
Dhanbad: चासनाला कोलियरी में चाल धंसने से एक मजदूर की मौत हो गयी. यह घटना शुक्रवार देर रात हुई. मृतक ठेका मजदूर था. उसकी पहचान महताब आलम के रूप में हुई है. वहीं इस घटना में 116 मजदूर बाल-बाल बच गयी.
हादसे की सूचना मिलने के बाद देर रात तक अधिकारी खदान के अंदर ही रहे. रात करीब एक बजे मलबा हटाकर शव को बाहर निकाला गया. इधर, मजदूर की मौत की खबर के बाद खदान के बाहर बड़ी संख्या में श्रमिक, विभिन्न संगठन के नेता और मजदूर के परिजन जुट गये थे.
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अचानक गिर पड़ा कोयले का बड़ा हिस्सा
जानकारी के अनुसार कोल माइंस डेवलपर ठेका कंपनी के 117 मजदूर द्वितीय पाली में डीप माइंस में गये थे. रात में अचानक कोयले का बड़ा हिस्सा गिर पड़ा, जिसमें महताब आलम नाम का ठेका मजदूर दब गया.
जबकि अन्य मजदूरों ने खदान के अंदर ही भाग कर अपनी जान बचायी. अफरा-तफरी के बीच घटना की सूचना वरीय अधिकारी को दी गयी. इसके बाद कई अधिकारी मौके पर पहुंचे. इसके बाद खदान के अंदर फंसे मजदूरों को बाहर निकाला गया.
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मृतक के परिजन को 10 लाख का मुआवजा
सेल कोलियरी डिवीजन के चास नाला डीप माइंड खदान के 12 नंबर सिम में शुक्रवार की रात चाल धंसने की सूचना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गयी. आसपास के लोग और मजदूरों के परिजन घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गये थे. बहुत देर तक यह पता नहीं चल पा रहा था कि कितने मजदूर दबे हैं. जिसके बाद रात के करीब एक बजे मृतक मजदूर महताब आलम का शव निकाला गया.
घटना की खबर सुनकर विभिन्न ट्रेड यूनियन के नेता पहुंच गये. वहीं रात्रि पाली की ड्यूटी जाने के लिए पहुंचे मजदूरों की भीड़ भी लग गयी. मजदूरों ने घटना के बाद हंगामा शुरू कर दिया. इसके बाद सेल चासनाला कोलियरी के उपमहाप्रबंधक खनन संजय कुमार, सुरक्षा अधिकारी केपी महतो, शिफ्ट प्रबंधक रविंद्र शर्मा, सर्वेयर प्रबंधक नीरज मिश्रा खदान में उतर घटना स्थल पर गये.
रात करीब 11 बजे मजदूर एक-एक कर खदान से बाहर निकाले गये. वहीं प्रबंधन ने मृत मजदूर के परिजन को 10 लाख रुपया मुआवजा और एक आश्रित को नौकरी देने का आश्वासन दिया है. इस आश्वासन के बाद हंगामा कर रहे मजदूर शांत हुए.
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इसी कोलियरी में 375 मजदूरों की गयी थी जान
घटना की जानकारी मिलते ही लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति को देखते हुए धनबाद एसडीएम राज महेश्वरम, डीएसपी अजित कुमार सहित कई अधिकारी और सेल अधिकारी और पुलिस बल चासनाला कोलियरी पहुंचे और हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराया. मालूम हो कि यह वही डीप माइंस है जहां 7 दिसंबर 1975 को 375 मजदूरों की जल समाधि हो गयी थी.




