभी दोस्त और परिवार हमेशा बाहर निकलने के लिए स्वतंत्र रहे हैं. यह काफी अजीब है. मुझे नहीं लगता कि किसी ने कल्पना की थी कि दुनिया को इस तरह से बंद कर दिया जाएगा. मुझे नहीं लगता कि विश्व युद्ध के दौरान भी दुनिया बंद थी. तब भी चीजें खुली थीं. यह एक अनोखी और विनाशकारी घटना है.”

राजीव बजाज ने जापान और स्वीडन का उदाहरण दिया. उन्होंने कहाः वे इन दोनों देशों ने लॉकडाउन नहीं लगाया. लेकिन उनके वहां भी कोरोना कंट्रोल में आ गया है. राजीव बजाज तो विकसित देशों के उदाहरण दे रहे थे. मैं आपको पाकिस्तान का उदाहरण देता हूं. कल पाकिस्तान के आंकड़े देख रहा था. आप सभी जानते हैं पाकिस्तान ने लॉकडाउन नहीं लगाया. इमरान ने उस वक्त कहा था कि पाकिस्तान अमेरिका, यूरोप और चीन की तरह लॉकडाउन लागू नहीं कर सकता है. देश की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि पूरे देश में लॉकडाउन लगा सकें. हमारा कमजोर वर्ग जिनमें 25 मिलियन लोग शामिल हैं, वे दैनिक या साप्ताहिक मजदूरी पर रहते हैं. हम कैसे लॉकडाउन लगा सकते हैं ?

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उस वक्त हमारा टीवी मीडिया लॉकडाउन नहीं लगाने पर पाकिस्तान को कितना क्रिटिसाइज कर रहा था आपको याद होगा ! पाकिस्तान में कब्रिस्तान में कब्र खोदते हुए लोगों के विजुअल चलाए जा रहे थे, मीडिया में पाकिस्तान बर्बाद हो जाएगा. यह कहा जा रहा था.

आप जानते हैं 4 अगस्त को पाकिस्तान के आंकड़े क्या थे ? पाकिस्तान में कुल 2,81,863 केस हैं. जिसमें से 2,56,058 लोग रिकवर कर चुके हैं. मौतें 6,035 हुई है. पाकिस्तान पूरी तरह से रिकवर कर चुका है. अब वहां मात्र 25 हजार के आसपास ही एक्टिव मरीज हैं. पिछले 24 घंटे में मौतें वहां मात्र 18 हुई हैं. जबकि भारत में रोज अब 800 मौतें हो रही हैं और वो भी तब जब हम भारत में सवा दो महीने का टोटल लॉकडाउन लगा कर अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर चुके हैं.

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और भी तमाम बड़े-छोटे देश हैं, जिन्होंने अपने यहां टोटल लॉकडाउन नहीं किया. वो भी कोरोना से उबरते हुए नजर आ रहे हैं. लेकिन अब कोई उनकी सफलता की बात नहीं कर रहा है. टीवी मीडिया तो राफेल, सुशांत सिंह और राम मंदिर में ही उलझा हुआ है.

क्या भारत के वामपंथी और बुद्धिजीवी वर्ग का यह फर्ज नहीं बनता था कि वह लॉकडाउन के पीछे जो पूंजीवादी दिमाग काम कर रहा है, उसे समझता ओर लोगों को भी समझाता ?

डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.

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